Panchbali Kya Hai: पितृ पक्ष में कौवे, कुत्ते, गाय आदि को ही क्यों खिलाया जाता है खाना?

Panchbali Kya Hai: पितृ पक्ष के दौरान पंचबली की परंपरा भोजन कराने के सतही कार्य से परे एक गहरे आध्यात्मिक उद्देश्य को पूरा करती है। ऐसा माना जाता है कि जीवों का पोषण करके, व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से अपने पूर्वजों को सीधे पोषण प्रदान कर रहा होता है।

अनुष्ठान का यह अनूठा पहलू जीवित पूर्वजों के बीच एक गहन संबंध को रेखांकित करता है, जो जीवन और मृत्यु के चक्र में विश्वास को मजबूत करता है जहां आशीर्वाद और आशीर्वाद भौतिक सीमाओं को पार कर सकते हैं।

Pitru Paksha Me Panchbali Kya Hai Shradh Me Kauve Kutte Gaay Chinti ko khana kyu khilate hain

पितृपक्ष में ब्राह्मणों के साथ ही गाय, कुत्ते, कौए, देवता और चींटियों को भोजन सामग्री दी जाती है, इस परंपरा को पंचबली कहा जाता है। ऐसा करने से पितृ खुश होते हैं, लेकिन इस परंपरा के पीछे धार्मिक वजह क्या है और ऐसा क्यों किया जाता है, ये बात बहुत कम लोग जानते हैं। आइये जानते हैं पितृ पक्ष की पंचबलि प्रथा के बारे में।

देवादिबलि (पत्ते पर) - देवताओं को भोजन देने के लिए देवादिबलि दी जाती है। इसमें पंचबली का एक भाग अग्नि को दिया जाता है जिससे ये देवताओं तक पहुंचता है। पूर्व में मुंह रखकर गाय के गोबर से बने उपलों को जलाकर उसमें घी के साथ भोजन के 5 निवाले अग्नि में डाले जाते हैं। इस तरह देवादिबलि करते हुए देवताओं को भोजन करवाया जाता है, ऐसा करने से पितर भी तृप्त होते हैं।

गोबलि (पत्ते पर) - पश्चिम दिशा की ओर पत्ते पर गाय के लिए खाना निकालते हैं। इसमें भोजन का एक हिस्सा गाय को दिया जाता है क्योंकि गरुड़ पुराण में गाय को वैतरणी नदी से पार लगाने वाली कहा गया है। गाय में ही सभी देवता निवास करते हैं, गाय को भोजन देने से सभी देवता तृप्त होते हैं इसलिए श्राद्ध का भोजन गाय को भी देना चाहिए।

पिपीलिकादिबलि (पत्ते पर) - इसी प्रकार पंचबली का एक हिस्सा चींटियों के लिए उनके बिल के पास रखा जाता है। इस तरह चीटियां और अन्य कीट भोजन के एक हिस्से को खाकर तृप्त होते हैं। इस तरह गाय, कुत्ते, कौवे, चीटियों और देवताओं के तृप्त होने के बाद ब्राह्मण को भोजन दिया जाता है। इन सबके तृप्त होने के बाद ब्रह्मण द्वारा किए गए भोजन से पितृ तृप्त होते हैं।

श्वानबलि (पत्ते पर) - पंचबली का एक भाग कुत्तों को खिलाया जाता है। कुत्ता यमराज का पशु माना गया है, श्राद्ध का एक अंश इसको देने से यमराज प्रसन्न होते हैं। शिवमहापुराण के अनुसार, कुत्ते को रोटी खिलाते समय बोलना चाहिए कि- यमराज के मार्ग का अनुसरण करने वाले जो श्याम और शबल नाम के दो कुत्ते हैं, मैं उनके लिए यह अन्न का भाग देता हूं। वे इस बलि (भोजन) को ग्रहण करें। इसे कुक्करबलि कहते हैं।

काकबलि (पृथ्वी पर) - पंचबली का एक भाग कौओं के लिये छत पर रखा जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, कौवा यम का प्रतीक होता है, जो दिशाओं का फलित (शुभ-अशुभ संकेत बताने वाला) बताता है। इसलिए श्राद्ध का एक अंश इसे भी दिया जाता है। कौओं को पितरों का स्वरूप भी माना जाता है। श्राद्ध का भोजन कौओं को खिलाने से पितृ प्रसन्न होते हैं और श्राद्ध करने वाले को आशीर्वाद देते हैं।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Thursday, September 26, 2024, 16:55 [IST]
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