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नाग पंचमी के दिन करें इन मंत्रों का जाप, नाग देव के साथ मिलेगा महादेव का आशीर्वाद
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। हिंदू धर्म में नागों को पूजनीय माना गया है। भगवान शिव के गले में विराजमान होने के कारण नाग पूजन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। नाग पंचमी के दिन पूरे विधि विधान से पूजा करने की परंपरा है। इस दिन मंत्रों का जाप करना भी लाभकारी बताया गया है। इस लेख के माध्यम से जानते हैं नाग पंचमी के कुछ विशेष मंत्रों के बारे में जिससे आपके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। भविष्य पुराण की मानें तो नागपंचमी के दिन इन मंत्रों का उच्चारण कर पूजन करना फलदायी होता है।

पहला मंत्र:
ॐ भुजंगेशाय विद्महे,
सर्पराजाय धीमहि,
तन्नो नाग: प्रचोदयात्।।

दूसरा मंत्र:
'सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था ये न्तरे दिवि संस्थिता:।।
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:।
ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:।।
अर्थ- संपूर्ण आकाश, पृथ्वी, स्वर्ग, सरोवर-तालाबों, नल-कूप, सूर्य किरणें आदि जहां-जहां भी नाग देवता विराजमान हैं। वे सभी हमारे दुखों को दूर करके हमें सुख-शांतिपूर्वक जीवन दें। उन सभी को हमारी ओर से बारंबार प्रणाम हो।

तीसरा मंत्र:
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शंखपालं धार्तराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रात: काले विशेषत:।
तस्मै विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥
इस मंत्र के जाप से व्यक्ति विष भय से मुक्त हो जाता है। समाज में मान-सम्मान में वृद्धि होती है।



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