Latest Updates
-
Paryushana Mahaparva 2026: आज से शुरू हुआ हुआ पर्युषण महापर्व, जानें आठ दिनों का महत्व और नियम -
पेरिस में बना फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर, 1970 के संकल्प से 2026 तक ऐसे पूरा हुआ सफर -
International Literacy Day 2026: क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस? जानें इतिहास, महत्व और थीम -
International Literacy Day 2026: साक्षरता दिवस पर ये संदेश भेज सबको करें जागरूक, बताएं पढ़ने-लिखने का महत्व -
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य -
Aja Ekadashi 2026: नारायण की कृपा...इन संदेशों के साथ अपने प्रियजनों को भेजें अजा एकादशी की शुभकामनाएं -
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व -
Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: इन संस्कृत श्लोकोंं के जरिए गुरुजनों को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं
Preet Chandi: प्रीत चंडी ने रचा इतिहास, अंटार्कटिका में सबसे लंबे सोलो पोलर अभियान को किया पूरा

भारतीय मूल की सिख ब्रिटिश सेना अधिकारी कैप्टन प्रीत चंडी ने सबसे लंबे समय तक एकल और असमर्थित ध्रुवीय अभियान का विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पोलर प्रीत के नाम से मशहूर प्रीत चंडी ने पहली बार 2021 में दक्षिणी ध्रुव पर ट्रेकिंग कर इतिहास रचा था। 33 साल की प्रीत चंडी ने अब तक अंटार्कटिका में -50C जैसे ठंडे तापमान में 868 मील की यात्रा तय की है। इससे पहले महिला रिकॉर्ड 858 मील का था, जिसे अंजा ब्लाचा ने 2020 में रचा था।
कैप्टन चंडी ने 70 दिनों 16 घंटों में 1,485 किलोमीटर की दूरी तय की और अंटार्कटिका में सबसे लंबे, अकेले और बिना किसी मदद वाले इस अभियान का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। कैप्टन चंडी ने थकावट और शून्य से 30 डिग्री सेल्सियस कम तापमान का सामना करते हुए रोजाना 13 से 15 घंटे के बीच स्कीइंग की। इस दौरान उनके सामने कई मुश्किलें आईं, जिसका सामना उन्होने बिना डरे किया।
उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी रिकॉर्ड-तोड़ उपलब्धि साझा करते हुए लिखा, 'पोलर प्रीत ने इतिहास में किसी भी महिला द्वारा सबसे लंबे, एकल, असमर्थित और बिना सहायता के ध्रुवीय अभियान का विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है!'
अपनी वेबसाइट पर चंडी ने एक पोस्ट शेयर कर लिखा, "मैं निराश हूं कि मेरे पास अंटार्कटिका को पार करने के लिए समय खत्म हो गया, जो लगभग 100 मील की दूरी पर होता। लेकिन मुझे यह भी लगता है कि मैंने वह सब कुछ किया जो मैं कर सकती थी। मैंने 70 दिनों में एक भी छुट्टी लिए बिना, हर दिन, हर घंटे, हर मिनट आगे बढ़ती रही।
'मुझे खुद पर भी बहुत गर्व है, मैं तब भी चलती रही जब मुश्किल थी, जब मुझे लगा कि मैं अब और नहीं चल सकती। मैं अपनी सीमाओं का विस्तार करना जारी रखना चाहती थी और मुझे उम्मीद है कि मैं दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित कर पाउंगी।'
"मैं दिखाना चाहती थी कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहां से हैं, आप कैसे दिखते हैं या आप किस लाइन से शुरुआत करते हैं, आप अगर दिल से चाहे, तो वास्तव में कुछ भी हासिल कर सकते हैं।"
"बहुत सारे लोगों ने मुझसे कहा कि मैं चीजों को हासिल नहीं कर पाऊंगी, लोग चाहते थे कि उनके बनाए गए एक बॉक्स में मैं आसानी से फिट हो जाऊं, मुझे यकीन है कि लोग अब इसे स्वीकार नहीं करेंगे, लेकिन मुझे बहुत खुशी है कि मैंने उनकी बात नहीं मानी।"
"अगर डर्बी की एक पंजाबी महिला ऐसा कर सकती है तो कोई भी कुछ भी हासिल कर सकता है।"
डर्बी यूनिवर्सिटी द्वारा उनके इस कारनामें के लिए उन्हें बधाई भी दी गई है। जिसने उन्हें पिछले साल मानद उपाधि से भी सम्मानित किया था। डर्बी यूनिवर्सिटी ने ट्वीट कर लिखा, " डर्बी के पूर्व एल्युमिनी और सम्मानित प्रीत चंडी को बधाई, जिसने इतिहास में किसी भी महिला द्वारा सबसे लंबे समय तक एकल, असमर्थित और बिना सहायता के ध्रुवीय अभियान का रिकॉर्ड तोड़ा है।"



Click it and Unblock the Notifications
