Latest Updates
-
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी -
Blue Moon 2026: 31 मई को आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'; जानिए इसकी खासियत, कहां और कैसे देखें -
Hindi Journalism Day: 30 मई को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और महत्व -
Kumaoni Sweet Bal Mithai Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड की पारंपरिक और स्वादिष्ट मिठाई -
महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है हलीम के बीज, अनियमित पीरियड्स समेत इन 5 समस्याओं को कर सकते हैं दूर -
गर्मियों में पसीने से होने वाली 5 कॉमन स्किन प्रॉब्लम्स, एक्सपर्ट से जानें इन समस्याओं से बचने के घरेलू उपाय -
World Digestive Health Day: क्यों मनाया जाता है विश्व पाचन स्वास्थ्य दिवस? जानें इस दिन का महत्व और इतिहास -
Grandma Style Aloo Baingan Recipe: दादी के हाथों जैसा चटपटा और लाजवाब स्वाद -
क्या ज्यादा तनाव लेने से ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है? AIIMS न्यूरोसर्जन ने बताई सच्चाई -
June 2026 Vrat Tyohar: निर्जला एकादशी से लेकर वट पूर्णिमा तक, जून के महीने में आएंगे ये प्रमुख व्रत-त्योहार
Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण में भोजन क्यों नहीं करना चाहिए? जानें विज्ञान और शास्त्रों का सच
Surya Grahan Myths vs Facts: 17 फरवरी 2026, दिन मंगलवार को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना जितनी वैज्ञानिकों के लिए रोमांचक है, उतनी ही आम लोगों के लिए जिज्ञासा और परंपराओं से भरी है। जैसे ही चंद्रमा की छाया सूर्य को ढकती है, भारतीय घरों की रसोई के दरवाजे बंद हो जाते हैं और खाने-पीने की चीजों पर 'तुलसी के पत्तों' का पहरा लग जाता है।
अक्सर लोग इसे बिना सोचे-समझे फॉलो करते हैं, लेकिन क्या वाकई ब्रह्मांड से ऐसी विषैली किरणें निकलती हैं जो हमारे भोजन को दूषित कर देती हैं? आइए, इस विशेष लेख में जानते हैं सूर्य ग्रहण से जुड़े असल मिथक (Myths) और उनके वैज्ञानिक तथ्य (Facts)।

आखिर शास्त्रों में क्यों वर्जित है भोजन?
शास्त्रों और आयुर्वेद के अनुसार, सूर्य को ऊर्जा और जीवन का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है। ग्रहण के समय सूर्य की शक्ति कम होने से पृथ्वी पर 'सकारात्मक ऊर्जा' का स्तर गिर जाता है, जिसके दो मुख्य कारण बताए गए हैं जो नीचे लिखे हैं-
मंद पाचन (Slow Digestion):
आयुर्वेद का मानना है कि सूर्य की अनुपस्थिति में हमारी 'जठराग्नि' (पाचन अग्नि) कमजोर हो जाती है। ऐसे समय में भारी भोजन करने से वह ठीक से पच नहीं पाता, जो लंबी अवधि में बीमारियों का कारण बन सकता है।
सूक्ष्मजीवों का प्रभाव: प्राचीन मान्यता है कि सूर्य की UV किरणें प्राकृतिक कीटाणुनाशक का काम करती हैं। ग्रहण के समय अंधकार होने से वातावरण में हानिकारक बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं, जो खुले रखे भोजन को प्रभावित कर सकते हैं।
'तुलसी' और 'कुशा' का ग्रहण में क्या है महत्व
ग्रहण शुरू होने से पहले दूध, दही और पानी में तुलसी के पत्ते या कुशा घास डालने की परंपरा के पीछे भी ठोस तर्क दिए जाते हैं:
तुलसी का प्रभाव:
तुलसी एक प्राकृतिक 'बायो-इंडिकेटर' और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर पौधा है। इसमें मौजूद पारे (Mercury) की अल्प मात्रा विशिष्ट आवृत्तियों (Frequencies) को अवशोषित करने में मदद करती है, जिससे तरल पदार्थ लंबे समय तक शुद्ध रहते हैं।
कुशा घास:
इसे शास्त्रों में प्राकृतिक 'रेडिएशन शील्ड' माना गया है। प्राचीन शोधों के अनुसार, कुशा में वातावरण की अशुद्धियों को सोखने की अद्भुत क्षमता होती है।
सूर्य ग्रहण के बड़े मिथक और उनका वैज्ञानिक सच
1. क्या ग्रहण के दौरान भोजन 'जहरीला' हो जाता है?
मिथक: बहुत से लोग मानते हैं कि सूर्य ग्रहण के दौरान निकलने वाली किरणें पके हुए भोजन को 'पॉइजनस' या जहरीला बना देती हैं, जिससे उसे खाना खतरनाक हो सकता है।
वैज्ञानिक तथ्य: नासा (NASA) और दुनिया भर के वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्रहण एक शुद्ध खगोलीय घटना है। चंद्रमा द्वारा सूर्य की रोशनी रोकने से भोजन की रासायनिक संरचना पर कोई जहरीला प्रभाव नहीं पड़ता। भोजन पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
2. गर्भवती महिलाओं को चाकू या नुकीली चीजों का उपयोग नहीं करना चाहिए?
मिथक: यह एक गहरा सामाजिक मिथक है कि ग्रहण के दौरान गर्भवती महिला द्वारा चाकू, कैंची या सुई का उपयोग करने से गर्भस्थ शिशु को शारीरिक क्षति पहुँच सकती है।
वैज्ञानिक तथ्य: चिकित्सा विज्ञान स्पष्ट करता है कि किसी औजार के बाहरी उपयोग का भ्रूण के विकास या उसके अंगों की बनावट से कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है। यह केवल एक प्राचीन डर है जिसका कोई आधार नहीं है।
3. क्या ग्रहण काल में पानी पीना वर्जित और अशुद्ध है?
मिथक: माना जाता है कि ग्रहण के समय जल अशुद्ध हो जाता है, इसलिए सूतक काल से लेकर ग्रहण खत्म होने तक पानी की एक बूंद भी नहीं पीनी चाहिए।
वैज्ञानिक तथ्य: विज्ञान कहता है कि यदि पानी ढका हुआ है, तो वह पूरी तरह शुद्ध है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय है कि प्यास लगने पर पानी न पीना 'डिहाइड्रेशन' का कारण बन सकता है, जो शरीर के लिए नुकसानदेह है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



Click it and Unblock the Notifications