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निर्जला एकादशी के दिन शारीरिक संबंध बना सकते हैं या नहीं, जानें गृहस्थ लोगों के लिए नियम
Nirjala Ekadashi Rules for Couples : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्त्व है। वर्ष भर में 24 एकादशी आती हैं, लेकिन निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ और पुण्यदायी माना गया है। इस दिन बिना जल के व्रत रखकर भगवान विष्णु की उपासना की जाती है। मान्यता है कि यह व्रत करने से वर्षों तक किए गए अन्य एकादशी व्रतों के बराबर फल प्राप्त होता है।
लेकिन एक सवाल जो अक्सर विवाहित या गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के मन में उठता है, क्या निर्जला एकादशी के दिन शारीरिक संबंध बनाना उचित है? इस विषय को धार्मिक दृष्टिकोण से समझना जरूरी है।

2025 में निर्जला एकादशी कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी 6 जून 2025 को मनाई जाएगी, जो ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। वैष्णव परंपरा के अनुसार व्रत 7 जून 2025 को रखा जाएगा।
तिथि और समय
एकादशी तिथि प्रारंभ: 6 जून 2025, सुबह 02:15 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 7 जून 2025, सुबह 04:47 बजे
पारण का समय: 7 जून 2025 को दोपहर 01:43 बजे से शाम 04:30 बजे तक
इस दिन बिना जल के व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यताएं क्या कहती हैं?
धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के अनुसार, एकादशी का व्रत संयम, पवित्रता और ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए किया जाना चाहिए। निर्जला एकादशी पर विशेष रूप से नियमों और संयम का पालन करने की सलाह दी जाती है। इस दिन सिर्फ भोजन और जल का त्याग ही नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक शुद्धता बनाए रखने की भी आवश्यकता होती है।
गरुड़ पुराण और पद्म पुराण में कहा गया है कि एकादशी के दिन व्रती को काम, क्रोध, लोभ, मोह और अन्य विकारों से दूर रहना चाहिए। गृहस्थ जीवन जीने वाले व्यक्ति यदि व्रत रख रहे हैं तो उन्हें भी इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। यानी, इस दिन शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह व्रत की पवित्रता को भंग कर सकता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
अगर वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो व्रत के दौरान शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है, खासकर निर्जला एकादशी जैसे व्रत में जब व्यक्ति जल तक ग्रहण नहीं करता। ऐसे में शारीरिक संबंध बनाने से थकान, कमजोरी और अस्वस्थता की स्थिति बन सकती है।
क्या हर किसी के लिए ये नियम लागू हैं?
यदि कोई व्यक्ति व्रत नहीं रख रहा है और उसकी जीवनशैली धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ी नहीं है, तो उस पर यह नियम अनिवार्य नहीं होता। लेकिन यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा भाव से निर्जला एकादशी का व्रत रख रहा है, तो उसे व्रत के नियमों का पूर्ण पालन करना चाहिए। इसमें शारीरिक संबंध न बनाना भी शामिल है।



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