सर्वाइकल कैंसर का डर? एक टीका बदल देगा आपकी जिंदगी!

By Staff

आजकल महिलाओं के बीच सर्वाइकल कैंसर को लेकर काफी चिंता देखी जा रही है, खासकर तब जब किसी करीबी को यह बीमारी अपनी चपेट में ले लेती है। अक्सर लोग सर्वाइकल कैंसर को गर्दन के दर्द (सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस) से जोड़कर भ्रमित हो जाते हैं, लेकिन असल में यह बच्चेदानी के मुंह का कैंसर है। इस गंभीर बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी हथियार 'एचपीवी वैक्सीन' है, जो ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के खिलाफ शरीर में सुरक्षा कवच तैयार करती है।

ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अंशुमन कुमार बताते हैं कि लगभग 90 से 95 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर के मामलों के पीछे एचपीवी वायरस ही जिम्मेदार होता है। यह वायरस निजी वस्तुओं जैसे तौलिया साझा करने या असुरक्षित शारीरिक संबंधों के माध्यम से फैल सकता है। राहत की बात यह है कि 66 प्रतिशत महिलाओं का इम्यून सिस्टम इस वायरस को खुद ही खत्म कर देता है, लेकिन बाकी महिलाओं में यह 10 साल बाद कैंसर का रूप ले सकता है।

वैक्सीन लगवाने की सही उम्र को लेकर डॉक्टर सलाह देते हैं कि 9 से 12 साल की बच्चियों को यह टीका जरूर लगवा लेना चाहिए। भारत के संदर्भ में, इसे शादी या पहले शारीरिक संबंध से पहले लगवाना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। हालांकि, शादीशुदा महिलाओं के लिए यह उतनी प्रभावी नहीं होती, क्योंकि तब तक वायरस के संपर्क में आने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में निजी स्वच्छता और इम्यून सिस्टम पर ध्यान देना जरूरी है।

एचपीवी वैक्सीन की खुराक की बात करें तो इसे '0-1-6' के अंतराल पर लगाया जाता है, यानी पहली डोज के एक महीने बाद दूसरी और छह महीने बाद तीसरी डोज। यह वैक्सीन न केवल सर्वाइकल कैंसर, बल्कि एनोजेनिटल और पुरुषों में पेनाइल कैंसर से भी सुरक्षा प्रदान करती है। हालांकि यह 100% सुरक्षा नहीं देती, लेकिन बेहतर स्वच्छता के साथ इसका बचाव स्तर 90% तक पहुंच सकता है।

किसी भी दवा की तरह इस वैक्सीन के भी कुछ मामूली साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर जलन या एलर्जी। इसलिए इसे हमेशा डॉक्टरी देखरेख में ही लगवाना चाहिए। वैक्सीन के असर को बढ़ाने के लिए डॉक्टर अच्छी डाइट, हरी सब्जियां, एंटीऑक्सीडेंट्स और पर्याप्त नींद की सलाह देते हैं। वहीं, धूम्रपान और शराब का सेवन वैक्सीन की प्रभावशीलता को कम कर सकता है, इसलिए इनसे बचना चाहिए।

सर्वाइकल कैंसर के लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। शारीरिक संबंध के दौरान ब्लीडिंग होना, पीरियड्स के बीच में अचानक स्पॉटिंग या लगातार सफेद पानी (वाइट डिस्चार्ज) आना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि कमर या कूल्हों में दर्द जैसे लक्षणों का इंतजार न करें, क्योंकि ये बीमारी के बढ़ने का संकेत हैं। शुरुआती स्टेज में लेजर सर्जरी या रेडिएशन से इसका सफल इलाज संभव है।

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