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फ्लैट हैड सिंड्रोम: न्यूबोर्न बेबी को सुलाते वक्त न करें ये गलतियां, वरना सिर हो जाएगा एक तरफ से चपटा
जब बच्चें कुछ महीने के होते हैं, तो कभी-कभी उनका सिर चपटा हो जाता है। ऐसा आमतौर पर इसलिए होता है क्योंकि पैदा होने के शुरुआती दिनों में वो अपना ज्यादात्तर समय अपनी पीठ के बल लेटे हुए बिताते हैं। इस वजह से उनका सिर एक ही पॉजिशन में ज्यादा देर तक रहता है। तो ऐसे में सिर नीचे से फ्लैट यानी चपटा हो जाता है।
इस स्थिति को फ्लैट हेड सिंड्रोम कहा जाता है। इसे मेडिकल टर्म में प्लेजियोसेफली और ब्रेकीसेफली भी कहा जाता है। पांच में से एक शिशु को कभी न कभी फ्लैट हेड सिंड्रोम होता है और अधिकांश बिना किसी उपचार के ठीक हो जाते हैं। लेकिन कुछ मामलों में ये समस्या शिशुओं में जीवनभर रह जाती है। बच्चें के सिर के सही उभार के लिए कुछ गलतियां करने से बचना जरुरी हैं। आइए जानते है अगर आपके बच्चें का सिर भी चपटा दिखने लगे तो क्या करें और कैसे इसे सही करें।

फ्लैट हेड सिंड्रोम के लक्षण
- बच्चे के सिर का पीछे का हिस्सा चपटा दिखता है।
- जहां से शिशु का सिर चपटा होता है, उस हिस्से पर आमतौर पर कम बाल होते हैं।
- जब शिशु के सिर को नीचे की ओर देखा जाता है, तो चपटा हुआ कान आगे की ओर धंसा हुआ हो सकता है।
- कई मामलों में बच्चें का सिर एक दिशा से उभरा हुआ दिखता है।

फ्लैट हेड सिंड्रोम की वजह
बच्चे अपनी पीठ के बल सोते हैं: ज्यादात्तर नवजात बच्चों को उनकी पीठ के बल सुलाने से अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम (एसआईडीएस) का खतरा कम हो जाता है। ज्यादात्तर न्यूबोर्न बेबी पैदा होने के बाद ज्यादात्तर समय अपनी पीठ के बल लेटे हुए बिताते हैं। एक ही पॉजीशन में सोने की वजह से भी बच्चों का सिर नीचे से चपटा होने लगता है।
तंग गर्दन की मांसपेशियां: तंग गर्दन की मांसपेशियां नवजात बच्चे को अपने सिर को एक विशेष तरीके से मोड़ने से रोकती हैं, जिससे उसके सिर के एक तरफ अधिक दबाव पड़ता है।
गर्भ में बच्चे के सिर पर दबाव होने की वजह : कभी-कभी गर्भ में बच्चे को लिए पर्याप्त एमनियोटिक द्रव नहीं होता है, या जुड़वां बच्चों के बच्चें से दवाब बढ़ जाता है। जिस वजह से भी बच्चों में ये सिंड्रोम देखने को मिलता है।
प्री-मैच्योर बच्चों में फ्लैट हेड सिंड्रोम ज्यादा: समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों के सिर चपटे होने की संभावना अधिक होती है क्योंकि उनकी खोपड़ी फुल टर्म शिशुओं की तुलना में नरम होती है। इसके अलावा, प्री मैच्योर बच्चे अपनी पीठ पर अधिक समय बिना हिलाए या उठाए हुए बिताते हैं और वे अपने सिर को एक तरफ से दूसरी तरफ नहीं ले जा सकते हैं।

बचाव या इलाज का तरीका
टमी टाइम: अपने बच्चे को दिन में कई बार उसके पेट के बल सुलाएं। टमी टाइम उन मांसपेशियों को विकसित करने में मदद करता है जो उन्हें बैठने और रेंगने में मदद करते हैं। यदि आपके शिशु को अपना सिर उठाने में परेशानी हो रही है, तो एक तौलिया को रोल करें और उसे अपने बगल के नीचे रखें। पास में कुछ खिलौने रख दें ताकि वे भी उनकी तरफ सिर घुमाने की कोशिश करें। बच्चें को टमी टाइम तभी दें जब आपका शिशु जाग रहा हो और सतर्क हो, और जब आप उस पर नजर रखने के लिए वहां मौजूद हों।
नींद के दौरान हेड पॉजिशन बदलते रहें: बच्चा जब नींद की पॉजिशन में हो तो उसका हैड पॉजिशन यानी सिर की स्थिति को बदलते रहें। इससे सिर पर एक तरफ पर दबाव कम पड़ेगा और बच्चे का सिर समान पॉजिशन में रहेगा।
राई का ताकिया बनाएं: बच्चें के पैदा होते ही उसे राई का ताकिया बनाया जाता है। ऐसा इसलिए सरसों का तकिया बच्चे के सिर को सही पोजीशन में रखने में सहायक हो सकता है और वो बच्चें के सिर को एक दिशा में दबाव नहीं बनने देता है।
गोद में उठाएं: नई मांओं का समय ज्यादात्तर बच्चों में निकल जाता है, इसलिए वो बच्चें को ज्यादा सुलाकर रखने में आराम महसूस करती हैं। लेकिन बच्चें को अक्सर उठाकर रखें, जिससे सिर पर दबाव न पड़े।



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