Hariyali Teej पर शारीरिक संबंध बनाना सही या गलत? यहां हैं आपके सवाल का जवाब

Hariyali Teej Rules For Couple: हरियाली तीज का पर्व भारतीय महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। यह न केवल शिव-पार्वती की पूजा का पावन दिन है, बल्कि सुहाग, प्रेम और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है। महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं और पूरी श्रद्धा से पूजा-अर्चना करती हैं। ऐसे में अक्सर एक सवाल सामने आता है क्या हरियाली तीज जैसे पवित्र व्रत के दिन पति-पत्नी को शारीरिक संबंध बनाने चाहिए या नहीं?

यह विषय संवेदनशील जरूर है, लेकिन इसे समझना और जानकारी लेना उतना ही जरूरी है। अगर आपके मन में भी ये सवाल है तो यहां जानें उसका उत्तर वो भी धार्मिक और वैज्ञानिक कारणों के साथ।

Hariyali Teej Rules For Couple

क्या कहती है धार्मिक मान्यता?

धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो हरियाली तीज एक व्रत और संयम का पर्व है। इस दिन शिव-पार्वती की भक्ति में लीन रहना और आत्मसंयम बनाए रखना शुभ माना जाता है। व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है, जैसे सात्विक आहार, पवित्र विचार और संयमित जीवनशैली। इसी के अंतर्गत व्रत के दिन शारीरिक संबंधों से दूर रहना भी एक प्रकार का संयम माना गया है।

क्या शास्त्रों में है कोई स्पष्ट निर्देश?

शास्त्रों में इस विषय पर कोई सीधा निषेध नहीं है, लेकिन व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करने की बात जरूर कही गई है। खासतौर पर ऐसे व्रत जो देवी-देवताओं को समर्पित होते हैं, उनमें पवित्रता और मानसिक एकाग्रता बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। इसलिए कई लोग इस दिन शारीरिक संबंध से बचना उचित मानते हैं।

वैज्ञानिक कारण

अब बात कर लेते हैं वैज्ञानिक कारण की तो विज्ञान कहता है कि इस दिन महिलाएं पूरा दिन भूखी-प्यासी रहती हैं और व्रत रखती हैं। ऐसे में उनका शारीरिक संबंध बनाना शरीर की सारी शक्ति को खत्म कर देता है और उन्हें दुर्बल बना देता है। स्वास्थ्य कारणों के चलते विज्ञान भी कहता है कि इस दिन शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए।

Hariyali Teej Rules For Couple

आधुनिक सोच क्या कहती है?

आज के समय में जहां विज्ञान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को महत्व दिया जाता है, वहीं यह भी माना जाता है कि शारीरिक संबंध पति-पत्नी के प्रेम का एक अभिव्यक्ति है। अगर दोनों में आपसी सहमति है और व्रत को लेकर कोई धार्मिक बाध्यता नहीं मानते, तो यह पूरी तरह से व्यक्तिगत निर्णय होता है। ऐसे में यह पूरी तरह आप और आपके पार्टनर की समझ और आस्था पर निर्भर करता है। अगर आप धार्मिक रूप से व्रत का पालन कर रहे हैं, तो संयम रखना बेहतर होगा। वहीं यदि आप इसे परंपरा से अधिक भावनात्मक जुड़ाव मानते हैं और कोई धर्मसंकट नहीं है, तो आपसी सहमति से निर्णय लिया जा सकता है।

Story first published: Sunday, July 27, 2025, 14:27 [IST]
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