Latest Updates
-
Aaj Ka Rashifal 28 March 2026: शनिवार को इन 4 राशियों की पलटेगी किस्मत, जानें मेष से मीन तक भविष्यफल -
Yoga For PCOS: पीसीओएस से परेशान महिलाएं रोज करें ये 5 योगासन, हार्मोन संतुलन में मिलेगी मदद -
Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और पूजा विधि -
अमेरिका में तेजी से फैल रहा कोरोना का नया 'Cicada' वेरिएंट, जानिए लक्षण, कितना खतरनाक और कैसे करें बचाव -
इस दिन झाड़ू खरीदने से घर आती हैं लक्ष्मी, जानें झाड़ू से जुड़े जरूरी वास्तु नियम -
बैड कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में रामबाण हैं ये 5 हरे पत्ते, रोजाना सेवन से हार्ट भी रहेगा हेल्दी -
Navratri Day 9: नवरात्रि के नौवें दिन करें मां सिद्धिदात्री की पूजा, जानें पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती -
Navratri Day 9 Wishes: मां सिद्धिदात्री का आशीष मिले...इन संदेशों से अपनों को दें महानवमी की शुभकामनाएं -
Ram Navami 2026 Wishes Quotes: भए प्रगट कृपाला...इन चौपाइयों के साथ अपनों को दें राम नवमी की शुभकामनाएं -
Aaj Ka Rashifal 27 March 2026: जानें आज किन राशियों की चमकेगी किस्मत, किन्हें रहना होगा सावधान
World Prematurity Day 2023 : WHO भी मानता है प्री टर्म बेबी के लिए कंगारू केयर है वरदान, जानिए इसके फायदे
World Prematurity Day 2023 : WHO के अनुसार, विश्व में हर साल लगभग डेढ़ करोड़ बच्चे समय से पहले पैदा हो जाते हैं। जब बच्चे का जन्म प्रेग्नेंसी के 37 हफ्ते पूरे होने से पहले ही हो जाता है, तो ये प्रीमैच्योर बर्थ कहलाता है।
सातवें या आठवें महीने में जन्म लेने वाले बच्चों की इम्यूनिटी नौ महीने के बाद पैदा हुए बच्चों की तुलना में कमजोर होती है इसलिए इन्हें ज्यादा और खास देखभाल की जरूरत होती है।
समय से पहले जन्म लेन वाले शिशु को एक्स्ट्रा केयर की जरूरत होती है। समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं और उनके परिवारों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 17 नवंबर को वर्ल्ड प्रीमैच्योर डे मनाया जाता है।

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO) ने प्रीटर्म बेबी के लिए कंगारू केयर (kangaroo care) का सुझाव दिया है। इस साल वर्ल्ड प्रीमैच्योर डे 2023 की थीम भी इसी से संबंधित Small Action Big Impact : Immediate Skin To Skin Care For Every Baby Everywhere ही रखी गई है। यानी 'छोटे कार्य, बड़ा प्रभाव: हर जगह हर बच्चे के लिए तत्काल त्वचा से त्वचा की देखभाल'।
आइए जानते हैं कि कंगारू केयर क्या है और कैसे मां और बच्चे के लिए फायदेमंद हैं, जानें यहां-
क्या है यह कंगारू केयर
शायद आपको जानकर हैरानी हो कि सभी कंगारुओं को प्री मेच्योर बेबी पैदा होते हैं। उन्हें कुछ दिन तक अपने शरीर से लगे खोल में बच्चे को रखकर विशेष देखभाल करनी पड़ती है। बच्चे मां के साथ स्किन टू स्किन कांटेक्ट बनाकर विकसित होते हैं और उनकी इम्यूनिटी मजबूत होती है। ठीक यही बात इंसानों पर भी लागू होती है। इसलिए प्री-टर्म बेबी के मामले में अक्सर बच्चे के लिए कंगारु केयर की सलाह दी जाती है। इसके अंतर्गत नवजात शिशु और मां के बीच स्किन टू स्किन संपर्क बनाये रखने का अभ्यास किया जाता है।
1979 में पहली बार दिया गया था कंगारु केयर
फिजिशियन और शोधकर्ता एडगर रे सनाब्रिया और हेक्टर मार्टिनेज-गोमेज़ ने वर्ष 1979 में कोलंबिया के बोगोटा में कंगारू मदर प्रोग्राम विकसित किया। यह कम वजन वाले शिशुओं के लिए पारंपरिक इनक्यूबेटर उपचार के विकल्प के रूप में था। समय से पहले और कम वजन के बच्चों को तत्काल कंगारू मदर केयर की सुविधा दी जाती है।

WHO ने गिनाए फायदे
वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के अनुसार, इसमें बच्चे के साथ स्किन टू स्किन संपर्क बनाया जाता है। आमतौर पर इमैच्योर बेबी को जन्म के बाद मां से अलग कर दिया जाता है। बच्चे को इनक्यूबेटर में रख दिया जाता है। कंगारू केयर में बच्चे को मां के साथ आगे बांध दिया जाता है। इस दौरान स्तनपान भी कराया जाता है। मां के शरीर की गर्मी से समय से पहले या जन्म के समय कम वजन वाले बच्चे के जीवित रहने की संभावना में काफी सुधार हो जाता है।
कम होता है तनाव
मां को छोटे और बीमार नवजात शिशु से अलग करने पर मां और बच्चे दोनों में तनाव बढ़ता है। ऐसे समय में दोनों को अक्सर निकट संपर्क की आवश्यकता होती है। कंगारू मदर केयर इस बाधा को दूर करता है। इसमें प्रतिदिन लगभग 17 घंटे मां और बच्चे के बीच स्किन टू स्किन संपर्क प्रदान किया जाता है। मां और बच्चे को एक साथ रखने से बच्चे के जीवित रहने और बढ़ने में मदद मिलती है।
शोध में बताते हैं फायदे
न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित क्लिनिकल परीक्षण के नतीजे बताते हैं कि जन्म के तुरंत बाद बच्चे को कंगारू मदर केयर देना चाहिए। इसमें मां के स्किन टू स्किन कॉन्टेक्ट और खासतौर पर ब्रेस्टफीडिंग भी शामिल है। जैसे ही समय से पहले या कम वजन के बच्चे का जन्म होता है, यह प्रक्रिया शुरू करते ही बच्चें में सुधार आना शुरू हो जाता है।
ऐसे रखें प्री-मैच्योर बेबी का ख्याल
- शिशु के शरीर का तापमान नॉर्मल होना चाहिए। बच्चे को बहुत ज्यादा ब्लैंकेट ओढ़ाकर न रखें। बच्चे का टेंपरेचर 97.6 से 99.1 फारेनहाइट टेंपरेचर होना चाहिए।
- शिशु को अच्छी नींद पाने में आप उसकी मदद कर सकते हैं। कमरे में हल्की रोशनी रखें। प्रीमैच्योर बेबी को रात में ज्यादा भूख लगती है इसलिए आपको इन्हें फुल टर्म बेबी से ज्यादा बार दूध पिलाना पड़ सकता है।
- प्रीमैच्योर बेबी को हमेशा गुनगुने पानी से ही नहलाएं। पानी न तो बहुत ज्यादा गर्म होना चाहिए और न ही ठंडा। शिशु के एक महीने के होने तक किसी भी लोशन या तेल का उपयोग न करें।
- प्रीमैच्योर बेबी की इम्यूनिटी बहुत कमजोर होती है इसलिए इन्हें बाहर लेकर न निकलें वरना इंफेक्शन हो सकता है।



Click it and Unblock the Notifications











