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Women’s Day 2023: भारत की हर विवाहित महिला को मिले हुए हैं ये कानूनी अधिकार, जिनके जरीये मांगिए अपना हक़

आज ज़माना तेजी के साथ बदल रहा है, जिसमें महिलाएं भी अपनी ताकत और हिम्मत के साथ देश की तरक्की में साथ दे रही हैं, वे हर क्षेत्र में नंबर वन की कुर्सी पर विराजमान है, लेकिन फिर भी देश की महिलाएं अपने कानूनी अधिकारों से अंजान है, जो उनको देश के संविधान ने प्रदान किये हैं। देश की अधिकतर महिलाएं शादी के बाद मिलने वाले कानूनी हक और अधिकारों से वंचित होती है, इसकी वजह ये है कि उनको इसके बारें में नॉलेज नहीं है, जिसका फायदा दूसरे लोग उठा लेते हैं, तो इस विमेंस डे पर हर विवाहित महिला को अपने कानूनी अधिकारों के बारें मे जागरूक होना है, और खुद से भी ये प्रॉमिस करना है कि वो अपने अधिकारों के बारें में अंजान नहीं रहेंगी उनको जानेंगी और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल करेंगी। यहां पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की वकील कुलसुम फिरदौस से इस संबंध में हमने बात की और उनसे विवाहित स्त्री के कानूनी हक के बारें में चर्चा की-

Women’s Day 2023: घरेलू हिंसा और उत्पीड़न के खिलाफ अधिकार
देश में विवाहित महिलाओं को लेकर जो सबसे अधिक मामले सामने आते हैं वो है घरेलू हिंसा से संबधित। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा महिलाओं के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 में 4.05 लाख मामलों में से 1.26 लाख डोमेस्टिक वायलेंस के केस थे। लाइफ के किसी भी पहलू में महिला को किसी ना किसी प्रकार से घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ जाता है, इस संबंध में हर शादीशुदा महिला को इस बात का पता होना चाहिए कि महिला संरक्षण अधिनियम, 2005. Protection of Women from Domestic Violence Act 2005 के तहत उनको कानून के द्वारा संरक्षण मिला हुआ है। वे इसकी शिकायत किसी भी पुलिस स्टेशन में कहीं भी कभी भी कर सकती है। चाहे वो पैरेंट्स के द्वारा हो, भाई के द्वारा या पति के द्वारा, ससुराल वालों के द्वारा उत्पीड़न, लिव-इन पार्टनर द्वारा पीड़ित महिला शिकायत दर्ज करवा सकती है।

Women’s Day 2023: सेक्सुअल हैरेसमेंट से प्रोटेक्शन का अधिकार
देश हर हर महिला चाहे वो विवाहित हो या गैर शादीशुदा उसके लिए देश के संविधान ने सेक्शुअल हैरेसमेंट, छेड़छाड़, रेप जैसी घटनाओं से प्रोटेक्शन देने के लिए कानून बनाए हैं। IPC की धारा-375 के तहत रेप के अंतर्गत प्राइवेट पार्ट या फिर ओरल सेक्स रेप माना जाता है। साथ ही कोई शख्स किसी औरत के प्राइवेट पार्ट या फिर अन्य तरीके से पेनिट्रेशन करता है तो भी वो रेप माना जाएगा। रेप में कम से कम 7 साल और उम्रकैद का प्रावधान है। जघन्य मामलों में फांसी का भी प्रावधान है। छेड़छाड़ के मामलों के तहत IPC की धारा-354 को कई सब सेक्शन में रखा गया है।

Women’s Day 2023: दहेज निरोधक कानून
दहेज की बलि ना जानें कितनी महिलाएं चढ़ चुकी है। भारत के कानून ने दहेज लेना और देना दोनों की दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा है। इस अधिनियम के अनुसार, शादी के समस वर या वधू व उनके पारिवार के द्वारा दहेज लेना और देना अपराध है। हर रोज ऐसे मामले आते रहते है कि महिलाओं को दहेज ना मिलने के कारण उसके ससुराल के द्वारा प्रताड़ित किया जाता है, मारा-पीटा जाता है, उसकी हत्या तक कर दी जाती है। दहेज के कारण उत्पीड़न से बचाने के लिए साल 1986 में IPC की धारा 498-A का प्रावधान किया गया है। जिसे दहेज निरोधक कानून नाम दिया गया है।

Women’s Day 2023: फ्री लीगल एड का अधिकार
भारत के संविधान की तरफ से देश की महिलाओं को फ्री लीगल एड का भी अधिकार मिला हुआ है। देश की कोई भी महिला मुफ्त कानूनी एड की मांग कर सकती है। महिलाएं किसी भी तरह के मामले के लिए फ्री लीगल एड की मांग कर सकती हैं। अगर महिला अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति से संबंध रखती है या फिर वो मानव तस्करी से पीड़ित हो, प्राकृतिक आपदा का दंश झेल रही हो, या फिर उसकी उम्र 18 साल से कम है तो उसे फ्री लीगल एड का अधिकार है। वहीं सामान्य श्रेणी में आने वाली महिलाओं के लिए कुछ फीस देनी पड़ती है।

Women’s Day 2023: अबॉर्शन कराने का अधिकार
देश की विवाहित महिलाओं को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेन्सी एक्ट, 1971 के तहत अबॉर्शन कराने की अनुमति प्रदान की गई है। कुछ टर्म के साथ अबॉर्शन अधिकार मिले हैं, जिसमें अगर प्रेग्नेंसी के 0 हफ्ते से 20 हफ्ते के बीच है, तो अबॉर्शन करा सकती हैं। महिला अगर तैयार नहीं है लेकिन प्रेगनेंट हो गई है तो भी अबॉर्शन करा सकती है। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, भ्रूण में किसी तरह की परेशानी है तो भी महिला को एबॉर्शन कराने की हक़दार है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कुछ मामलों में अविवाहित महिलाओं को भी ये अधिकार प्रदान कर दिया है।

Women’s Day 2023: मेटरनिटी लीव का अधिकार
देश में प्रेदनेंट महिलाओं के अधिकार प्रदान किये गये हैं। संविधान के अनुच्छेद-42 के तहत वर्किंग विमेन को मेटरनिटी लीव का अधिकार है। इसके अंतर्गत कोई भी महिला चाहे वो सरकारी, प्राइवेट, फैक्ट्री या किसी संस्था में काम करती है तो उसे इम्प्लॉइज स्टेट इंश्योरेंस ऐक्ट 1948 के मेटरनिटी बेनिफिट प्राप्त होता है। महिला को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव मिलती है। इस लीव में उसे वही सैलरी मिलती है जो उसे मिलता आ रहा है। अगर महिला का अबॉर्शन हो जाता है तो भी उसे इस ऐक्ट का लाभ मिलेगा। मेटरनिटी लीव के दौरान महिला को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। अगर महिला की कंपनी उसे उसके अधिकार से वंचित करती है तो इसमें सजा का प्रावधान है।

Women’s Day 2023: पति के घर पर रहने का अधिकार
शादी के बाद एक महिला को अपने पति के घर पर रहने का अधिकार है। यदि पति की मत्यु भी हो जाए तो भी येअधिकार उससे कोई नहीं छीन सकता है। तलाक के बाद भी महिला ससुराल में रह सकती है। हिंदू अडॉप्शंस ऐंड मैंटिनेंस ऐक्ट, 1956 (हिंदू दत्तक और भरण-पोषण कानून) के तहत महिला को ये अधिकार है।



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