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सूर्यास्त के समय सूर्यदेव को जल चढ़ाना सही है या गलत? जानें क्या कहता है शास्त्र
हिंदू धर्म में सूर्य देवता को शक्ति, ऊर्जा और जीवन का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है। सुबह के समय सूर्य को जल अर्पित करना और उनकी आराधना करना बेहद शुभ माना जाता है।
यह परंपरा धार्मिक रूप से तो महत्वपूर्ण है ही, साथ ही इसका वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है। लेकिन सवाल यह है कि डूबते सूर्य को जल अर्पित करना सही है या नहीं? आइए ज्योतिष और धर्मशास्त्र के आधार पर इसे समझते हैं।

क्या सूर्यास्त के समय जल चढ़ाना सही है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्योदय का समय सूर्य को जल अर्पित करने के लिए सबसे शुभ माना गया है। इस समय जल चढ़ाने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और जीवन में समृद्धि आती है। वहीं, सूर्यास्त के समय सूर्य को जल चढ़ाना सामान्यतः शुभ नहीं माना जाता, क्योंकि:
1. ऊर्जा का क्षय: सूर्यास्त के समय सूर्य की ऊर्जा कमजोर हो जाती है। इस समय जल अर्पित करने से सकारात्मक परिणाम नहीं मिलते।
2. नकारात्मक शक्तियां: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय राहु और केतु जैसे ग्रहों का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा जीवन पर हावी हो सकती है।
कब डूबते सूर्य को जल चढ़ाना उचित है?
हालांकि, कुछ विशेष अवसरों पर डूबते सूर्य को जल अर्पित करना शुभ माना गया है, जैसे:
1. छठ पूजा: यह पर्व सूर्य उपासना का प्रमुख उदाहरण है। इसमें श्रद्धालु डूबते सूर्य को जल चढ़ाकर प्रार्थना करते हैं।
2. विशेष अनुष्ठान: अगर आप नियमित रूप से सूर्य देवता की तीन समय (सुबह, दोपहर, शाम) पूजा कर रहे हैं, तो सूर्यास्त के समय भी जल चढ़ा सकते हैं।
डूबते सूर्य को जल चढ़ाने के नुकसान
1. ऊर्जा की कमी: यह समय ऊर्जा का ह्रास माना जाता है, इसलिए जल चढ़ाने से लाभ की बजाय हानि हो सकती है।
2. राहु-केतु का प्रभाव: ज्योतिष के अनुसार, सूर्यास्त के समय राहु-केतु जैसे अशुभ ग्रह सक्रिय होते हैं। इस दौरान पूजा से नकारात्मक प्रभाव हो सकता है।
3. धन की कमी: डूबते सूर्य को जल चढ़ाने से आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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