शादी के कुछ सालों बाद कपल्स में हो सकता है रूममेट सिंड्रोम, जानें क्या है ये और इससे कैसे बचे?

कहते हैं कि परिवर्तन संसार का नियम है। जिसका अर्थ है कि हर चीज समय के साथ बदलती है, फिर चाहे वह आपका कोई रिश्ता ही क्यों ना हो। अमूमन यह देखने में आता है कि शादी के बाद शुरुआती दिनों में दोनों पार्टनर एक-दूसरे के प्यार में पूरी तरह से डूबे होते हैं और उनके मन में अपने पार्टनर व रिलेशन को लेकर एक खास तरह की एक्साइटमेंट होती है, जिसे शादी में हनीमून पीरियड कहा जाता है।
लेकिन जैसे-जैसे समय गुजरता है, उनके दोनों के बीच की वह एक्साइटमेंट लगभग खत्म होने लगती है। इतना ही नहीं, वे दोनों अपनी-अपनी वैवाहिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हैं, लेकिन उनके रिश्ते में प्यार और भावनात्मक जुड़ाव काफी कम हो जाता है।

Know What Is Roommate Syndrome And How To Handle it

वे एक साथ एक ही छत के नीचे रहते हैं। यहां तक कि एक कमरा भी शेयर करते हैं, लेकिन फिर भी उनके रिश्ते में प्यार नदारद ही होता है। वे अपने रिश्ते को एक जिम्मेदारी समझकर निभाने लगते हैं। इसे वास्तव में रूममेट सिंड्रोम कहा जाता है। यह किसी भी कपल के लिए अच्छा नहीं है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको रूममेट सिंड्रोम के बारे में विस्तारपूर्वक बता रहे हैं-

रूममेट सिंड्रोम क्या है?

रूममेट सिंड्रोम वास्तव में शादीशुदा कपल्स के बीच वह स्थिति होती है, जब उन दोनों के बीच भावनात्मक व शारीरिक जुड़ाव काफी कम हो जाता है। इस सिचुएशन में कपल्स एक साथ एक घर या कमरे में तो रहते हैं, लेकिन उनके बीच किसी तरह का कनेक्शन नहीं होता है। वे आमतौर पर बस अपने काम व जिम्मेदारियों को ही प्राथमिकता देते हैं और रिलेशन को लेकर उनके बीच किसी तरह का उत्साह नहीं रहता है। उन दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन भी सकते हैं और नहीं भी, लेकिन इस स्थिति में भी उनके बीच वह इमोशनल कनेक्शन नहीं बनता है। वे वास्तव में एक रूममेट की तरह रहते हैं, जो एक-दूसरे के साथ सहज हैं, लेकिन उनके बीच वह पहले जैसा उत्साह या बॉन्ड नहीं रहता है।

रूममेट सिंड्रोम के कारण क्या हैं?

कपल्स के बीच रूममेट सिंड्रोम के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। उनकी बढ़ती जिम्मेदारियां या फिर एक-दूसरे को नजरअंदाज करना इसकी वजह बन सकता है। मसलन-
• वे अपनी अन्य जिम्मेदारियों को अधिक तरजीह देते हैं। जैसे- बच्चों का पालन-पोषण या परिवार की देखभाल करना।
• जिम्मेदारियों के बोझ तले अपने रिश्ते को ताक पर रख देना।
• एक दूसरे को बिल्कुल भी समय ना देना।
• कपल्स के बीच फिजिकल कनेक्शन ना होना या फिर बहुत कम होना।
• पार्टनर के साथ कम्युनिकेशन गैप क्रिएट करना या फिर उससे बहुत कम बात करना।
• झगड़े के डर से आपस में बात करने से बचना और फिर इमोशनली दूर होना।
• कई बार गलतफहमी या फिर विश्वास की कमी के कारण भी ऐसा होता है।
• पार्टनर का किसी अन्य व्यक्ति के साथ इमोशनल कनेक्शन अधिक होना।
• रिलेशन से अधिक अपनी खुद की आइडेंटिटी पर ही फोकस करना।

रूममेट सिंड्रोम से कैसे निपटें?

रूममेट सिंड्रोम को किसी भी लिहाज से सही नहीं माना जाता है, क्योंकि यह कपल्स के साथ में रहते हुए भी उन्हें भावनात्मक रूप से अकेले होने का ही अहसास करवाता है। इसलिए इस स्थिति से निपटने के लिए कुछ तरीके अपनाएं। मसलन-
• अपने पार्टनर से बात करें और यह समझने की कोशिश करें कि ऐसा क्या है, जो उन्हें साथ रहते हुए भी दूर कर रहा है।
• रिलेशन में हमेशा ओपन कम्युनिकेशन को ही तरजीह दें। जिससे आपके बीच कभी भी कम्युनिकेशन गैप ना हो।
• अपने पार्टनर के करीब आने के लिए उसकी पसंद की कुछ छोटी-छोटी चीजें जरूर करें।
• भले ही आप कितना भी बिजी हों, लेकिन कुछ वक्त अपने पार्टनर व रिलेशन के लिए जरूर निकालें। वह वक्त सिर्फ आप दोनों का ही हो।
• रिलेशन में फिर से एक्साइटमेंट लाने के लिए छोटे-छोटे सरप्राइजेस प्लॉन करें।
• अपने पार्टनर के लिए हर बार एक ही चीज करने से बचें। नयापन लाने के लिए हर बार कुछ अलग व नया करने की कोशिश करें।

Story first published: Saturday, January 20, 2024, 9:00 [IST]
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