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कम उम्र में बने हैं मैनेजर तो इन चार मिसटेक्स से बचें
हम सभी कम उम्र में सफलता हासिल करना चाहते हैं और बहुत से लोग इसे हासिल कर भी लेते हैं। वे कम उम्र में ही मैनेजर बन जाते हैं। लेकिन वास्तव में उनकी जर्नी यहीं पर खत्म नहीं होती। मैनेजर बनने के बाद उनकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। कई बार कम अनुभव होने के कारण वे कुछ गलतियां करते हैं। वैसे भी कहा जाता है कि मनुष्य गलतियों का
पुतला होता है और मैनेजर भी तो इंसान ही हैं। हालांकि, अधिकतर मैनेजर इस तथ्य को स्वीकार नहीं करते हैं कि वे गलतियां करते हैं जो अपने आप में एक गलती है। मैनेजमेंट की ग्रोथ के लिए जरूरी है कि खुद की गलतियों को पहचानने और सुधारने की कला सीखें। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको यंग मैनेजर द्वारा की जाने वाली कुछ गलतियों के बारे में बता रहे हैं-

टीम से कनेक्ट ना करना
पिछले कुछ सालों में हुए डिजिटल बदलावों ने काम के तरीकों में काफी परिवर्तन किया है। आज के समय में अधिकतर मैनेजर ईमेल के माध्यम से ही अपनी टीम के साथ कनेक्ट करते हैं। वे सिर्फ जरूरी मैसेज भेजते हैं या रिसीव करते हैं। इन दिनों में भौतिक संपर्क ना के बराबर हो गया है। लेकिन ऐसा करने से टीम मेंबर्स को वह मोटिवेशन नहीं मिल पाता है और वे अपने काम को उतनी गंभीरता के साथ नहीं करते हैं। इसलिए, यह सलाह दी जाती है कि आप अपनी टीम के सदस्यों के साथ नियमित रूप से बातचीत करें क्योंकि अपनी टीम को प्रेरित करने और उनकी समस्याओं को समझने की जिम्मेदारी भी आपकी ही है।
टीम के सदस्यों की बात नहीं सुनना
यह एक कॉमन मिसटेक है, जो यंग मैनेजर्स अक्सर करते हैं। कभी-कभी मैनेजर किसी प्रोजेक्ट के लिए अपने विज़न में इतने उलझ जाते हैं कि वे जाने-अनजाने में टीम के सदस्यों के विचारों या सुझावों को नहीं सुनना चुनते हैं। लेकिन ऐसा करने से आप कुछ अच्छे आइडियाज से चूक जाते हैं। हो सकता है कि टीम के सदस्यों की बात को ध्यान से सुनने से आपको ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हो, जिसके बारे में आपने सोचा भी ना हो। एक मैनेजर के रूप में आपको अपनी टीम के दृष्टिकोण को भी अवश्य समझना चाहिए।
जल्दी गुस्सा करना
यंग मैनेजर कम उम्र में ही एक बड़े पद को संभालने लगते हैं। ऐसे में उनमें अनुभव की कमी होती है। उन्हें टीम में खुद से बड़े उम्र के लोगों के साथ भी काम करना होता है। चूंकि, उन्हें कम उम्र में सफलता मिली है, इसलिए वे हर काम में सफलता ही चाहते हैं। लेकिन हर प्रोजेक्ट के साथ ऐसा ही हो, यह जरूरी नहीं है। यह देखने में आता है कि काम में जरा सी भी देरी या गलती होने पर वे जल्द ही अपना आपा खो देते हैं और गुस्सा करने लगते हैं। ऐसा करने से टीम के सदस्यों का मनोबल टूटने लगता है। इसलिए, हमेशा विनम्रता के साथ टीम को हैंडल करें। अगर कोई गलती हो भी गई है तो गुस्सा करने के स्थान पर टीम मेंबर्स के साथ मिलकर उसका हल खोजने का प्रयास करें।
कंस्ट्रक्टिव फीडबैक ना देना
यंग मैनेजर्स अक्सर अपने टीम मेंबर्स को कंस्ट्रक्टिव फीडबैक नहीं दे पाते हैं। यह उनके द्वारा की जाने वाली कॉमन मिसटेक्स में से एक है। हो सकता है कि आप इस पर बहुत अधिक ध्यान ना देते हों, लेकिन यह टीम की ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी है। जब आप अपनी टीम को कंस्ट्रक्टिव फीडबैक देते हैं तो इससे उन्हें खुद को इंप्रूव करने का मौका मिलता है। एक मैनेजर को सिर्फ कर्मचारियों की आलोचना ही नहीं करनी चाहिए, बल्कि वे उन्हें किस तरह दूर करके ग्रोथ कर सकते हैं, यह भी बताना चाहिए। साथ ही, उनकी क्वालिटीज को भी फीडबैक में जरूर मेंशन करना चाहिए।



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