मोबाइल की लत बच्‍चे को बना सकता है वर्चुअल ऑटिज्‍म का शिकार, पैरेंट्स इसे जरा भी हल्‍के में न ले!

बच्चा रो रहा है, तो माता-पिता अक्सर बच्चे को शांत करने के लिए हाथ में मोबाइल पकड़ा देते हैं, इससे बच्चा थोड़ी देर तो शांत हो जाता है लेकिन धीरे-धीरे वो मोबाइल और दूसरे इलेक्‍ट्रॉन‍िकल डिवाइस के गिरफ्त में कब फंस जाता है। पैरेंट्स को भी मालूम नहीं चलता है।

बच्‍चे को रोने से रोकने या उन्‍हें बिजी रखने के ल‍िए पैरेंट्स मोबाइल में उनका स्क्रीन टाइम बढ़ा रहे हैं, जो क‍ि आगे चलकर बच्‍चे को वर्चुअल ऑटिज्‍म का शिकार बना रहे हैं।

दुनिया भर में हुए कई रिसर्च में सामने आया है कि छोटी उम्र से ही बच्चों को फोन थमाने से उनका मानसिक विकास यानी मेंटल डेवलेपमेंट प्रभावित होता है। इससे वर्चुअल ऑटिज्म का खतरा बढ़ रहा है। आखिर क्या है वर्चुअल ऑटिज्म, इससे बच्चों को कैसे बचाएं यह जानने के लिए हमने एक्सपर्ट से बात की।

कितने साल के बच्चों में है ज्‍यादा खतरा
1-3 साल के बच्चों को इसका ज्यादा रिस्क होता है। नॉर्मली 5 साल तक के बच्चों पर इसका असर पड़ता है।

बच्चे नहीं मानते हैं तो क्या करें?
अगर बच्‍चें में मोबाइल की लत की आदत बढ़ गई है, तो आप इस आदत को छुड़ाने के ल‍िए उनके ल‍िए पसंद का खाना बनाएं। इनडोर गेम्स खेलें। पढ़ाई के लिए दवाब बनाने की जगह खेल-खेल में मैथ्‍स और सोशल साइंस जैसे सब्‍जेक्‍ट सिखाएं।

What is virtual autism, Know symptoms and Prevention

क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ

जयपुर के इंटरनल हॉस्पिटल के वरिष्‍ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक शर्मा , "सबसे पहले बच्चों को मोबाइल और टीवी से दूर करें। उनका स्क्रीन टाइम कम करें और नींद के पैटर्न में सुधार करें।" कोरोना टाइम में घर में ज्‍यादा समय बिताने के वजह से बच्‍चों का आउटडोर गेम्स कम हो और कई बच्‍चें मोबाइल फोन के आदी हो गए हैं। एकदम से मोबाइल की आदत को बच्‍चे से छुड़ाना बहुत ही मुश्किल काम है। इसके ल‍िए
पैरेंट्स को भी अपने व्यवहार में बदलाव लाने की जरूरत है। बच्चे अक्सर अपने माता-पिता को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं। इसल‍िए उनके साथ ज्‍यादात्तर क्‍वॉल‍िटी टाइम बिताए।

ऐसे इस सिचुएशन से डील करें

बच्चों को सोशल होना सिखाएं : वर्चुअल वर्ल्‍ड में बच्‍चे सोशल होना भूल गए है, इसमें पैरेंट्स की भूमिका सामने आती है। बच्चों के मेंटल डेवलेपमेंट के लिए जरूरी है कि उन्‍हें सोशल होना बताएं। उन्हें लोगों के साथ मिलने जुलने दें और उन्‍हें सोशल एक्टिविटी में पार्टिसिपेट करने के ल‍िए प्रोत्‍साहित करें। इससे कॉन्फिडेंस और सोशल तौर पर वे मजबूत होंगे।

स्ट्रेस बॉल और सेंसरी खिलौनें दें: बच्‍चों को मोबाइल की जगह उन्‍हें स्ट्रेस बॉल और सेंसरी खिलौने स्ट्रेस और तनाव को दूर करने के साथ ही बच्‍चों को इंगेज रखते हैं। इससे मोबाइल की लत से दूर भी रहते हैं।

पिक्‍चर बुक दे: बच्‍चों को पिक्‍चर बुक दे, इससे बच्‍चे इंगेज भी रहेंगे और मोबाइल से भी दूर रहेंगे। इसके अलावा रोजाना नई बुक पढ़ने से उनका आईक्‍यू तेज होता है।

फैक्‍ट
मार्च 2022 में इलेक्ट्रानिक्स और आईटी मंत्रालय ने संसद में रखे गए आंकड़ों में बताया कि भारत में 24% बच्चे सोने से पहले स्मार्टफोन चेक करते हैं और 37% बच्चे एकाग्रता यानी फोकस करने की क्षमता से जूझ रहे हैं।

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