Latest Updates
-
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी -
Blue Moon 2026: 31 मई को आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'; जानिए इसकी खासियत, कहां और कैसे देखें -
Hindi Journalism Day: 30 मई को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और महत्व -
Kumaoni Sweet Bal Mithai Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड की पारंपरिक और स्वादिष्ट मिठाई -
महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है हलीम के बीज, अनियमित पीरियड्स समेत इन 5 समस्याओं को कर सकते हैं दूर -
गर्मियों में पसीने से होने वाली 5 कॉमन स्किन प्रॉब्लम्स, एक्सपर्ट से जानें इन समस्याओं से बचने के घरेलू उपाय -
World Digestive Health Day: क्यों मनाया जाता है विश्व पाचन स्वास्थ्य दिवस? जानें इस दिन का महत्व और इतिहास -
Grandma Style Aloo Baingan Recipe: दादी के हाथों जैसा चटपटा और लाजवाब स्वाद -
क्या ज्यादा तनाव लेने से ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है? AIIMS न्यूरोसर्जन ने बताई सच्चाई -
June 2026 Vrat Tyohar: निर्जला एकादशी से लेकर वट पूर्णिमा तक, जून के महीने में आएंगे ये प्रमुख व्रत-त्योहार
पहली प्रेग्नेंसी के बाद भी महिलाएं हो सकती हैं बांझपन का शिकार, जानें क्या हैं सेकेंडरी इनफर्टिलिटी?
What is secondary infertility : अक्सर डॉक्टर के पास ऐसे केस भी देखने को मिलता है देखा गया है कि एक बच्चा होने के बाद जब महिलाएं दूसरी बार प्रेग्नेंट होने का प्लान बनाती हैं, तो उनको कंसीव करने में काफी दिक्कत आती हैं। सेकेंडरी इनफर्टिलिटी (Secondary Infertility) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें एक महिला, जो पहले सफलतापूर्वक गर्भधारण और स्वस्थ बच्चे को जन्म दे चुकी हो, दोबारा गर्भधारण करने में कठिनाई का सामना करती है।
यह समस्या पुरुषों और महिलाओं दोनों में हो सकती है और इसके पीछे कई शारीरिक, मानसिक, या लाइफस्टाइल से जुड़े कारण हो सकते हैं। सेकेंडरी इनफर्टिलिटी एक ऐसी समस्या है, जिसमें पहले बच्चे के बाद दंपत्ति को दोबारा गर्भधारण में कठिनाई होती है। यूरोपियन सोसाइटी फॉर ह्यूमन रिप्रोडक्शन एंड एंब्रियोलॉजी की 2021 की स्टडी के अनुसार, दुनियाभर के करीब 20% कपल इस स्थिति का सामना करते हैं। इसके प्रमुख कारणों में एंडोमेट्रियोसिस, ट्यूबल ब्लॉकेज, और ओवेरियन सिस्ट शामिल हैं।

महिलाओं में सेकेंडरी इनफर्टिलिटी के संभावित कारण
उम्र का बढ़ना: उम्र के साथ अंडाणु की गुणवत्ता और संख्या कम हो सकती है।
हार्मोनल असंतुलन: पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम), थायरॉयड जैसी समस्याएं।
फैलोपियन ट्यूब की समस्या: संक्रमण, सर्जरी, या एंडोमेट्रियोसिस से फैलोपियन ट्यूब में रुकावट।
यूटरस से जुड़ी समस्याएं: फाइब्रॉइड्स, पॉलीप्स, या स्कार टिशू।
वजन में बदलाव: अत्यधिक वजन बढ़ना या घटना।
पुरुषों में सेकेंडरी इनफर्टिलिटी के कारण
स्पर्म काउंट में कमी: स्पर्म की गुणवत्ता या संख्या में कमी।
सेक्सुअल डिसफंक्शन: इरेक्टाइल डिसफंक्शन या शीघ्रपतन।
वजन या हार्मोनल असंतुलन: मोटापा या टेस्टोस्टेरोन का असंतुलन।
लाइफस्टाइल फैक्टर: धूम्रपान, शराब, या ड्रग्स का सेवन।
अन्य कारण
तनाव और मानसिक स्वास्थ्य: अत्यधिक तनाव गर्भधारण की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।
पिछले गर्भधारण से संबंधित जटिलताएं: अगर पिछले गर्भधारण के दौरान कोई बड़ी समस्या हुई हो।
लाइफस्टाइल: खराब खानपान, व्यायाम की कमी, या नींद की कमी।
इलाज
डॉ. शिखा गुप्ता के अनुसार, सेकेंडरी इनफर्टिलिटी का इलाज संभव है। यदि ट्रीटमेंट या दवाईयों से फायदा न हो, तो आईवीएफ एक प्रभावी विकल्प है। आईवीएफ प्रक्रिया के जरिए महिला गर्भधारण कर सकती है और दूसरा बच्चा कंसीव करना संभव हो सकता है। सही सलाह और उपचार से इस समस्या का समाधान किया जा सकता है।
इन ऑप्शन से महिलाएं कर सकती हैं कंसीव
मेडिकल ट्रीटमेंट: हार्मोनल थेरेपी, दवाइयां, या सर्जरी।
लाइफस्टाइल में बदलाव: संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, और तनाव प्रबंधन।
फर्टिलिटी ट्रीटमेंट: आईयूआई (Intrauterine Insemination), आईवीएफ (In Vitro Fertilization)।
काउंसलिंग: मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक समर्थन के लिए।
अगर आप या कोई जानने वाला इस समस्या से जूझ रहा हो, तो फर्टिलिटी विशेषज्ञ से संपर्क करना और जांच करवाना बेहतर होगा।



Click it and Unblock the Notifications