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Ahoi Ashtami 2024: क्या सिर्फ बेटे के लिए किया जाता है अहोई अष्टमी का व्रत?
Ahoi Ashtami 2024: हिन्दू धर्म में परिवार और पारिवारिक मूल्यों को सर्वोच्च महत्ता दी जाती है। जितने भी व्रत त्यौहार हिन्दू धर्म संस्कृति में मनाए जाते हैं उनमें पारिवारिक मूल्य केंद्र में रहते हैं। कार्तिक माह की अष्टमी को मनाया जाने वाला अहोई अष्टमी पर्व ऐसा ही एक पर्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार इस वर्ष यह 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
अहोई अष्टमी के मौके पर माताएं अपने संतानों की बेहतरी के लिए व्रत रखती हैं और अहोई माता की पूजा अर्चना करती हैं। लेकिन कई लोगों में यह धारणा है कि यह व्रत केवल बेटों के लिए ही रखा जाता है। जानते हैं क्या यह धारणा सही है या गलत ?

अहोई अष्टमी का व्रत - क्या सिर्फ बेटों के लिए?
अहोई अष्टमी का व्रत मूलतः संतान की लंबी उम्र की कामना के लिए किया जाता है। इस व्रत में बेटे और बेटियों दोनों का समावेश होता है, लेकिन कुछ पुरानी मान्यताओं के अनुसार, इसे केवल पुत्रों की दीर्घायु के लिए किया जाता है। समाज की पितृसत्तात्मक रूढ़ियों के कारण ऐसा मान लिया गया है कि अहोई का व्रत केवल बेटों के लिए होगा, लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं। अहोई माता की तस्वीरों में उनके साथ उनके पुत्र रहते हैं लेकिन यह व्रत संतान के लिए रखा जाता है। अहोई माता की पूजा व व्रत संतान के जीवन का भला व सुखी करता है, चाहे वह पुत्र हो या पुत्री। अहोई माता, संतान को आरोग्य और लम्बी उम्र देने वाली होती हैं।
संतान प्राप्ति का भी है ये व्रत
जिन महिलाओं की कोई संतान नहीं होती वे भी अहोई अष्टमी का व्रत व पूजन कर सकती हैं। दरअसल अहोई माता के सच्चे मन से पूजन संतान प्राप्ति का आशीर्वाद भी मिलता है। ऐसे में जिन महिलाओं को संतान प्राप्ति की इच्छा होती है, वे भी इस व्रत को रखती हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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