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Gaslighting: गैसलाइटिंग क्या होता है?, किस तरह से डालता है असर, कैसे आप बच सकती हैं इससे, जानें

जब कोई शख्स आपके साथ आपके ही आत्मविश्वास पर उंगली उठाने लग जाता है। वो ये आपको बताता रहता है कि आप गलत कर रहे हैं, वो आपकी समझदारी, आपकी याददाश्त पर भी सवाल खड़े करने लगता है। जिसकी वजह से आप खुद से परेशान होने लग जाते हैं और अंदर ही अंदर टूटने लगते हैं। गैसलाइटिंग एक तरह से इमोशनल एब्यूज है, जिसमें शख्स आपको मेंटल तरीके से एक बड़े रूप में खुद पर से विश्वास खत्म करने की कोशिश करता है। गैसलाइटिंग कहीं पर भी, आपके घर, परिवार, वर्क प्लेस पर भी होता है। गैसलाइटिंग सबसे ज्यादा रिलेशनशिप और वर्क प्लेस पर देखी जाती है। इसलिए इसके संकेतों को पहचानना बहुत ज्यादा जरूरी है, तभी आप गैसलाइटिंग से बच सकते हैं, खुद को सेफ रख सकते हैं। रिलेशनशिप में पार्टनर आपका फायदा उठाता है, आपको गुमराह करता है, यहां तक की आपको इतना कमजोर बना देता है कि आप सिर्फ उसके सहारे रहे, जिससे उसका मकसद पूरा होता रहता है। पार्टनर आपको मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है, जिसे आप समझ नहीं पाते हैं।

Gaslighting: ऑफिस या वर्क प्लेस पर भी होती है गैसलाइटिंग
ये आपके साथ आपके ऑफिस या वर्क प्लेस पर भी होता है। जिसमें आपको ये बताने की कोशिश की जाती है कि आप सही से काम नहीं कर पाते हैं, चीजें आपको याद नहीं होती है, (लेकिन आप इस बात को अच्छे से जानते है कि आपकी मेमोरी शॉर्प है, आप चीजे भूलते नहीं हैं) लेकिन फिर भी आपका आत्मविश्वास कम होने लग जाता है। दूसरा शख्स आपको दोष देने लग जाता है कि आप उसे कंफ्यूज कर रहे हैं या फिर उसे गलत ठहरा रहे हैं। अगर ऐसा आपके साथ भी हुआ है तो आप समझ ले कि आप गैसलाइटिंग (Gaslighting ) का शिकार हो रहे हैं। ये आपके आत्मविश्वास को कमजोर कर देती है, खुद को दोष देने लग जाते है, ये सारी स्थितियां काफी परेशान करने वाली होती हैं।

Gaslighting: गैसलाइटिंग सबसे ज्यादा असर मेंटल हेल्थ पर
गैसलाइटिंग की वजह से सबसे ज्यादा असर आपकी मेंटल हेल्थ पर पड़ता है। ये काफी खतरनाक होती है, इसमें आप अंदर ही अंदर खुद को दोष देने लग जाते हैं, आपका विल पॉवर खत्म होने लगता है। गैसलाइटिंग एक शख्स का आत्म-सम्मान छीन लेती है, उसे लगने लगता है कि जो उसके साथ हो रहा है वो उसी के काबिल हैं।

Gaslighting: रिलेशनशिप खत्म होने के बाद भी गैसलाइटिंग का प्रभाव
अगर आपने टॉक्सिक रिलेशनशिप खत्म भी कर दिया, गैसलाइटिंग का प्रभाव अपने ऊपर बना रहता है। आप इससे बहुत जल्दी नहीं ऊबर पाते हैं, क्योंकि गैसलाइटिंग करने वाले शख्स ने आपको अंदर तक नुकसान पंहुचाया है, आपका आत्म सम्मान खत्म करने की पूरी कोशिश की है, आप खुद से नफरत करने लगे हैं, आपको फीलिंग महसूस नहीं होती है। ये कंडीशन भयावह होती है।

Gaslighting: पीड़ित शख्स खुद पर ही शक करता है
गैसलाइटिंग से मेंटल इश्यू, एंजाइटी, डिप्रेशन जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो जाती है। पीड़ित शख्स खुद पर ही शक करने की स्थिति में आ जाता है। उसका आत्म-सम्मान कम होता, वो अपनी ही बातों पर विश्वास नहीं करता है, उसे खुद पर से सकीन कम होने लग जाता है।

Gaslighting: कहां से आया गैसलाइटिंग शब्द ?
गैसलाइटिंग शब्द सन 1938 में पैट्रिक हैमिल्टन के एक स्टेज प्ले ‘गैस लाइट' के बाद बनी एक फिल्म से आया। इस नाटक में एक अपमान करने वाला पति अपने घर की गैस लाइट की रोशनी को कम देता है और पत्नी को मैन्युप्लेट कर ये सोचने पर मजबूर करता है कि उसे लाइट को लेकर कन्फ्यूजन है। इसके बाद 60 के दशक में "गैसलाइटिंग" एक आम बोलचाल में इस्तेमाल होने वाला शब्द बन गया था। जिसका मतलब किसी शख्स के सोचने-समझने की कंडीशन में बदलाव करना, उसे गुमराह करने से था।



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