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Karwa Chauth Chand Puja Vidhi: करवाचौथ पर कैसे करें चंद्र पूजना, चांद को अर्घ्य देते समय क्या बोला जाता है?
Karwa Chauth Chand Puja Vidhi: 20 अक्टूबर 2024 को, कई घरों में विवाहित महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु और समृद्धि के लिए भक्ति और प्रेम से भरी परंपरा करवा चौथ का व्रत रखेंगी।
यह पूजनीय व्रत हर साल कार्तिक महीने की कृष्ण चतुर्थी को पड़ता है, जहाँ इस दिन करवा माता, भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। शाम होते ही, व्रत का समापन चाँद के दर्शन के साथ होता है, जो इस अनुष्ठान में एक ऐसा कार्य है जिसका बहुत महत्व है।

करवाचौथ पर कैसे करें चांद की पूजा? (Karwa Chauth Chand Ki Puja)
करवा चौथ उत्सव का मुख्य आकर्षण चंद्रदेव को अर्घ्य देने की रस्म है, जो चंद्र देवता के प्रति सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक है। इस प्रक्रिया में शाम की पूजा करना शामिल है, जिसके दौरान जल से भरा कलश, एक चांदी का सिक्का और अक्षत (अखंडित चावल के दाने) चढ़ाने के लिए तैयार किया जाता है। इस क्रिया के बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अपने पति की एक झलक दिखाई जाती है।
चन्द्रमा को अर्घ्य देते समय क्या बोला जाता है? (Karwa Chauth Par Chand Ko Arghya Dete Samay Kya Bole?)
चंद्रमा को अर्घ्य देने के दौरान, चंद्रमा को समर्पित विशेष मंत्रों का जाप करना आवश्यक है, जिसमें "ओम श्राम श्रीम श्रौम सः चन्द्रमसे नमः" भी शामिल है। ये मंत्र चंद्रमा के दिव्य प्रभाव का सम्मान करते हैं। इसके अतिरिक्त, जल चढ़ाते समय पति का नाम पाँच बार लेने की रस्म, साथ ही सफ़ेद फूल या कपड़ा भेंट करने की रस्म, माना जाता है कि पति द्वारा सामना किए जाने वाले किसी भी मानसिक संकट को कम करती है।
इसके अलावा आप चंद्रमा की स्तुति जाप कर सकती है: क्षीरोदार्णवसम्भूत आत्रेयगोत्रसमुद्भव:। गृहाणार्ध्यं शशांकेदं रोहिण्यसहितो मम ।। इस स्तुति को 5 या फिर 11 बार दोहरा सकते हैं।
करवचौथ पर चंद्रमा को कब अर्घ्य नहीं देना चाहिए?
कुछ विशेष परिस्थितियाँ ऐसी भी होती हैं, जिनमें चंद्रमा को अर्घ्य देना अनुचित माना जाता है। ज्योतिषीय मार्गदर्शन के अनुसार सूतक-पातक, मासिक धर्म या इसी तरह के किसी भी प्रतिबंधात्मक समय के दौरान महिलाओं को इस अनुष्ठान से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इसके बजाय, चंद्रमा को पाँच बार चावल चढ़ाना एक विकल्प के रूप में काम आता है। इसके अलावा, इन समयों के दौरान करवा चौथ व्रत कथा की किताब पढ़ना या चंद्रदेव की पूजा करना वर्जित है, हालाँकि किसी अन्य व्यक्ति से व्रत कथा सुनना स्वीकार्य है।
सरगी से शुरू होता है करवाचौथ पर्व
सरगी की परंपरा दिन के व्रत की एक अनिवार्य प्रस्तावना है। तारों से जगमगाते आसमान के नीचे भोर से पहले खाया जाने वाला यह अनुष्ठान भोजन, सास द्वारा बहू को दी जाने वाली सात विशिष्ट वस्तुओं से मिलकर बना होता है। इन वस्तुओं में फल, सूखे मेवे, बहू द्वारा पसंद की जाने वाली मिठाइयाँ, मीठी और नमकीन मठरी, फेनिया, चाय या दूध और नारियल शामिल हैं, जो एक सफल व्रत के लिए सास के आशीर्वाद का प्रतीक हैं। सरगी में भाग लेने के बाद, महिलाएँ अपना निर्जल व्रत शुरू करती हैं, जो पूरे दिन चाँद के दिखने तक जारी रहता है।
साल 2024 में कब निकलेगा करवाचौथ का चांद?
इस साल करवा चौथ के लिए चांद निकलने का अनुमानित समय रात 7:53 बजे है, जो वह क्षण है जब व्रती महिलाएं शाम की रस्में और चंद्र दर्शन पूरा करने के बाद आखिरकार अपना व्रत तोड़ सकती हैं। करवा चौथ एक गहरी परंपरा है जो न केवल वैवाहिक सुख और दीर्घायु का जश्न मनाती है बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रथाओं की समृद्ध परंपरा को भी समेटे हुए है। सुबह की सरगी से लेकर रात में चंद्रदेव को दिए जाने वाले प्रसाद तक, व्रत का हर चरण अर्थ और श्रद्धा से भरा होता है, जो इस प्यारे त्योहार की स्थायी प्रकृति को उजागर करता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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