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Shardiya Navratri 2024 Day 1: जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, माता शैलपुत्री की पूजा विधि, कथा, मंत्र और आरती
Shardiya Navratri 2024 Day 1 Puja Vidhi: शारदीय नवरात्रि का हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्व है। यह नौ दिनों तक चलने वाला त्योहार माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और आराधना के लिए समर्पित होता है। शारदीय नवरात्रि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है और इसे शक्ति उपासना का पर्व माना जाता है।
इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखते हैं, माँ दुर्गा की पूजा करते हैं, और दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। इस दौरान माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, जो ऊर्जा, शक्ति, और साहस का प्रतीक हैं। नवरात्रि न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और आंतरिक शांति प्राप्त करने का भी अवसर है।

यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसी के साथ दसवें दिन विजयादशमी (दशहरा) मनाया जाता है, जो रावण पर भगवान राम की विजय का उत्सव है। शारदीय नवरात्रि शक्ति, भक्ति और विजय का प्रतीक है। जानते हैं नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त, विधि, भोग, कथा, आरती एवं मंत्र के बारे में-
शारदीय नवरात्रि 2024 के पहले दिन घटस्थापना और पूजा का शुभ मुहूर्त (Shardiya Navratri 2024: Kalash Sthapana Ka Muhurat)
आश्विन घटस्थापना बृहस्पतिवार, अक्टूबर 3, 2024 को
घटस्थापना मुहूर्त - 06:15 ए एम से 07:22 ए एम
अवधि - 01 घण्टा 06 मिनट्स
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त - 11:46 ए एम से 12:33 पी एम
अवधि - 00 घण्टे 47 मिनट्स
घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि पर है।
घटस्थापना मुहूर्त, द्वि-स्वभाव कन्या लग्न के दौरान है।
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ - अक्टूबर 03, 2024 को 12:18 ए एम बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त - अक्टूबर 04, 2024 को 02:58 ए एम बजे
नवरात्रि प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा विधि (Mata Shailputri Puja Vidhi)
नवरात्रि के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि वह माँ दुर्गा का पहला रूप हैं। शैलपुत्री, पर्वतराज हिमालय की पुत्री मानी जाती हैं और उनका स्वरूप शक्ति, पवित्रता और साहस का प्रतीक है। प्रथम दिन की पूजा विधि इस प्रकार है:
1. कलश स्थापना:
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को पवित्र करके वहां पर कलश स्थापित करें। कलश में जल भरकर उसमें सुपारी, सिक्के और आम के पत्ते डालें और कलश के ऊपर नारियल रखें। यह कलश माँ दुर्गा का आह्वान करता है।
2. माँ शैलपुत्री का आह्वान:
माँ शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर को पूजा स्थान पर स्थापित करें। फिर शुद्ध जल से उनका अभिषेक करें। माँ को सफेद वस्त्र और सफेद फूल अर्पित करें, क्योंकि सफेद रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक है, जो माँ शैलपुत्री को प्रिय है।
3. मंत्र जाप और पाठ:
माँ शैलपुत्री के मंत्र का जाप करें:
_"ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः"_
इसके साथ दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं। इससे माँ की कृपा प्राप्त होती है।
4. प्रसाद अर्पण:
माँ शैलपुत्री को गाय का घी अर्पित करें और इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। यह माना जाता है कि इससे शारीरिक और मानसिक बल मिलता है। पूजा के अंत में माँ की आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों के साथ प्रसाद का वितरण करें।
मां शैलपुत्री का भोग
प्रथम दिन मां शैलपुत्री को सफ़ेद रंग का भोग लगाया जाता है जो घी व गाय के दूध से बना हुआ हो। इस दिन मुख्यतः कलाकंद की मिठाई भोग में लगाई जाती है।
मां शैलपुत्री की कथा
माता शैलपुत्री की कथा भी इस दिन पढ़ने का विधान है। इस पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार प्रजापति दक्ष (सती के पिता) ने यज्ञ के दौरान सभी देवताओं को आमंत्रित किया। मगर उन्होंने अपनी पुत्री सती के पति भगवान शिव को निमंत्रण नहीं भेजा। लेकिन सती बिना निमंत्रण भी यज्ञ में जाने को तैयार थी। ऐसे में भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि बिना निमंत्रण यज्ञ में जाना ठीक नहीं। लेकिन सती जिद करने लगी, वो नहीं मानी तो भगवान शिव ने उन्हें जाने की इजाजत दे दी।
सती पिता के यहां बिना निमंत्रण पहुंच गई और उनके साथ बिन बुलाए मेहमान वाला व्यवहार किया गया। उनकी माता के अलावा सती से किसी ने भी सही से बात नहीं की। बहनें भी यज्ञ में उपहास उड़ाती रहीं। इस तरह का कठोर, उपेक्षापूर्ण व्यवहार और अपने पति का अपमान वो बर्दाश नहीं कर सकीं और क्रोधित हो गईं। और इसी क्षोभ, ग्लानि और क्रोध में आकर उन्होंने खुद को यज्ञ में भस्म कर दिया। जैसे ही ये समाचार भगवान शिव को मिला उन्होंने अपने गणों को दक्ष के यहां भेजा और उनके यहां चल रहे यज्ञ का विध्वंस करा दिया। अगले जन्म में सती ने हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया इसलिए उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री मां की पूजा की जाती है।
मां शैलपुत्री मंत्र
ओम देवी शैलपुत्र्यै नमः
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
मां शैलपुत्री स्त्रोत पाठ
प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्।
धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्॥
त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्।
सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥
चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन।
मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
मां शैलपुत्री की आरती
शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी।।
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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