Latest Updates
-
एक्टर राजेश शर्मा को जहरीले कीड़े ने काटा, हालत नाजुक, जानें मानसून में क्यों बढ़ता है सांप कीड़ों का खतरा -
Yogini Ekadashi 2026: कब रखा जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत? इस दिन भूलकर भी न करें ये 5 काम -
Varalakshmi Vrat 2026: सावन के आखिरी शुक्रवार को करें ये 5 उपाय, मां लक्ष्मी बरसाएंगी धन-दौलत -
पंजाब की पहली महिला ड्राइवर और पायलट थीं शेफ विकास खन्ना की मां बिंदु खन्ना, राजीव गांधी के साथ ली थी ट्रेनिंग -
बारिश के मौसम में भूलकर भी फ्रिज में न रखें ये 5 फल, सेहत को हो सकता है नुकसान -
Sapne Me Aam Dekhna: सपने में आम दिखना शुभ या अशुभ? जानें इसका मतलब -
अब WhatsApp पर ही आसानी से बनवा सकते हैं आयुष्मान कार्ड, जानें स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस -
Birthday Special: पड़ोसन को घर से भगा ले गए थे सौरव गांगुली, फिर दोबारा करनी पड़ी थी शादी -
Varalakshmi Vrat 2026: कब रखा जाएगा वरलक्ष्मी व्रत? नोट करें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
बारिश में बनाएं गर्मागर्म प्याज के पकौड़े और खट्टी-मीठी इमली की चटनी, जानें आसान रेसिपी
सावन में विवाहितों को संबंध बनाने से क्यों करना चाहिए परहेज? जानिए वैज्ञानिक और धार्मिक वजह
Why Married Couples Should Avoid Physical Relations : सावन का महीना हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह केवल धार्मिक आस्था और भक्ति का समय नहीं, बल्कि आत्मसंयम, मानसिक शुद्धि और स्वास्थ्य के संतुलन का भी अवसर होता है। इस पावन माह में भगवान शिव की आराधना, व्रत, उपवास और ब्रह्मचर्य का पालन विशेष रूप से किया जाता है।
खासतौर पर नवविवाहित जोड़ों को इस महीने में शारीरिक संबंध बनाने से मना किया गया है, और इसके पीछे केवल धार्मिक कारण ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण भी जुड़ा है।

आयुर्वेद का मत
आयुर्वेद के अनुसार, सावन का मौसम यानी वर्षा ऋतु शरीर के लिए संवेदनशील समय होता है। इस मौसम में वात और कफ दोष बढ़ जाते हैं, जिससे शरीर की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। इस समय शरीर को विश्राम की जरूरत होती है, न कि अतिरिक्त ऊर्जा खर्च करने वाली गतिविधियों की।
सावन में वातावरण में उमस और नमी अधिक होने के कारण शरीर में रस का संचार बढ़ता है। इससे व्यक्ति के अंदर कामभावना भी स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। लेकिन यदि इस समय नवविवाहित दंपती लगातार शारीरिक संबंध बनाते हैं, तो इससे उनके शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है, जैसे थकावट, नींद न आना, कमजोरी, मानसिक तनाव, और जोड़ों में दर्द आदि।
आयुर्वेद में यह भी बताया गया है कि सावन में गर्भधारण करने से होने वाली संतान शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो सकती है। यही कारण है कि इस मौसम में ब्रह्मचर्य का पालन करने और संयमित जीवन जीने की सलाह दी जाती है।
इसलिए महिलाएं जाती हैं मायके
भारत की पारंपरिक संस्कृति में यह भी देखने को मिलता है कि सावन में नवविवाहित महिलाएं मायके चली जाती हैं। इसके पीछे धार्मिक परंपरा के साथ-साथ आयुर्वेदिक कारण भी छुपे हैं। चूंकि इस मौसम में शारीरिक संबंधों से परहेज करने की सलाह दी जाती है, इसलिए जोड़े एक-दूसरे से कुछ समय के लिए दूरी बना लेते हैं, ताकि संयम और ब्रह्मचर्य का पालन कर सकें।

धार्मिक पहलू
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन भगवान शिव को समर्पित महीना है। भगवान शिव को काम का शत्रु माना जाता है। पुराणों के अनुसार, कामदेव ने सावन में ही भगवान शिव पर कामबाण चलाया था, जिससे क्रोधित होकर शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया। इसलिए इस महीने में भक्तों को व्रत, पूजा और ध्यान में लीन रहकर काम-वासना पर नियंत्रण रखने की सीख दी जाती है।
यह माह आत्मसंयम और साधना का प्रतीक है। शारीरिक संबंधों से दूरी बनाकर व्यक्ति अपनी मानसिक शक्ति, आत्मबल और भक्ति को मजबूत करता है।
मौसम और स्वास्थ्य के कारण
सावन का मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां लेकर आता है। नमी, उमस, अधिक पसीना, त्वचा पर रैशेज, एलर्जी और फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याएं इस समय आम होती हैं। शारीरिक संबंध बनाने से शरीर का तापमान बढ़ता है, हार्मोनल असंतुलन हो सकता है, और शरीर की पहले से कमजोर इम्यूनिटी और बिगड़ सकती है।
विशेष रूप से महिलाओं के लिए यह समय अधिक संवेदनशील होता है क्योंकि उनका हार्मोनल संतुलन इस मौसम में और भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए डॉक्टर और आयुर्वेद विशेषज्ञ दोनों इस मौसम में संभोग से परहेज़ की सलाह देते हैं।



Click it and Unblock the Notifications