Rudrashtakam: महादेव की अति शीघ्र कृपा पाने के लिए करें रुद्राष्टकम् का पाठ

हिंदू धर्म में देवों के देव महादेव का स्थान सर्वोच्च है। भोले बाबा पर लोगों की अटूट आस्था है। ऐसी मान्यता है कि अन्य देवी-देवताओं की तुलना में भगवान शिव को प्रसन्न करना ज्यादा सरल है। भोलेनाथ का आशीर्वाद पाने के लिए भक्त सच्चे मन से उनकी आराधना करते हैं। शिवजी का स्मरण करने के कई तरीके हैं और उनमें से एक है रुद्राष्टकम् पाठ।

Shiv Rudrashtakam Stotram Lyrics and Benefits in Hindi

श्रीरामचरितमानस में इस बात का वर्णन मिलता है कि प्रभु श्री राम ने रावण से युद्ध करने से पहले लयबद्ध रूप से रुद्राष्टकम् पाठ करके भगवान शिव की स्तुति की। महादेव को प्रसन्न करने का ये उत्तम उपाय है। रुद्राष्टकम् पाठ से जीवन में चल रही हर तरह की समस्या का समाधान मिलता है। शत्रु पक्ष पर विजय प्राप्त करने के इच्छुक जातकों को इसका पाठ करने से जरुर लाभ मिलेगा। रुद्राष्टकम् पाठ से जातक को असीम ऊर्जा और सकारात्मकता का अनुभव होता है। आप भी भगवान शिव को प्रसन्न कर उनकी कृपा पाना चाहते हैं तो रुद्राष्टकम् का पाठ जरुर करें।

Shiv Rudrashtakam Stotram Lyrics and Benefits in Hindi

भगवान शिव का रुद्राष्टकम्

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं । विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ॥

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं । चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥1॥

निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं । गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।

करालं महाकालकालं कृपालं । गुणागारसंसारपारं नतोऽहम् ॥2॥

तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं । मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् ॥

स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा । लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥3॥

Shiv Rudrashtakam Stotram Lyrics and Benefits in Hindi

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं । प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ॥

मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं । प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ॥4॥

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं । अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं ॥

त्रय: शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं । भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥5॥

कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी । सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ॥

चिदानन्दसंदोह मोहापहारी । प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥6॥

न यावद् उमानाथपादारविन्दं । भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।

न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं । प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं ॥7॥

न जानामि योगं जपं नैव पूजां । नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् ॥

जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं । प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो ॥8॥

रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये ॥।

ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ॥9॥

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।

Desktop Bottom Promotion