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Rakul-Jackky Wedding : क्या है आनंद कराज जिस रस्म से रकुल और जैकी बने हमसफर, जानें इसका अर्थ
Rakul-Jackky Wedding : रकुल प्रीत सिंह और जैकी भगनानी 21 फरवरी 2024 को शादी के बंधन में बंधे गए हैं। रकुल पंजाबी परिवार से ताल्लुक रखती हैं, इसलिए पंजाबी रीति-रिवाज के अनुसार रकुल प्रीत सिंह और जैकी भगनानी की आनंद कारज से शादी की बंधन में बंध चुक हैं। जब से बात सामने आते ही, इसको लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है।
आइए जानते है कि क्या होता है पंजाबी शादी की रीति रिवाज के आनंद कारज की रस्म के बारे में ?

आनंद कारज का अर्थ?
आनंद कारज का अर्थ होता है खुशी का कार्य। आनंद कारज हिंदू धर्म के विवाह से बिल्कुल अलग माना जाता है। सिख धर्म में जो लोग गुरु और अपनी धर्म पर पूरी आस्था रखते हैं, वे आनंद कारज करते हैं, उन्हें खुशी के किसी भी काम के लिए मूहूर्त देखने की जरुरत नहीं होती है। उनके लिए हर दिन पवित्र होता है। इस शादी में लग्न, मुहूर्त, शगुन-अपशगुन, नक्षत्र देखना, कुंडली का मिलान आदि आवश्यक नहीं होता है।
ऐसा होती है आनंद कारज की रस्म?
हालांकि आनंद कारज के कुछ रस्में जैसे फेरे लेना, दुल्हन का मंडप तक लाना जैसे कुछ रस्में हिंदू शादियों की रीति रिवाजों की तरह होती हैं। आनंद कारज में ग्रंथी गुरुग्रंथ साहिब का पाठ करते हैं। इस दौरान सभी परिजनों के सिर ढकें हुए होने जरुरी होते है, जहां महिलाओं के सिर पर दुपट्टा ओढ़ा हुआ होना चाहिए वहीं पुरुषों के सिर पर पगड़ी होती है। ये रस्म फेरों से पहले होती है। इसके के बाद फेरे लेने के बाद गुरु ग्रंथ साहिब के सामने माथा टेकने के बाद ही आनंद कारज यानी सिख रीति रिवाजों से शादी सम्पन्न हो जाती है।

चार फेरे लिए जाते है आनंद कराज में?
इस दौरान दुल्हन के पिता पगड़ी का एक सिरा दूल्हे के कंधे पर रखते हैं और दूसरा सिरा दुल्हन के हाथ में देते हैं। फिर जोड़ा गुरु ग्रंथ साहिब के चार फेरे लेता है, जिसको लवाण, लावा या फेरा बोलते हैं। पहले फेरे या लवाण में नाम जपते हुए सतकर्म की सीख जोड़े को दी जाती है। दूसरे फेरे सच्चे गुरु को पाने का रास्ता दिखाया जाता है ताकि उनके बीच अहम की दीवार न रहे। तीसरे फेरे में संगत के साथ गुरु की बाणी बोलने की सीख देते हैं। चौथे और अंतिम लांवे में मन की शांति और गुरु को पाने के शब्द कहे जाते हैं। इन रस्मों के बीच अरदास चलती रहती है, इसके बाद अरदास खत्म होने पर सबको रागी का प्रसाद बनाकर बांटा जाता है।
आनंद कारज मैरिए एक्ट
जैसा कि ऊपर बताया कि सिख रीति रिवाज से होने वाली शादी, हिंदू शादियों से अलग होते है। सिख विवाह के लिए अधिनियम तो वर्ष 1909 में ही बना था, लेकिन उसमें विवाह के पंजीकरण का कोई प्रावधान नहीं था। अभी तक कई सिखों की शादी, हिंदू शादी एक्ट के तहत ही रजिस्ट्रर्ड होती आ रही थी। इसलिए 1909 से सिखों समुदाय आनंद कारज मैरिज एक्ट की मांग करते आ रहे थे। लेकिन हाल ही में सिर्फ दिल्ली में फरवरी 2018 में आनंद कारज मैरिए एक्ट लागू हो चुका है। जबकि आप मानेंगे नहीं भारत से पहले पाकिस्तान ने सिख शादी को मान्यता देने के लिए 2017 में ही सिख मैरिज एक्ट पारित कर दिया था। अब दिल्ली में जिन सिख परिवारों के लोगों की शादी हिन्दू मैरिज एक्ट के तहत रजिस्टर्ड है वे अब आनंद कारज मैरिज एक्ट के तहत इसके पंजीकृत करवा सकते हैं।



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