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Maha Shivratri व्रत में वर्जित हैं ये 7 काम, डॉ. वाई राखी से जानें पूजा को सफल बनाने के गुप्त नियम
What Not To Offer To Lord Shiva On Maha Shivratri 2026: 17 फरवरी 2026, यानी आज महाशिवरात्रि का पावन व्रत है। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का दिन शिव और शक्ति के मिलन का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन के सभी संकटों को दूर कर देती है। भक्तगण इस दिन व्रत रखते हैं और भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए खास नियमों का पालन कर उन्हें उनकी पसंदीदा चीजें चढ़ाते हैं। हालांकि, भगवान भोलेनाथ जितने भोले हैं, उनकी पूजा के नियम उतने ही विशिष्ट हैं। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डा. वाई राखी का कहना है कि अनजाने में की गई छोटी सी चूक भी आपकी साधना को अधूरा छोड़ सकती है।
शिव पुराण में कुछ ऐसी चीजों और कार्यों का वर्णन है जो शिव पूजा में पूरी तरह वर्जित हैं। यदि आप भी इस महाशिवरात्रि महादेव को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो इन 7 बड़ी गलतियों से बचना आपके लिए अनिवार्य है। आइए जान लेते हैं कि डा. वाई राखी के अनुसार, शिव पूजा में वर्जित सामग्री और नियम क्या हैं...

1. सिंदूर और हल्दी अर्पित न करें (Avoid Vermilion and Turmeric)
शास्त्रों के अनुसार, हल्दी और सिंदूर को सौंदर्य और सौभाग्य की वस्तु माना जाता है और महादेव वैराग्य के प्रतीक हैं। शिवलिंग पर हल्दी या सिंदूर चढ़ाना अशुभ माना जाता है। भोलेनाथ का अभिषेक हमेशा चंदन या भस्म से करना ही फलदायी होता है।
2. तुलसी पत्र न चढ़ाएं (Do Not Offer Tulsi Leaves)
भगवान विष्णु की प्रिय तुलसी को शिव पूजा में शामिल नहीं किया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, शिवजी ने तुलसी के पति शंखचूड़ का वध किया था, जिसके बाद से ही शिव पूजा में तुलसी वर्जित मानी जाती है। महादेव को केवल बेलपत्र ही अर्पित करें।
3. नारियल का पानी न चढ़ाएं (Never Offer Coconut Water)
शिवलिंग पर जल या दूध चढ़ाना शुभ है, लेकिन नारियल का पानी कभी नहीं चढ़ाना चाहिए। नारियल को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है और इसे 'श्रीफल' कहते हैं, जिसे समर्पित तो किया जा सकता है लेकिन शिवलिंग का अभिषेक इससे नहीं किया जाता।
4. पूजा में शंख का प्रयोग वर्जित (Do Not Blow Shankh)
शिवजी ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था, इसलिए शिव पूजा में न तो शंख से जल चढ़ाया जाता है और न ही शंख बजाया जाता है। भगवान भोलेनाथ की पूजा में डमरू बजाना सबसे उत्तम माना गया है।
5. टूटे हुए चावल (अक्षत) न चढ़ाएं (Avoid Broken Rice)
अक्षत का अर्थ होता है 'अ-क्षत' यानी जो टूटा न हो। भगवान शिव को पूर्णता पसंद है, इसलिए पूजा में कभी भी टूटे हुए चावल के दानों का प्रयोग न करें। अक्षत हमेशा साबुत और साफ होने चाहिए।
6. शिवलिंग की पूरी परिक्रमा न करें (Never Complete the Full Circumference)
शिवलिंग की पूजा करते समय ध्यान रखें कि कभी भी उनकी 'पूर्ण परिक्रमा' नहीं की जाती। हमेशा जलहरी मतलब जहां से जल बहता है वहां तक जाकर वापस लौट आना चाहिए। जलहरी को लांघना शिव का अपमान माना जाता है, इसलिए केवल आधी परिक्रमा (चंद्रकार परिक्रमा) ही करें।
7. केतकी और चंपा के फूल न चढ़ाएं (Avoid Ketaki and Champa Flowers)
डा. वाई राखी बताती हैं कि ब्रह्मा जी के झूठ में साथ देने के कारण भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से त्याग दिया था। इसी तरह चंपा के फूल भी शिव पूजा में वर्जित हैं। महादेव को धतूरा, आक और कनेर के फूल चढ़ाना अत्यंत शुभ होता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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