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नीता अंबानी ने अनंत की शादी में बताया कन्यादान का महत्व, हर लड़की के मां-बाप को पता होनी चाहिए ये बात
Significance of Kanyadaan in Hindu Wedding: अनंत अंबानी और राधिका मर्चेन्ट की शादी पिछले 12 जुलाई 2024 को संपन्न हो चुकी है। लेकिन अभी भी देश में इस ग्रैंड वेडिंग की चर्चा हो रही है। शादी के फंक्शन से कई वीडियो और फोटोज वायरल हो रहे हैं, जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं।
इसी बीच अब हाल ही में अनंत-राधिका की शादी का एक नया वीडियो वायरल हुआ है, जो कि कन्यादान के रस्म का है। इस वीडियो में नीता अंबानी हिंदू धर्म की कन्यादान रस्म का मतलब बताती नजर आ रही हैं।

नीता अंबानी बताई कन्यादान का मतलब
नीता अंबानी वीडियो में कन्यादान के बारे के महत्व के बारे में बताते हुए कहती हैं कि- शादी में सबसे खास रस्म 'कन्यादान' होती है, जिसमें दुल्हन के माता-पिता अपनी बेटी का हाथ दूल्हे को सौंपते हैं। मैं भी किसी की बेटी हूं, एक बेटी की मां हूं और एक बहू की सास हूं। तो मैं ये अच्छी तरह से जानती हूं कि कोई भी मां-बाप अपने बच्चों से दूर नहीं जा सकते।'
इसके आगे नीता राधिका के माता-पिता से वादा करते हुए नजर आते हैं कि आप सिर्फ अपनी बेटी नहीं दे रहे बल्कि अपने परिवार में एक बेटे को शामिल कर रहे हैं। अनंत उतना ही आपका है, जितना कि राधिका हमारी है। मैं और मुकेश ये वादा करते हैं कि राधिका का ख्याल अपनी बेटी ईशा की तरह रखेंगे। अनंत की जीवन संगिनी की तरह हम उसे सहेज कर रखेंगे।'
हिंदू धर्म में कन्यादान का महत्व
हिंदू धर्म ग्रंथों में कन्यादान को महादान कहा गया है क्योंकि इससे बड़ा कोई दान नहीं हो सकता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जब पूरे विधि विधान के साथ कन्या के माता पिता कन्यादान करते हैं तो इससे उनके परिवार को भी सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ऐसा कहा गया है कि जिन माता-पिता को कन्यादान का सौभाग्य प्राप्त होता है, उनके लिए इससे बड़ा पुण्य कुछ नहीं है।
भारत के अलग-अलग राज्यों में इस रस्म को करने के तरीके अलग-अलग होते हैं। कन्यादान के बाद ही पवित्र वस्त्र से वर वधु का गठबंधन किया जाता है। इसके बाद अग्नि के समक्ष सात फेरों लिए जाते हैं और विवाह संपन्न होता है।
कैसे शुरू हुई कन्यादान की रस्म?
पौराणिक कथा की मानें तो दक्ष प्रजापति ने अपनी 27 कन्याओं का विवाह करने के बाद कन्यादान किया था। ब्रह्मांड के 27 नक्षत्रों को प्रजापति की पुत्रियां कहा गया है, जिनका विवाह चंद्रमा से हुआ था। दक्ष ने बेटियों का विवाह करवाकर चंद्रमा को सोंपा था। जिसके बाद से परांपरा चली आ रही है।
भगवान कृष्ण ने बताया कन्यादान का अर्थ
भगवान कृष्ण ने जब अर्जुन और सुभद्रा का गंधर्व विवाह करवाया था, तो कृष्ण के बड़े भाई बलराम ने इसका विरोध किया था। भगवान बलराम ने कहा था कि विवाह में कन्यादान नहीं होता तब तक यह विवाह पूर्ण नहीं माना जाएगा और सुभद्रा का कन्यादान नहीं हुआ है। तब भगवान कृष्ण ने कहा कि पशु की भांति कन्या के दान का समर्थन भला कौन कर सकता है। कन्यादान का सही अर्थ है कन्या का आदान ना की कन्या का दान।
शादी विवाह के दौरान कन्या का आदान करते हुए पिता वर से कहता है मैंने अभी तक अपनी बेटी का पालन पोषण किया और उसकी जिम्मेदारी निभाई, आज से मैं अपनी पुत्री आपको सौंपता हूं। इसके बाद वर कन्या की जिम्मेदारी अच्छे से निभाने का वचन देता है।



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