Maha Bharani Shradh 2025: महाभरणी श्राद्ध कल, गया में प‍िंडदान ज‍ितना म‍िलता है फल, जानें कब है कुटुप मुहूर्त

Bharani Shradh 2025 : भरणी श्राद्ध पितरों की आत्मा की शांति, तृप्ति और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। यह श्राद्ध अन्य श्राद्धों से इस कारण अलग है कि इसका निर्धारण मृतक की मृत्यु तिथि के बजाय भरणी नक्षत्र के आधार पर होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भरणी श्राद्ध पूर्ण आस्था और विधि के अनुसार किया जाए, तो इससे पितृ दोष से मुक्ति प्राप्त हो सकती है। यह श्राद्ध विशेष रूप से उन लोगों के लिए किया जाता है जिनका निधन भरणी नक्षत्र में हुआ हो।

Bharani Shradh 2025

किस तिथि में पड़ता है भरणी श्राद्ध

पितृ पक्ष के दौरान, भरणी नक्षत्र की स्थिति के आधार पर श्राद्ध किया जाता है। यदि चतुर्थी तिथि के अपराह्न काल में भरणी नक्षत्र आता है, तो इसे भरणी काल कहा जाता है। वहीं, यदि पंचमी तिथि में भरणी नक्षत्र पड़ता है, तो इसे भरणी पंचमी कहते हैं। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि आने वाले वर्षों में भरणी नक्षत्र तृतीया तिथि पर भी आ सकता है, इसलिए भरणी श्राद्ध किसी निश्चित तिथि से नहीं, बल्कि नक्षत्र के प्रभाव से जुड़ा होता है। इस वर्ष, भरणी श्राद्ध 11 सितंबर 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा। पंचमी तिथि और भरणी नक्षत्र के संयोग के कारण इस श्राद्ध का विशेष महत्व है।

भरणी श्राद्ध का महत्व

भरणी नक्षत्र का स्वामी यमराज हैं। मान्यता है कि भरणी नक्षत्र में किया गया श्राद्ध सीधे यमलोक में जाकर पितरों तक पहुँचता है। इस श्राद्ध से पितरों को शांति मिलती है और वे संतुष्ट होकर अपने लोक में पहुंचते हैं। इससे घर में सुख-शांति, आर्थिक और शारीरिक शक्ति में वृद्धि होती है और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। कुछ परंपराओं में इसे महाभरणी श्राद्ध भी कहते हैं और इसे अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।

भरणी श्राद्ध कैसे किया जाता है

भरणी नक्षत्र वाले दिन श्राद्ध की विधि के अनुसार स्नान और शुद्धि के बाद पितरों का आह्वान किया जाता है। उन्हें जल, तिल, दूध और कुशा से तर्पण किया जाता है। इसके पश्चात आटा, तिल और घी से पिंड बनाकर पितरों को अर्पित किया जाता है। श्राद्ध कर्म के पश्चात ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है और दान भी किया जाता है। इस दौरान जातक परिवार के साथ पितरों से हुई किसी भी अनजाने या जाने-अनजाने की गलतियों के लिए क्षमा प्रार्थना करते हैं।

महाभरणी श्राद्ध 2025 की तिथि और समय

इस वर्ष महाभरणी श्राद्ध 11 सितंबर, 2025 को गुरुवार को मनाया जाएगा। कुटुप मुहूर्त सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:19 बजे तक रहेगा, जबकि रौहिं मुहूर्त दोपहर 12:19 बजे से 01:09 बजे तक होगा। इस दिन पंचमी तिथि और भरणी नक्षत्र का विशेष संयोग होने के कारण यह श्राद्ध और भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

श्राद्ध सामग्री और अनुष्ठान

श्राद्ध पूजन के लिए निम्नलिखित सामग्री का उपयोग किया जाता है: रोली, सिंदूर, सुपारी, रक्षा सूत्र, चावल, जनेऊ, कपूर, हल्दी, देसी घी, माचिस, शहद, काले तिल, तुलसी पत्र, पान, जौ, हवन सामग्री, गुड़, मिट्टी का दीया, रुई की बत्ती, अगरबत्ती, दही, गंगाजल, सफेद फूल, उड़द, खीर, मूंग, गन्ना आदि। ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ-साथ दान देना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी पुण्य का कार्य माना जाता है।

श्राद्ध की विधि

ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि पिंडदान और तर्पण किसी योग्य विद्वान ब्राह्मण द्वारा करवाना चाहिए। इससे पितरों को शीघ्र शांति मिलती है। श्राद्ध में भोजन का एक हिस्सा गाय, कुत्ते और कौवे आदि को देना आवश्यक होता है। यदि संभव हो तो इसे गंगा नदी के तट पर करना शुभ होता है, लेकिन घर पर भी विधिपूर्वक किया जा सकता है। ब्राह्मणों को भोजन कराकर और दान देकर तृप्त करना श्राद्ध के प्रमुख अंगों में शामिल है।

भरणी श्राद्ध का यह पवित्र अनुष्ठान पितरों की शांति और परिवार के लिए आशीर्वाद का प्रतीक है। इस दिन किए गए श्राद्ध से घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। इसलिए प्रत्येक परिवार के लिए इसे विधिपूर्वक और आस्था के साथ करना अत्यंत आवश्यक है।

Story first published: Wednesday, September 10, 2025, 13:03 [IST]
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