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Sawan 2024: पार्थिव शिवलिंग की पूजा से मिलती है सभी कष्टों से मुक्ति, यहां देखें सावन में पूजन की पूरी विधि
Sawan 2024 Parthiv Shivling Ki Puja Kaise Kare: सावन का महीना हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस समय भगवान शिव की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है और भक्तगण उपवास, पूजा और ध्यान में लीन रहते हैं। शिवभक्तों के लिए ये साल के सबसे उत्तम महीनों में से एक होता है।
सावन में पार्थिव शिवलिंग बनाकर शिव पूजन का विशेष पुण्य मिलता है। शिव पुराण में पार्थिव शिवलिंग पूजा का महत्व बताया है। कलयुग में कूष्माण्ड ऋषि के पुत्र मंडप ने पार्थिव पूजन शुरू किया था। पार्थिव शिवलिंग पूजा सभी कष्टों को दूर करके धन-धान्य, सुख-सौभाग्य और आरोग्य की कामना को पूरा करने वाला बताया गया है।

पार्थिव शिवलिंग कैसे तैयार किया जाता है, जानें इसके नियम (Parthiv Shivling Kaise Banaya Jata Hai?)
1. मिट्टी के शिवलिंग को पार्थिव शिवलिंग कहा जाता है। पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए किसी पवित्र नदी या तालाब की शुद्ध मिट्टी लें। मिट्टी में दूध, गंगाजल, गाय का गोबर, मक्खन और भस्म मिलाकर स्वयं के हाथों से ॐ नमः शिवाय का लगातार उच्चारण करते हुए सुंदर शिवलिंग का निर्माण करना चाहिए।
2. पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह रखकर शिवलिंग बनाना चाहिए।
3. पार्थिव शिवलिंग 12 अंगुल से ऊंचा नहीं होना चाहिए। इससे ज्यादा ऊंचा होने पर पूजन का पुण्य नहीं मिलता।
4. पार्थिव शिवलिंग बनाने के बाद उसे परम ब्रह्म मानकर पूजा और ध्यान करें। पार्थिव शिवलिंग समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। सपरिवार पार्थिव शिवलिंग बनाकर शास्त्रवत विधि से पूजन करने से परिवार सुखी रहता है।
5. पार्थिव शिवलिंग पर चढ़ाई हुई चीजें ग्रहण नहीं करनी चाहिए।
6. शिव महापुराण अनुसार पार्थिव शिवलिंग पूजन से धन-धान्य, आरोग्य और पुत्र की प्राप्ति होती है।
7. कलयुग में मोक्ष की प्राप्ति और व्यक्ति की मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पार्थिव शिवलिंग पूजन सबसे उत्तम बताया गया है।
पार्थिव शिवलिंग पूजा विधि (Parthiv Shivling Puja Vidhi)
1. एक पाट पर सफ़ेद कपड़ा बिछाकर, अक्षत फैलाकर उस पर बड़े से बर्तन में शुद्ध मिट्टी से बना शिवलिंग रखना चाहिए, शिवलिंग की जलहरी उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए।
2. इसके बाद धूप और दीप प्रज्वलित करें।
3. अब उस शिवलिंग पर थोड़ा सा जल अर्पित करें।
4. इसके बाद पंचामृत अर्पित करें।
5. अब पुनः थोड़ा सा जल अर्पित करें।
6. इसके बाद सफेद चंदन लगाएं और फूल, बेलपत्र आदि अर्पित करें।
7. इसके बाद पंचमेवा, फल, मिठाई, प्रसाद आदि अर्पित करें।
8. अब शिव चालीसा, श्री रुद्राष्टकम का पाठ, मंत्र जाप आदि करें।
9. इसके बाद शिवजी की आरती उतारें। आरती के बाद प्रसाद वितरण करें।
10. महामृत्युंजयमंत्र - ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ। सावन माह में अधिक से अधिक इस मंत्र का जाप करें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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