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Sharad Purnima Rules For Couples: नवविवाहित कपल्स के लिए क्यों खास होती है शरद पूर्णिमा की रात, कर लें ये काम
Sharad Purnima Rules For Couples: हिंदू पंंचांग के अनुसार, आज शरद पूर्णिमा है इसकी रात को हिंदू धर्म में बेहद शुभ और खास माना गया है। इसे न सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है, बल्कि दांपत्य जीवन के लिए भी यह दिन अत्यंत मंगलकारी होता है। खासकर नवविवाहित जोड़ों के लिए शरद पूर्णिमा की चांदनी रात किसी आशीर्वाद से कम नहीं मानी जाती। मान्यता है कि इस रात की चांदनी में दिव्य अमृत बरसता है, जो शरीर और मन को शुद्ध करने के साथ ही वैवाहिक जीवन में प्रेम, सौभाग्य और मधुरता बढ़ाता है। यही कारण है कि कपल्स इस दिन चांदनी स्नान करते हैं और विशेष पूजा-अर्चना कर दांपत्य सुख की कामना करते हैं। कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा पर किए गए ये नियम और परंपराएं न केवल रिश्तों को मजबूत बनाती हैं बल्कि स्वास्थ्य और समृद्धि भी प्रदान करती हैं।
तो आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा की रात कपल्स को क्या-क्या खास नियम और परंपराएं निभानी चाहिए। उसका धार्मिक महत्व, और शरद पूर्णिमा का क्या महत्व है? इसके साथ ही शरद पूर्णिमा के बारे में सब कुछ जो कुछ लोगों को पता नहीं होगा।
शरद पूर्णिमा कब है?
सबसे पहले ये जान लेते हैं कि शरद पूर्णिमा कब है। हर साल शरद पूर्णिमा हर आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। ऐसे में इस साल यानी 2025 में शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर दिन सोमवार को है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु के साथ चंद्रमा की पूजा की जाती है।

क्या है शरद पूर्णिमा का महत्व?
हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को 'शरद पूर्णिमा' कहते हैं। इसे 'कोजागरी पूर्णिमा' और 'रास पूर्णिमा' भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी चांदनी अमृत बरसाती है। यही वजह है कि शरद पूर्णिमा की रात बेहद खास और दिव्य मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं और जागरण करके उनकी आराधना करने वालों को सुख, समृद्धि और धन-धान्य का आशीर्वाद देती हैं। शरद पूर्णिमा को स्वास्थ्य और आयु वृद्धि के लिए भी शुभ माना गया है। कहा जाता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में औषधीय गुण होते हैं, इसलिए लोग खीर बनाकर चांदनी में रखते हैं और अगली सुबह उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। यह दिन आध्यात्मिक साधना, ध्यान और मंत्र जाप के लिए भी विशेष फलदायी माना जाता है।
नवविवाहितों के लिए मधुमास रात (Sharad Purnima Rituals for Newly Wed Couples)
हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं, जिसे 'मधुमास की रात' या 'हनीमून नाइट' भी कहा जाता है। यह रात खासतौर पर नवविवाहित दंपतियों के लिए बेहद शुभ मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं के साथ धरती पर अमृत बरसाता है और उसकी चांदनी में स्नान करने से प्रेम, सौंदर्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि अगर नवविवाहित जोड़े इस रात चांदनी में स्नान करते हैं, तो उनके बीच का प्रेम और रिश्ता अटूट हो जाता है। उनके बीच हमेशा प्यार बना रहता है और रिश्ता अच्छा चलता है।
शरद पूर्णिमा की रात को रास पूर्णिमा क्यों कहा जाता है?
शास्त्रों में वर्णन है कि शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज की गोपियों संग महारास रचाया था, इसलिए इसे 'रास पूर्णिमा' भी कहा जाता है। नवविवाहित जोड़े इस रात व्रत, उपवास और चांदनी स्नान का विशेष महत्व मानते हैं, क्योंकि माना जाता है कि इससे दांपत्य जीवन में मधुरता और स्थिरता आती है। साथ ही इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। इसलिए शरद पूर्णिमा को प्रेम, आस्था और समृद्धि का पर्व कहा जाता है।
कोजागरा क्या है? (Kojagara Kya Hai?)
शरद पूर्णिमा और 'कोजागरा पूर्णिमा' कहा जाता है। "कोजागरा" का अर्थ है, 'कौ जागर्ति' यानी आज कौन जाग रहा है। मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं और जो व्यक्ति रात्रि जागरण करता है, मां लक्ष्मी उसके घर-आंगन में स्थायी रूप से वास करती हैं। यही कारण है कि शरद पूर्णिमा की रात को लोग चंद्रमा की चांदनी में जागरण, भजन-कीर्तन और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा करते हैं। यह रात मधुमास की रात भी कही जाती है, क्योंकि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पृथ्वी पर अमृत बरसाता है। खासकर नवविवाहितों और दांपत्य जीवन के लिए यह रात बेहद शुभ मानी जाती है। कोजागरा पूर्णिमा को व्रत और चांदनी स्नान करने से न केवल स्वास्थ्य लाभ होता है, बल्कि सुख, सौभाग्य और समृद्धि की भी प्राप्ति होती है।



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