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Mahakumbh 2025 में आकर्षण का केंद्र बने नागा साधु, क्या आप जानते हैं वो करते हैं 17 तरह का श्रृंगार
Naga Sadhu Ka Shringar: महाकुंभ 2025 के दौरान नागा साधुओं की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र होती है। शाही स्नान से पहले नागा साधु 17 प्रकार के विशेष श्रृंगार करते हैं।
इन श्रृंगारों का न केवल धार्मिक, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। नागा साधुओं का श्रृंगार उनकी तपस्या, साधना और जीवनशैली का प्रतीक है।

नागा साधुओं के 17 श्रृंगार और उनका महत्व
1. भभूत (राख):
नागा साधु अपने पूरे शरीर पर भभूत लगाते हैं। यह शरीर की शुद्धता और सांसारिक मोह-माया से दूर रहने का प्रतीक है।
2. चंदन:
हाथ, माथे और गले में चंदन का लेप लगाकर साधु अपनी शांत और पवित्र ऊर्जा का प्रदर्शन करते हैं।
3. रुद्राक्ष माला:
सिर, गले और बाजुओं में रुद्राक्ष पहनना भगवान शिव के प्रति समर्पण और साधना का प्रतीक है।
4. तिलक:
माथे पर त्रिपुंड (तीन रेखाएं) या अन्य तिलक धारण करना आत्मज्ञान और धार्मिक पहचान को दर्शाता है।
5. सूरमा:
आंखों में सूरमा लगाने से आंखें शुद्ध और तेजस्वी रहती हैं। यह साधु की आध्यात्मिक दृष्टि का प्रतीक है।
6. कड़ा:
हाथ, पैर और बाजुओं में पहने जाने वाले कड़े साधु की शक्ति और तपस्या का प्रतीक हैं।
7. चिमटा:
चिमटा नागा साधु का प्रमुख अस्त्र है, जो उनकी साधना और तपस्या का प्रतीक है।
8. डमरू:
कुछ साधु डमरू लेकर चलते हैं, जो भगवान शिव से जुड़ी उनकी गहन साधना को दर्शाता है।
9. कमंडल:
कमंडल पानी या अन्य पवित्र सामग्री को रखने के लिए प्रयोग होता है। यह साधु की सरल जीवनशैली का प्रतीक है।
10. जटा (बाल):
उनकी जटाएं साधु की तपस्या और त्याग का प्रतीक हैं। इन्हें पंचकेश (पांच बार लपेटकर) विशेष रूप से सजाया जाता है।
11. लंगोट:
भगवा लंगोट पहनना साधु की सादगी और पवित्रता का प्रतीक है।
12. अंगूठी:
अंगुलियों में पहनी जाने वाली अंगूठियां धार्मिक महत्व और ऊर्जा को संतुलित रखने का प्रतीक हैं।
13. रोली:
माथे पर रोली का लेप उनकी आध्यात्मिक शक्ति को दर्शाता है।
14. कुंडल:
चांदी या सोने के बड़े-बड़े कुंडल पहनना शास्त्रों में वर्णित साधु की पहचान का हिस्सा है।
15. कमर माला:
कमर में पहनी जाने वाली माला उनकी आध्यात्मिक परंपरा का हिस्सा है।
16. विश्वमंगल की कामना:
नागा साधु अपनी साधना के जरिए विश्व के कल्याण की कामना करते हैं। यह उनकी मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है।
17. वाणी:
नागा साधु की वाणी, उनके उपदेश और भजन भी उनके आध्यात्मिक श्रृंगार का हिस्सा माने जाते हैं।
नागा साधु बनने की प्रक्रिया
नागा साधु बनने के लिए व्यक्ति को 12 वर्षों की कठोर साधना और प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है। इस दौरान वे ध्यान, पूजा, शस्त्र प्रशिक्षण और साधु जीवन के विभिन्न पहलुओं को सीखते हैं। नागा साधु मुख्यतः अखाड़ों के सदस्य होते हैं, और उनके जीवन का उद्देश्य धर्म का प्रचार और मानवता के कल्याण के लिए साधना करना है।
नागा साधुओं की संख्या और विविधता
भारत में नागा साधुओं की संख्या लगभग पांच लाख है। इनमें से कुछ वस्त्रधारी हैं, जबकि कुछ दिगंबर (निर्वस्त्र) साधु होते हैं। महिलाएं भी नागा साधु बन सकती हैं, लेकिन यह प्रक्रिया भी कठोर अनुशासन के तहत पूरी होती है।
नागा साधु का श्रृंगार उनके तप, साधना, और जीवन की सादगी का प्रतीक है, जो उन्हें विशिष्ट और अनोखा बनाता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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