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Pitru Paksha 2025 1st Day: पहला श्राद्ध आज, पूरे दिन पंचक काल, जानें तर्पण का सही तरीका
Pitru Paksha Ka Pehla Din Aaj : हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व माना जाता है। यह काल अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का समय है। शास्त्रों में कहा गया है कि पितृपक्ष के दौरान पितर पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा किए गए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान से संतुष्ट होकर आशीर्वाद देते हैं। 2025 में पितृपक्ष की शुरुआत 8 सितंबर, सोमवार से हो रही है। इस दिन आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पड़ रही है, जिसे पितृपक्ष का पहला दिन माना जाता है।

पितृपक्ष का पहला दिन (प्रतिपदा तिथि)
पंचांग के अनुसार, 8 सितंबर 2025 को कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि होगी, जो रात 9 बजकर 11 मिनट तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि आरंभ हो जाएगी। इस दिन पूर्व भाद्रपद नक्षत्र रात 8 बजकर 2 मिनट तक रहेगा और उसके बाद उत्तर भाद्रपद नक्षत्र प्रभावी होगा। योगों की दृष्टि से इस दिन पहले धृति योग, फिर शूल योग और अंत में गण्ड योग का निर्माण होगा। करण में बालव, कौलव और तैतिल करण का संयोग रहेगा।
पंचक का प्रभाव
पितृपक्ष के पहले दिन पूरे दिन पंचक का प्रभाव भी रहेगा। शास्त्रों के अनुसार पंचक के दौरान गृह निर्माण, विवाह, यात्रा और अन्य मांगलिक कार्यों को टालना उचित माना जाता है। इस दिन दिशाशूल पूर्व दिशा में होगा, इसलिए उस दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
पितृपक्ष पहले दिन का महत्व
पितृपक्ष का पहला दिन विशेष होता है क्योंकि इसी दिन से श्राद्ध कर्म की शुरुआत होती है। इस दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका विधिपूर्वक श्राद्ध नहीं हो पाया हो। परंपरा के अनुसार, सबसे पहले ऋषियों, देवताओं और पितरों का स्मरण करके श्राद्ध कर्म प्रारंभ किया जाता है।
प्रतिपदा तिथि पर किनका होता है श्राद्ध?
श्राद्ध परंपरा के अनुसार, प्रतिपदा तिथि को उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु इसी तिथि को हुई हो। इसके अलावा जिनकी मृत्यु की सटीक तिथि ज्ञात न हो, उनका श्राद्ध भी इस दिन किया जाता है। खास बात यह है कि प्रतिपदा के दिन नाना-नानी या मातृ पक्ष के पितरों का श्राद्ध करने की परंपरा है, चाहे उनकी मृत्यु किसी भी तिथि को क्यों न हुई हो।
श्राद्ध विधि (Pitru Paksha Shraddh Vidhi)
पितृपक्ष के पहले दिन श्राद्ध करते समय घर की शुद्धि की जाती है और गंगाजल का छिड़काव कर वातावरण पवित्र किया जाता है। इसके बाद शुद्ध वस्त्र धारण करके दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके तर्पण किया जाता है। कुशा, जल, तिल और जौ का प्रयोग कर पितरों को अर्पित किया जाता है।
श्राद्ध कर्म में ब्राह्मण भोजन और दान का विशेष महत्व है। माना जाता है कि दक्षिण दिशा में श्रद्धा भाव से किया गया दान और अन्न-वस्त्र अर्पण पितरों को संतुष्ट करता है। दूध से बनी खीर, सफेद फूल, तिल, शहद, गंगाजल और सफेद वस्त्र पितरों को विशेष प्रिय माने जाते हैं। पंचबलि का अर्पण, गोदान और अन्नदान करने से पितर प्रसन्न होकर परिवार को आशीर्वाद देते हैं और सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।
पितृपक्ष 2025 की तिथियां (Pitru Paksha 2025 Tithi & Calendar)
श्राद्ध तिथि दिनांक व वार
प्रतिपदा श्राद्ध : 8 सितंबर 2025, सोमवार
द्वितीया श्राद्ध : 9 सितंबर 2025, मंगलवार
तृतीया श्राद्ध : 10 सितंबर 2025, बुधवार
चतुर्थी श्राद्ध : 10 सितंबर 2025, बुधवार
पंचमी श्राद्ध : 11 सितंबर 2025, गुरुवार
षष्ठी श्राद्ध : 12 सितंबर 2025, शुक्रवार
सप्तमी श्राद्ध : 13 सितंबर 2025, शनिवार
अष्टमी श्राद्ध : 14 सितंबर 2025, रविवार
नवमी श्राद्ध : 15 सितंबर 2025, सोमवार
दशमी श्राद्ध : 16 सितंबर 2025, मंगलवार
एकादशी श्राद्ध 17 सितंबर 2025, बुधवार
द्वादशी श्राद्ध : 18 सितंबर 2025, गुरुवार
त्रयोदशी श्राद्ध: 19 सितंबर 2025, शुक्रवार
चतुर्दशी श्राद्ध : 20 सितंबर 2025, शनिवार
सर्वपितृ अमावस्या : 21 सितंबर 2025, रविवार



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