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भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती हैं परफेक्ट कपल, हर दंपत्ति को इनसे सीखने चाहिए ये रिलेशनशिप टिप्स
5 Relationship Tips from Lord Shiva and Mata Parvati: भगवान भोलेनाथ गृहस्थी जीवन के देवता माने जाते हैं। भगवान शिव शंकर इकलौते ऐसे ईश्वर हैं जिनके विवाह और बच्चों के बारे में पौराणिक कथाएँ प्रमुख रूप से प्रचलित हैं। सावन महीने में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। इस कारण से सावन के महीने को अत्यंत ही पवित्र माना जाता है और इसे भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना भी माना जाता है।
साल 2024 में सावन 22 जुलाई से प्रारंभ हुआ। मान्यता है कि सावन में व्रत रखने से दांपत्य जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही भोलेनाथ का भरपूर आशीर्वाद प्राप्त होता है।

माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ के दांपत्य जीवन से हर जोड़ा एक सीख ले सकता है। माता पार्वती ने शिव जी को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की, तो वही शिव जी ने देवी सती के आत्मदाह करने पर तांडव किया था जिससे दुनिया में प्रलय आ गई थी। भगवान शिव और माता पार्वती के इस अटूट रिश्ते को प्रत्येक शादीशुदा जोड़ा अपनाकर अपने जीवन में खुशहाली प्राप्त कर सकता है।
भगवान शिव और माता पार्वती से सीखें वैवाहिक रिश्ते के ये पांच गुण
समानता का अधिकार
भगवान भोलेनाथ को अर्धनारीश्वर कहा जाता है। अर्धनारीश्वर का मूल अर्थ यह है कि आधा पुरुष और आधी नारी। भगवान शिव के स्वरूप में आधा स्वरूप उनका और आधा स्वरुप उनकी पत्नी पार्वती का है। इस स्वरूप को शादीशुदा व्यक्ति का एक प्रतीक माना जाता है जिसमें पति-पत्नी का स्वरूप भले ही अलग-अलग हो लेकिन दोनों का मन एक ही होता है।
पति-पत्नी के बीच आपसी विवाद की एक वजह अपने आप को बड़ा दिखाना भी हो सकता है। लेकिन अगर आप सुखद एवं समृद्ध वैवाहिक जीवन व्यतीत करना चाहते हैं तो भगवान शिव और माता पार्वती के गुण को अपनाएं और अपने जीवनसाथी को बराबरी का दर्जा दें।

प्यार
पति-पत्नी के रिश्ते में मधुरता और प्रेम भाव होना बहुत ही आवश्यक है। भगवान शिव और माता पार्वती का साथ उन सभी के लिए एक उदाहरण है जो विवाह के दौरान एक दूसरे के बैंक बैलेंस, पदवी और ख़ूबसूरती को अहमियत प्रदान करते हैं। माता पार्वती ने भस्म धारी, गले में सर्पों की माला पहने हुए शिवजी को पसंद किया। उनके गृह शास्त्र जीवन के लिए दोनों के बीच में खूब प्यार और समर्पण जरूरी था ना कि उनकी खूबसूरती और पैसा।
ईमानदारी
भगवान शिव शंकर को भोलेनाथ भी कहा जाता है क्योंकि वह बहुत ही सीधे और भोले हैं। प्रत्येक लड़की अपने जीवनसाथी में भोले बाबा जैसा सीधा-सादा और भोलापन जैसा गुण जरूर तलाशती है। भगवान शिव शंकर चाहते तो कोई भी रूप रंग या राजकुमार जैसी छवि लेकर माता पार्वती से विवाह कर सकते थे। उनकी इसी छवि के कारण माता सती के समक्ष उनके पिता के दरबार में उन्हें अपमानित होना पड़ा था लेकिन भगवान शिव जी ने अपने रिश्ते के लिए ईमानदार रहना चुना।
एक अच्छा मुखिया
भगवान भोलेनाथ अपने परिवार के लिए एक अच्छे सरल, सहज एवं जवाबदार मुखिया थे। उनके नेतृत्व में घर पर क्लेश या मानसिक तनाव की संभावना बिल्कुल भी नहीं होती थी। उदाहरण के लिए भगवान शिव के गले में साँपों की माला है जो उनके पुत्र गणेश के वाहन चूहे का बहुत बड़ा शत्रु है लेकिन दोनों में किसी भी प्रकार का बेर कभी नहीं देखा गया। ठीक उसी तरह माँ गौरी का वाहन शेर है और भगवान भोलेनाथ का वाहन बैल है। एक दूसरे के समक्ष वह बहुत बड़े शत्रु है लेकिन दोनों आपस में सदैव मिलकर रहते थे विषम परिस्थिति में परिवार को संभाल कर चलने का गुण आप भगवान भोलेनाथ से सीख सकते हैं।
जिम्मेदारी
परिवार की जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वहन करने से समस्त पारिवारिक जीवन भी सुखमय बना रहता है। भगवान भोलेनाथ हमेशा तपस्या में लीन रहते हैं तो माता पार्वती उनकी अनुपस्थिति में परिवार, पुत्रों और सभी देवी देवताओं समेत सृष्टि की भी देखभाल भली भाँति करती थी। प्रत्येक पति-पत्नी को एक दूसरे के साथ मिलकर या एक दूसरे के अनुपस्थितियों में आदर्श एवं सुखी जीवन के लिए जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए।
Image Credit: Pinterest
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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