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Saiyaara मूवी में Aneet Padda ने निभाया Alzheimer रोगी का किरदार, जानिए इस बीमारी के लक्षण
Alzheimer Symptoms and Cause : अहान पांडे और अनीत पड्डा की म्यूजिकल रोमांटिक बॉलीवुड फिल्म Saiyaara इन दिनों चर्चा में है, और इसकी एक ओर खास वजह यह भी है अभिनेत्री अनीत पड्डा ने बेहद चुनौतीपूर्ण और भावनात्मक किरदार निभाया है। फिल्म में अनीत एक Alzheimer पेशेंट का किरदार निभा रही है, जो इस खतरनाक बीमारी से पीड़ित है। यह सिर्फ एक फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि समाज की एक कड़वी सच्चाई है, जिससे लाखों लोग जूझ रहे हैं।
लेकिन सवाल उठता है, क्या होता है Alzheimer? क्या इसके लक्षण पहचाने जा सकते हैं? और क्या यह बीमारी कम उम्र में भी युवाओं को हो सकता है, आइए जानते हैं।

क्या होता है अल्जाइमर?
अल्जाइमर एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जिसका सीधा असर मस्तिष्क पर पड़ता है। यह धीरे-धीरे दिमाग की कोशिकाओं को नष्ट करती है, जिससे मरीज की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता, व्यवहार और बोलचाल प्रभावित होते हैं। यह डिमेंशिया (मनोभ्रंश) का सबसे आम प्रकार है और उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ जाता है। हालांकि यह 40-50 साल की उम्र में भी हो सकता है, पर अधिकतर मामलों में यह 65 वर्ष से ऊपर के लोगों को प्रभावित करता है।
अल्जाइमर के प्रमुख लक्षण
- रोज की बातें भूल जाना या एक ही बात को बार-बार पूछना
- नाम और चेहरे पहचानने में परेशानी
- निर्णय लेने और समस्याओं को हल करने में कठिनाई
- बोलने या लिखने में अटक जाना
- चीज़ों को गलत जगह रखना और फिर खुद पर शक करना
- स्वभाव में बदलाव जैसे चिड़चिड़ापन, गुस्सा या भ्रम
- सामाजिक गतिविधियों से दूरी बना लेना
- चलने में असंतुलन या दिशा भूल जाना
बीमारी के कारण क्या हैं?
वैज्ञानिक मानते हैं कि अल्जाइमर का मुख्य कारण दिमाग में अमायलॉइड प्लाक्स और टाउ प्रोटीन का असामान्य जमाव है। ये प्रोटीन दिमागी कोशिकाओं के बीच संवाद में रुकावट डालते हैं, जिससे न्यूरॉन्स नष्ट होने लगते हैं। इसके अलावा आनुवंशिक कारण, सिर की पुरानी चोटें, स्ट्रेस, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और स्मोकिंग जैसी जीवनशैली की आदतें भी अल्जाइमर के खतरे को बढ़ा सकती हैं।
किसे होता है ज्यादा खतरा?
- 65 साल या उससे अधिक उम्र के लोग
- परिवार में अल्जाइमर का इतिहास
- हृदय रोग, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित व्यक्ति
- मोटापा या फिजिकल एक्टिविटी की कमी
- धूम्रपान करने वाले
- सिर में कभी गंभीर चोट लगी हो
क्या है इलाज?
फिलहाल अल्जाइमर का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन समय रहते लक्षणों को पहचानकर दवा और देखभाल से इसकी प्रगति को धीमा किया जा सकता है। चिकित्सक आमतौर पर डोनेपेज़िल (Donepezil) या रिवास्टिग्माइन (Rivastigmine) जैसी दवाएं देते हैं, जो दिमागी कोशिकाओं के कार्य को थोड़ा बेहतर बनाती हैं। इसके अलावा याददाश्त बढ़ाने वाले मानसिक व्यायाम, परिवार का भावनात्मक सहयोग और नियमित दिनचर्या इस बीमारी से निपटने में मदद करते हैं।
कैसे करें बचाव?
दिमाग को सक्रिय रखें : किताबें पढ़ें, शतरंज खेलें या नई चीजें सीखें
हेल्दी डाइट लें : हरी सब्जियां, फल, नट्स और मछली
एक्सरसाइज करें, नियमित वॉक और योग करें
नींद पूरी लें और स्ट्रेस को मैनेज करें
स्मोकिंग और अत्यधिक शराब से बचें
क्या कम उम्र में भी हो सकती है ये बीमारी?
अल्जाइमर आमतौर पर 60 साल से अधिक उम्र में होता है, लेकिन कभी-कभी युवा भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। इसके लक्षणों में याददाश्त कमजोर होना, नाम-चेहरे भूलना, रोजमर्रा की बातें याद न रहना, निर्णय लेने में कठिनाई, शब्द भूलना और व्यवहार में बदलाव शामिल हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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