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छोटी दिवाली के दिन पति-पत्नी संभोग कर सकते हैं या नहीं? जानें 'काली चौदस' के नियम
Choti Diwali Husband Wife Relationship: छोटी दिवाली या काली चौदस (Narak Chaturdashi) दीपोत्सव का दूसरा दिन होता है, जिसे बुराइयों के नाश और आत्मशुद्धि का प्रतीक माना गया है। इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था, इसलिए इसे "नरक चतुर्दशी" भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन केवल दीपदान, स्नान और तामसिक ऊर्जा को दूर करने के लिए होता है।
ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या छोटी दिवाली की रात पति-पत्नी संबंध बना सकते हैं या यह वर्जित है? जिन लोगों की नई-नई शादी हुई है उनके दिल में खासतौर पर ऐसे विचार आते हैं। अगर आपका भी यही सवाल है तो आइए जान लेते हैं कि नरक चतुर्दशी के दिन पति-पत्नी को किन नियमों का पालन करना चाहिए।

छोटी दिवाली या काली चौदस पर संबंध बना सकते हैं या नहीं?
छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। इस दिन घर में दीपक जलाए जाते हैं और मां लक्ष्मी की पूजा के साथ-साथ मां काली की भी पूजा होती है। वहीं पति-पत्नी का ये भी सवाल होता है कि क्या छोटी दिवाली वाले दिन शारीरिक संबंध बना सकते हैं या नहीं? बता दें कि इस दिन पति-पत्नी को संयम रखने की सलाह दी जाती है।
काली चौदस पर संभोग क्यों माना जाता है वर्जित?
पुराणों और ग्रंथों के अनुसार, काली चौदस की रात तंत्र साधना और नकारात्मक ऊर्जा के नाश की रात मानी जाती है। यह दिन देवी काली और यमराज की पूजा के लिए समर्पित होता है। ऐसे में इस दिन शारीरिक संबंध बनाना तामसिक कर्म माना गया है, जो साधना और आत्मसंयम के विपरीत है। कहा जाता है कि इस दिन संभोग करने से दंपति के जीवन में नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और लक्ष्मी कृपा में बाधा आती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार क्या करें और क्या न करें
छोटी दिवाली की सुबह अभ्यंग स्नान (तेल से मालिश और स्नान) करना बहुत शुभ माना जाता है।
इस दिन दीपदान, हनुमान पूजा और यम दीपक जलाने का विशेष महत्व है।
काली चौदस की रात को संभोग, शराब, मांसाहार जैसे तामसिक कर्मों से दूर रहना चाहिए।
इस दिन साधना, ध्यान और देवी-देवताओं की उपासना से मन को शुद्ध करना शुभ होता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से संदेश
काली चौदस आत्मसंयम और नकारात्मकता को दूर करने का दिन है। यह वह रात्रि है जब हम अपने भीतर के "अंधकार" का नाश कर "प्रकाश" की ओर बढ़ते हैं। इसलिए इस दिन संयम और साधना को प्राथमिकता देना शुभ माना गया है।



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