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International Women's Day: संपत्ति में महिलाओं को मिलते हैं कई सारे अधिकार, इस तरह से मांग सकती हैं अपना हक

एक वक्त था जब देश की महिलाओं को किसी भी तरह की संपत्ति में अधिकार नहींं दिया जाता था। पिता की संपत्ति में सिर्फ बेटे का अधिकार माना जाता था। लेकिन देश के संविधान के द्वारा महिलाओं को भी पिता, पति की संपत्ति में अधिकार देने के प्रावधन किया गया। संपत्ति के अधिकार से बेटियों को फाइनेंशली ताकत मिली। भारतीय महिलाओं को किन-किन तरह के और कैसे संपत्ति के अधिकार मिले हैं, इंटरनेशनल विमेंस डे के खास मौके पर महिलाओं में संपत्ति को लेकर जागरूक करने के लिए इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ बेंच की वकील कुलसुम फिरदौस ने इस संबंध में डीटेल हमारे साथ शेयर किया है-
देश में धर्म के आधार पर भी उत्तराधिकार कानून बने हुए हैं, जिसमें संपत्ति से कानून हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 2005, हिंदू उत्तराधिकार संशोधन अधिनियम 2005, व हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 है। वहीं मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार, मुस्लिम पर्सनल लॉ एप्लीकेशन एक्ट 1937, भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 संपत्ति से जुड़े कानून है। इसी तरह से ईसाई कानून है।
आइये जानते हैं कि संपत्ति कानून के कारण देश की महिलाओं के जीवन को कैसे बदल दिया, उनको इन कानूनों से काफी फायदा हुआ है-
हिंदू कानून में महिलाओं के लिए संपत्ति और विरासत लॉ
देश में हिंदू धर्म में महिलाओं के लिए लागू विरासत कानून (Inheritance Laws for Women) इस प्रकार से है-
पत्नी को संपत्ति में अधिकार
विवाहित महिला का उसकी निजी संपत्ति पर पूरा हक होता है। ये संपत्ति उसकी अर्जित और तोहफे में मिली होती है, जिसे वो अपनी मर्जी से रख और बेच सकती है। महिला का पति की संपत्ति में भी उसको बच्चों के बराबर हिस्सा मिलता है।
बेटी को संपत्ति में अधिकार
घर की बेटी का अपने भाईयों की तरह की पैरेंट्स की संपत्ति पर बराबर का हक होता है। बेटी अगर विधवा है या पति के द्वारा तलाकशुदा है तो वो पिता के घर का हिस्सा मांग सकती है।
बहू को संपत्ति में अधिकार
विरासत कानूनों में बहू को बहुत कम अधिकार मिले हैं। सास-ससुर की संपत्ति पर घर की बहू का अधिकार नहीं होता है। इन संपत्ति में पैतृक और अर्जित दोनों ही शामिल है। बहू सिर्फ पति की संपत्ति पर अधिकार कर सकती है।
मुस्लिम पर्सनल लॉ या इस्लामी कानून के तहत महिलाओं को अधिकार-
शरिया कानून के तहत- महिला का अपनी संपत्ति पर पूरा हक होता है। जिसे वो अपने अनुसार इस्तेमाल कर सकती है। घर की बेटी को पिता का संपत्ति में से आधा हिस्सा मिलता है। बेटियों को माता-पिता के घर में शादी तक और विधवा होने/तलाकशुदा होने पर भी रहने का अधिकार है।



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