फिजिकल रिलेशन को लेकर प्रेमानंद महाराज ने युवाओं को दे डाली ये नसीहत, कही बड़ी काम की बात

Premanand Ji Maharaj Pravachan on Physical Relation: वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज जी सुखद सरल एवं मीठे वाणी के प्रवक्ता हैं। महाराज जी के सत्संग सुनने तथा दर्शन करने हेतु देश ही नहीं अपितु विदेश से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु जन पहुंचते हैं। सोशल मीडिया पर प्रेमानंद महाराज जी के लाखों फॉलोअर्स हैं।

जीवन दिनचर्या को लेकर महाराज जी बहुत ही सरल रूप में उपाय बताते हैं। सोशल मीडिया पर इन दिनों महाराज जी के प्रवचन वायरल हो रहे हैं। जिसमें उन्होंने रिलेशनशिप में रहने वाले युवक-युवतियों को एक बहुत ही महत्वपूर्ण सलाह दी है। आईए जानते हैं प्रेमानंद महाराज जी ने रिलेशनशिप को लेकर लोगों को क्या बात कही है।

Premanand Ji Maharaj Pravachan know what he says to youth about physical relation

दोस्ती करना गलत नहीं

प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि किसी भी प्रकार से दोस्ती करना कभी गलत बात नहीं है। लेकिन विवाह से पहले फिजिकल रिलेशनशिप में रहना यह हमारे लिए उचित नहीं है। प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं ऐसा रिलेशनशिप पाप की श्रेणी में आता है। इस दौरान उन्होंने समस्त युवाओं को मर्यादा में रहने की भी बात कही है। खासकर जब तक उन्हें माता-पिता की अनुमति से विवाह संस्कार ना हो जाए तब तक।

ब्रह्मचर्य का पालन करें

जो लोग स्कूल और कॉलेज में बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड के रिश्ते से जुड़े होते हैं, उन्हें प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि आपसी मित्रता करना कोई गलत बात नहीं है। लेकिन युवाओं को ब्रह्मचर्य का ध्यान रखना चाहिए और उसका विधिवत पालन करना चाहिए। महाराज जी कहते हैं कि सदैव अपने जीवन में पवित्रता बनाए रखनी चाहिए।

विवाह से पहले शारीरिक संबंध पाप

महाराज जी का मानना है कि विवाह के पूर्व युवाओं को शारीरिक संबंध का किसी भी प्रकार से अपने मन मस्तिष्क में विचार भी नहीं करना चाहिए। इससे सदैव दूरी बनाकर रखनी चाहिए। यह मानव जीवन में सिर्फ नैतिक पतन नहीं करता बल्कि यह हमारे भविष्य में किसी प्रकार से बड़ी हानि के रूप में भी हो सकता है।

प्रेमानंद महाराज जी ने वीडियो के माध्यम से बड़ी ही जोर देकर कहा कि आप समस्त युवा देश के भविष्य हैं। आपके दिमाग में तब तक इस बात शारीरिक संबंध की बात नहीं आनी चाहिए जब तक आपके माता-पिता द्वारा विवाह संस्कार संपन्न ना हो जाए।

प्रेमानंद महाराज जी ने सत्संग के दौरान यह खास संदेश मुख्य रूप से उन युवाओं के लिए प्रेषित किया है जो अपनी पढ़ाई और करियर के दौरान रिलेशनशिप में लिप्त हो जाते हैं। महाराज जी ने इसे आत्म संयम और ब्रह्मचर्य का सबसे बड़ा सुख बताया है।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

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