Mahakumbh 2025: सीधे धूनी की राख नहीं लगाते हैं नागा, शरीर पर लगने वाली भस्म को ऐसे किया जाता है तैयार

Mahakumbh 2025: प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन हो रहा है, जिसमें विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत और श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। इनमें नागा साधु विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

गंगा में शाही स्नान के दौरान उनका भस्म रमाया हुआ शरीर और उनका अनोखा जीवनशैली हर किसी का ध्यान खींचता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नागा साधुओं के शरीर पर लगने वाली भस्म कैसे बनाई जाती है? आइए, इसे आसान शब्दों में समझते हैं।

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मरघट की राख नहीं, खास विधि से बनती है भस्म

अक्सर यह माना जाता है कि नागा साधु अपने शरीर पर श्मशान की राख लगाते हैं। लेकिन यह सच नहीं है। वे अपने शरीर पर जो भस्म लगाते हैं, उसे खास तरीके से तैयार किया जाता है। यह भस्म उनकी धार्मिक परंपराओं का हिस्सा होती है और इसे बनाने में काफी मेहनत लगती है।

भस्म बनाने की प्रक्रिया

1. धूनी की राख का इस्तेमाल: सबसे पहले लकड़ी की धूनी में जलने से निकली राख को इकट्ठा किया जाता है।
2. चंदन और राख का लेप: इस राख को चंदन के लेप में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बनाई जाती हैं।
3. गाय के उपलों की आग: इन गोलियों को गाय के उपलों की आग में पकाया जाता है।
4. छानना और पीसना: ठंडा होने के बाद इन गोलियों को पीसकर बारीक पाउडर बनाया जाता है।
5. दूध और चंदन का मिश्रण: इस पाउडर को गाय के कच्चे दूध और चंदन में मिलाकर दोबारा पकाया जाता है।
6. भस्म तैयार: इस प्रक्रिया के बाद जो भस्म तैयार होती है, वही नागा साधु अपने शरीर पर लगाते हैं।

मां गंगा के प्रति आस्था

नागा साधु भगवान शिव के परम भक्त होते हैं और मां गंगा के प्रति अटूट श्रद्धा रखते हैं। गंगा स्नान के दौरान वे पवित्रता का विशेष ध्यान रखते हैं। वे पहले अपने शिविरों में स्नान करते हैं, ताकि कोई गंदगी गंगा में न जाए। इसके बाद भस्म रमाकर गंगा में पुण्य डुबकी लगाते हैं।

भस्म का धार्मिक महत्व

नागा साधुओं के लिए भस्म केवल राख नहीं, बल्कि भगवान शिव की पवित्रता और तपस्या का प्रतीक है। इसे वे अपने शरीर पर धार्मिक चिह्नों के रूप में लगाते हैं, जो उनके जीवन के आध्यात्मिक मूल्यों को दर्शाते हैं।

नागा साधुओं की भस्म बनाने की प्रक्रिया और उनका जीवन उनके कठोर तप, शिवभक्ति, और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक है। यह भस्म न केवल उनके व्यक्तित्व का हिस्सा है, बल्कि उनके गहरे आध्यात्मिक और धार्मिक विश्वासों को भी दर्शाती है।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Thursday, January 23, 2025, 18:58 [IST]
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