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मध्यप्रदेश में मां के पेट में बच्चा, बच्चे के पेट में बच्चा मिला! आखिर क्या है फीटस इन फीटू का मामला?
fetus in fetu : मध्य प्रदेश के सागर में एक दुर्लभ मामला सामने आया है, जहां छह दिन पहले जन्मे एक बच्चे के अंदर एक और भ्रूण मिला है। हालांकि महिला के आठवें महीने की सोनोग्राफी के दौरान डॉक्टर्स को इस कंडीशन के बारे में पता चल गया था। मेडिकल साइंस में इस स्थिति को फीटस इन फीटू ( fetus in fetu) कहा जाता है।
5 लाख मामलों में इस तरह का 1 केस सामने आता है, हालांकि मेडिकल साइंस में अब तक दुनिया में इस तरह के 200 केस ही रिपोर्ट हुए हैं। अब इस बच्चे का जीवन बचाने का एकमात्र उपाय सर्जरी है। आइए जानते हैं कि आखिर फीटस इन फीटू क्या है?

यह है पूरा मामला
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष और प्रोफेसर डॉ. पीपी सिंह ने बताया कि डिलीवरी से करीब 15 दिन पहले केसली की रहने वाली एक 9 महीने की गर्भवती महिला उनके प्राइवेट क्लिनिक में जांच के लिए आई थी। जांच के दौरान महिला के गर्भ में पल रहे नवजात के अंदर एक भ्रूण होने के संदेह पर इस पर महिला को फॉलोअप के लिए मेडिकल कॉलेज में जांच के लिए बुलाया गया।
यहां इसके लिए एक स्पेशल जांच की गई। इस जांच की रिपोर्ट में पाया गया कि महिला के गर्भ के अंदर पल रहे बच्चे के अंदर भी एक बच्चा या टेराटोमा है।
फीटस इन फीटू क्या है?
फीटस इन फीटू (Fetus in Fetu) एक दुर्लभ मेडिकल कंडीशन है, जिसमें एक असामान्य रूप से विकसित भ्रूण दूसरे जुड़वा भ्रूण के शरीर के अंदर विकसित हो जाता है। इसे परजीवी भ्रूण भी कहा जाता है। इस स्थिति में, परजीवी भ्रूण पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाता है और मेजबान भ्रूण के शरीर के अंदर रहता है।
यह स्थिति भ्रूण के विकास के शुरुआती चरणों में होती है, जब एक जुड़वा भ्रूण दूसरे भ्रूण के अंदर जाकर पनपने लगता है और उसके शरीर में अंगों का विकास होता रहता है। हालांकि, परजीवी भ्रूण के अंग जैसे कि रीढ़ की हड्डी, हाथ, पैर, और यहां तक कि सिर भी विकसित हो सकते हैं, लेकिन यह भ्रूण आम तौर पर जीवित नहीं होता।
इस स्थिति के लिए सर्जरी का सहारा लिया जाता है ताकि परजीवी भ्रूण को मेजबान के शरीर से निकाल दिया जाए। यह स्थिति अत्यधिक दुर्लभ है, और पूरी दुनिया में इसके बहुत ही कम मामले दर्ज किए गए हैं।
फीटस इन फीटू की पुष्टि आमतौर पर शारीरिक जांच, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन द्वारा की जाती है।
किन बातों का गर्भवती महिला को रखना चाहिए ध्यान?
गर्भवती महिलाओं गर्भधारण के शुरूआती दिनों में निजी या सरकारी अस्पताल में जाकर जांच और सोनोग्राफी करानी चाहिए। इसके लिए सरकार द्वारा रजिस्ट्रेशन के बाद प्राइवेट सोनोग्राफी सेंटर को भुगतान किया जाता है। ताकि गर्भावस्था के शुरुआत के चरणों में असामान्यता का पता लगाया जा सकें।



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