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नवजात शिशु को क्यों किस नहीं करना चाहिए, वरना हो सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां
बच्चे प्यारे होते हैं और लगभग हर कोई उनकी ओर खिंचा चला आता है। छोटे-छोटे पैर, प्यारी मुस्कान, गोल-मटोल से गाल। उन्हें देखते ही उन पर प्यार लुटाने का मन करता है और बहुत सारी किस किए बगैर हम खुद को रोक ही नहीं पाते हैं। किस करना प्यार जताने का एक तरीका है और इसमें कोई हर्ज नहीं है। लेकिन अगर आप एक नवजात शिशु के माता-पिता हैं, तो हम आपको सख्त सलाह देंगे। हर किसी को अपने बच्चे को चूमने न दें, हालांकि हो सकता है आपके खास लोग इस चीज का बुरा मान जाएं, लेकिन इस सख्ती पीछे एक वजह छुपी हुई है। केवल बाहरी लोग ही नहीं, यहां तक कि आपको भी अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए किस करने से बचना चाहिए।

ये है वजह
नवजात शिशुओं की इम्यूनिटी कमजोर होती है, इसलिए पहले कुछ हफ्तों में उनकी अतिरिक्त देखभाल करना महत्वपूर्ण होता है। किसी भी तरह के वायरस और बैक्टीरिया के संपर्क में आने से उनकी जान जोखिम में पड़ सकती है। यह हमेशा कहा जाता है कि बच्चों को छूने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह धोना चाहिए क्योंकि हमारे हाथ हजारों रोगजनकों का घर होते हैं। इसी तरह, हमारे चेहरे पर भी हजार सूक्ष्मजीव होते हैं और जब हम बच्चों को किस करते हैं, तो ये बैक्टीरिया आसानी से छोटे बच्चे की त्वचा में ट्रांसफर हो जाते हैं।
खतरनाक संक्रमण होने का खतरा
यदि कोई वयस्क व्यक्ति जो हर्पीस सिंप्लेक्स वायरस टाइप 1 यानी एचएसवी 1 से संक्रमित है और बच्चे को किस करे तो इस वजह से बच्चे के मुंह में छाले हो सकते हैं। इसमें पहले होठों या मुंह के आसपास छोटा फफोला होता है। हालांकि, यह चेहरे के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है जैसे कि नाक, गाल और ठोड़ी। बच्चें इस वायरस के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। चुंबन के जरिए बच्चों तक वायरस आसानी से वायरस पहुंच सकता है और उनसे किसी और तक पहुंच सकता है। एक रिर्पोट के अनुसार 40 वर्ष की आयु तक, 90 प्रतिशत से अधिक लोग इस विशेष वायरस के संपर्क में आ चुके होते है और नवजात शिशुओं में फैल सकते हैं। यहां तक कि अगर वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति बच्चे के हाथों को छूता है, तो वायरस श्लेष्मा झिल्ली तक पहुंच सकता है, जिससे संक्रमण तेजी से फैल सकता है।

फूड एलर्जी
लिपस्टिक में ग्लूटेन होता है जो कि सीलिएक डिजीज से ग्रस्त बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकता है। लिपस्टिक लगाने के बाद बच्चे को किस करती हैं तो उससे शिशु को दिक्कत हो सकती है।
किसिंग डिजीज
मोनोन्यूकिलिओसिस को किसिंग डिजीज भी कहते हें। इसमें किस के जरिए सलाइवा बच्चे के मुंह में प्रवेश करता है। इसकी वजह से बच्चों में चिड़चिड़ापनऔर बहती नाक जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
क्या करें?
शिशुओं के लिए पहले कुछ महीने बहुत नाजुक होते हैं और माता-पिता को उनके आसपास अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। यहां तक कि अगर कोई इन्हें हाथ लगाना चाहता है, तो अपनी बाहों में लेना चाहता है, तो उन्हें पहले हाथ अच्छी तरह धो लेने और सैनिटाइजर यूज करने के लिए कहें। अगर कोई व्यक्ति बीमार है, तो उससे दूर रहने के लिए कहें। इसके अलावा शुरुआती महीनों में अपने बच्चों को भीड़-भाड़ वाली जगहों पर ले जाने से बचें और अपने घर में बहुत सारे मेहमानों को न आने दें। रिमोट, मोबाइल फोन और हैंडबैग आदि को हाथ लगाने के बाद आप भी अपने हाथों को अच्छे से साफ करें।



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