लता मंगेशकर के जीवन में प्रेम ने दी थी दस्तक, मगर इस वजह से मुकम्मल न हो सका प्यार

6 फरवरी 2022 की सुबह पूरा देश शोक लहर में संलिप्त हो गया जब भारत रत्न और स्वर कोकिला लता मंगेशकर के निधन का समाचार मिला। वे करीब एक महीने से मुंबई के कैंडी ब्रीच अस्पताल में भर्ती थी और अचानक ज्यादा तबियत बिगड़ने के बाद उनका निधन हो गया। वे 7 दशकों से बॉलीवुड से जुड़ी थीं और अपने करियर में करीब 36 भाषाओं में 30 हज़ार से ज्यादा नगमें गाए थे। अपने करियर में कई वर्षों तक बुलंदी पर रह चुकी और देश के कई नामी सम्मानों से नवाज़ी जा चुकी लता जी के जीवन से जुड़ी बहुत कम जानकारियां ही पब्लिक में थी। वे ताउम्र अविवाहित रहीं और अपनी पूरी ज़िन्दगी अपने परिवार और गायन के प्रति ही समर्पित कर दी। लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक़ लता दीदी अपने जीवन में प्रेम से दूर नहीं रह पाई थीं। जानते है उनके जीवन के इस पहलू के बारें में।

क्यों नहीं की थी लता जी ने शादी?

क्यों नहीं की थी लता जी ने शादी?

सालों पहले एक इंटरव्यू के दौरान लता जी ने अपने अविवाहित होने का कारण बताया था। उनके मुताबिक, जब वे मात्र 13 वर्ष की थीं तब उनके पिताजी का देहांत हो गया था और उसके बाद अपनी 3 छोटी बहनों और एक छोटे भाई की पूरी ज़िम्मेदारी उन्हीं के कन्धों पर आ गई। बेहद कम उम्र में ही उन्होंने आय के लिए काम करना शुरू कर दिया और परिवार की ज़िम्मेदारियां संभालने में व्यस्त हो गईं।

इनके प्रति हुई थीं आकर्षित

इनके प्रति हुई थीं आकर्षित

अपने पूरे जीवनकाल में अफवाहों और विवादों से दूर रहीं लता जी का नाम महज़ एक बार किसी से जुड़ा था। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक़, राजस्थान के पूर्व डूंगरपुर राजघराने के राज सिंह से प्रेम हुआ था। वे पूर्व क्रिकेटर और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष भी थे। ख़बरों के मुताबिक़ एक क्रिकेट मैच के दौरान लता जी को राज सिंह का खेल काफी पसंद आया था और तभी से दोनों की मुलाकातों का दौर शुरू हुआ था। जहां लता जी क्रिकेट की शौक़ीन थी और राज सिंह के खेल पर कायल थीं तो वहीं राज सिंह भी लता की आवाज़ पर मर मिटते थे। वे हमेशा उनके गानों का एक कैसेट अपनी जेब में रखा करते थे।

इस कारण रह गया अधूरा प्यार

इस कारण रह गया अधूरा प्यार

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ लता जी और राज सिंह जी अपने प्रेम को मुकम्मल करने के लिए विवाह की योजना भी बना बैठे थे। परन्तु राज सिंह के पिता ने उनके इस फैसला का विरोध किया और इस रिश्ते को मंज़ूरी नहीं दी। उनका मानना था कि शाही घराने की बहू कोई शाही परिवार की ही कन्या होनी चाहिए। लता दीदी एक सामान्य परिवार की थीं। राज सिंह ने अपने पिता की बात मानकर शादी ना करने का फैसला किया। हालांकि आगे चलकर उन्होंने भी जीवनभर शादी नहीं की और दोनों अविवाहित ही रहें। इसके बाद उनकी गहरी दोस्ती और इस रिश्ते की बातें केवल यादों में ही रहीं।

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