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IVF, IUI और Surrogacy में क्या है अंतर, जानें गर्भधारण के लिए कौनसा फर्टिलिटी ट्रीटमेंट चुने?
Difference Between ICU, IVF And Surrogacy : मां बनना हर महिला के लिए खास अनुभव होता है, लेकिन आजकल खराब लाइफस्टाइल की वजह से कई कपल इंफर्टिलिटी की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में कई महिलाओं का मां बनने का सपना अधूरा सा रह जाता है।
लेकिन मां बनने की इच्छा रखने वाली महिलाएं अपनी इस मुराद को पूरी करने के लिए कई तरह की फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का सहारा ले रही हैं। इनमें आईवीएफ (IVF), आईयूआई (IUI) और सरोगेसी जैसी कई तकनीके मौजूद हैं, जो महिलाओं का मां बनने का सपना पूरा करती है।
आइए आईवीएफ, आईयूआई और सरोगेसी के बीच का अंतर समझते हैं।

आईवीएफ (IVF)
आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशनमें महिलाओं के गर्भाशय में दवाइयों व इंजेक्शन की मदद से अच्छी क्वॉलिटी के बनाए जाते हैं। फिर इन अंडों को लैब में कल्चर डिश शुक्राणुओं के साथ मिलाकर फर्टिलाइज्ड किया जाता है। फिर इस भ्रूण को महिला की गर्भ में इम्प्लांट किया जाता है। फिर इस प्रोससे के 2 हफ्ते बाद रिजल्ट जानने के लिए प्रेगनेंसी टेस्ट किया जाता है। इसकी सक्सेस रेट करीब 70% तक होती है।
इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन तकनीक (IUI)
IUI यानि इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन एक आसान फर्टिलिटी ट्रीटमेंट है। ये टेक्निक आईवीएफ से की तुलना में आसान है। बिना किसी हार्मोनल पिल्स के इस प्रोसेस में अच्छे क्वॉलिटी के शुक्राणुओं चुनकर सीधा प्लास्टिक की पतली कैथेटर ट्यूब के जरिए महिला के ओव्यूलेशन के दौरान गर्भाशय यानी यूट्रस में इंजेक्ट किया जाता है। इससे गर्भधारण करने की संभावना बढ़ जाती है। आईयूआई में अगर महिला के दोनों फैलोपियन ट्यूबें ब्लॉक नहीं हैं और स्पर्म अच्छी क्वालिटी है, तो आईयूआई के सफल होने के चांसेज ज्यादा होती है।
सरोगेसी (Surrogacy)
सरोगेसी के मतलब है कि किराये की कोख यानी जो दंपति नेचुरल तरीके से माता पिता बनने में सफल नहीं हो पाते हैं, तो ऐसे में दंपति के शुक्राणु और अंडों को सरोगेट मदर यानी दूसरे महिला के गर्भ में इम्प्लांट किया जाता है, जहां 9 महीने भ्रूण विकसित होता है। सरोगेसी दो तरीके की होती है। एक ट्रेडिशनल सरोगेसी जिसमें सरोगेट मदर ही बच्चें की बायोलॉजिकल मदर होती है। वहीं जेस्टेशनल सरोगेसी में माता-पिता के शुक्राणु और अंडाणु को मिलाकर सेरोगेट मदर के गर्भ में इम्प्लांट कर दिया जाता हैं। हालांकि सरोगेसी के कुछ कानूनी नियम भी होते हैं।
IVF, IUI और सरोगेसी में अंतर
IVF की सफलता दर IUI की तुलना में ज्यादा होती है। जबकि IUI आसान और कम खर्चीला फर्टिलिटी ट्रीटमेंट है। IUI अमूमन पुरुष में प्रजनन समस्या या सर्वाइकल से संबंधित शिकायत होने पर किया जाता है। IVF में भ्रूण की गुणवत्ता परखी जा सकती है, जबकि IUI में ऐसा नहीं होता है। वहीं सरोगेसी प्रोसेस में सरोगेट मदर के गर्भ में कृत्रिम गर्भधारण के जरिए लैब में तैयार भ्रूण को इम्प्लांट किया जाता है। इस प्रोसेस में शुक्राणु पिता के हो सकते हैं और अंडा किसी और का भी हो सकता है। IVF की कीमत उसके अटैम्प पर निर्भर करती हैं। अगर पहली बार में IVF सफल हो जाता है तो ठीक है वरना दूसरे प्रयास के लिए उतनी ही फीस देनी होती है। इन सबमें सबसे महंगा प्रोसेस सरोगेसी है और इसको लेकर कानूनी पेच बहुत हैं। जबकि IVF और IUI में सिर्फ फॉर्मलिटीज को पूरा करना होता है।



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