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Chhath Puja Rules for Couples: छठ पूजा के दौरान पति-पत्नी शारीरिक संबंध बना सकते हैं या नहीं?
Chhath Puja Rules for Couples: पंचांग के अनुसार, 25 अक्टूबर को नहाय-खाय से छठ महापर्व की शुरुआत हो चुकी है, जिसका पारण 28 अक्टूबर को किया जाएगा। छठ पूजा का पर्व पूरे भारत में बेहद श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार सूर्य देव और छठी मइया को समर्पित है। चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत में व्रती कठोर नियमों का पालन करते हैं। छठ पूजा सिर्फ पूजा या व्रत नहीं, बल्कि शुद्धता, संयम और तपस्या का प्रतीक है। इस व्रत में खानपान से लेकर व्यवहार तक हर चीज में पवित्रता का ध्यान रखा जाता है। छठ पूजा के दौरान व्रती और परिवार के अन्य सदस्य शुद्धता और संयम का पालन करते हैं। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या छठ पूजा के दौरान शारीरिक संबंध बनाए जा सकते हैं या नहीं?
छठ पूजा के दौरान शारीरिक संबंध बना सकते हैं या नहीं? (Chhath Puja Rules for Couples)
छठ को सबसे कठिन व्रत कहा जाता है। इस व्रत में व्रती कई तरह के नियमों का पालन करते हैं। छठ व्रत चार दिनों तक चलता है, जिसमें नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य शामिल हैं। इन चार दिनों में व्रती को ब्रह्मचर्य का पालन करना जरूरी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस समय व्रती को अपने शरीर और मन को भगवान सूर्य और छठी मइया की उपासना में समर्पित करना चाहिए। छठ के दौरान व्रती अपने मन, शरीर और विचारों को पूरी तरह शुद्ध रखते हैं, ताकि पूजा का फल पूर्ण रूप से प्राप्त हो। पूजा और व्रत के दौरान शारीरिक संबंध जैसी तामसिक क्रियाएं व्रती की एकाग्रता और संकल्प को भंग कर सकती हैं, जिससे पूजा की पवित्रता पर असर पड़ सकता है।

धार्मिक मान्यताओं में भी छठी मइया को शुद्धता और मातृत्व की देवी कहा जाता है। छठ व्रत का उद्देश्य सिर्फ पूजा करना नहीं, बल्कि शरीर और मन को अनुशासित बनाना है। इस व्रत के जरिए व्यक्ति अपने भीतर की शक्ति, धैर्य और विश्वास को मजबूत करता है। ऐसे में, शारीरिक संबंध जैसी तामसिक गतिविधियां मन को अस्थिर करती हैं, जबकि छठ पूजा में मन की शांति और आत्मसंयम सबसे जरूरी माने गए हैं। जब व्रती इन चार दिनों तक पूरी श्रद्धा और संयम के साथ पूजा करती हैं, तो उन्हें सूर्य देव और छठी मइया का आशीर्वाद मिलता है। पूरी आस्था और पवित्रता से छठ का व्रत करने से संतान प्राप्ति, सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इसलिए व्रती को चाहिए कि छठ के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें और अपने मन को पूरी तरह ईश्वर की भक्ति में लगाएं। यही सच्चे अर्थों में छठ पूजा की साधना है, जिससे व्यक्ति को पूर्ण फल और दिव्य आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।



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