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सच में मोबाइल का इस्तेमाल करने से हो सकता है ब्रेन ट्यूमर? क्या कहती है स्टडी
ब्रेन ट्यूमर बेहद ही घातक साबित हो सकता है। यह ब्रेन में सेल्स के असामान्य रूप से बढ़ने के कारण होता है। ब्रेन ट्यूमर किसी व्यक्ति को किस हद तक प्रभावित कर सकता है, यह मुख्य रूप से उसके साइज, लोकेशन या ग्रोथ पर निर्भर करता है। आमतौर पर, जब व्यक्ति को ब्रेन ट्यूमर होता है तो बहुत तेज सिरदर्द होने से लेकर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं, मतली, उल्टी या फिर व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। अमूमन यह माना जाता है कि उम्र, जेनेटिक्स या फिर एनवायरनमेंटल फैक्टर के कारण ब्रेन ट्यूमर हो सकता है।
वहीं, पिछले कुछ सालों में जिस तरह से ब्रेन ट्यूमर के मामले बढ़े है, उसे देखते हुए अब लोग मोबाइल फोन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने को भी इसकी वजह मानने लगे हैं। हालांकि, इस बात में कितनी सच्चाई है, इसके बारे में कोई सही तरह से नहीं जानता है।

अगर आप भी ऐसा ही कुछ सोचते हैं तो अब आपको पहले इससे जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों के बारे में जान लेना चाहिए। तो चलिए जानते हैं कि ब्रेन ट्यूमर और मोबाइल फोन के आपसी कनेक्शन के बारे में स्टडी क्या कहती है-
लगातार बढ़ रहे हैं मामले
भारत में ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। साल 2020 के आंकड़ों के अनुसार, ब्रेन ट्यूमर भारतीयों में 10वां सबसे अधिक प्रचलित तरह का ट्यूमर था। इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ कैंसर रजिस्ट्रीज़ अर्थात् आईएआरसी के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 28000 से भी अधिक ब्रेन ट्यूमर के मामले सामने आते हैं। इस बीमारी को 24000 से अधिक मौतों का कारण माना जाता है। यहां यह भी समझना जरूरी है कि ब्रेन ट्यूमर सिर्फ अधेड़ उम्र के व्यक्तियों या फिर व्यस्क को ही प्रभावित नहीं करता है, बल्कि बच्चे भी इससे प्रभावित होते हैं।
मोबाइल फोन और ब्रेन ट्यूमर के बीच कनेक्शन
जिस तरह से टेक्नोलॉजी का विकास हो रहा है, लोग इससे होने वाले नुकसान के बारे में भी बात करने लगे हैं। सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में लोगों की इस बात को जानने में रुचि है कि क्या सच में लंबे समय तक मोबाइल का इस्तेमाल करना ब्रेन ट्यूमर का कारण बन सकता है। इसे लेकर स्टडीज भी हुई हैं। हाल ही में किए गए एक आस्ट्रेलियन स्टडीज में 1982 से 2013 तक लगभग तीन दशक की अवधि पर गौर किया गया। हालांकि, 2003 के बाद इस ट्यूमर की अधिक घटनाओं का कोई सबूत नहीं मिला। किसी भी अध्ययन या शोध में यह बात सामने नहीं आई कि सेल फोन के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन ब्रेन ट्यूमर का कारण बन सकता है।
मोबाइल फोन के कम नहीं हैं नुकसान
यह सच है कि अभी तक हुए किसी भी शोध या रेडिएशन में मोबाइल फोन और ब्रेन ट्यूमर का आपसी कनेक्शन साबित नहीं हुआ है। हो सकता है कि मोबाइल फोन के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन से आपको ब्रेन ट्यूमर ना हो। लेकिन लंबे समय तक मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के नुकसान कम नहीं हैं। जब आप लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करते हैं तो इससे आंखों पर तनाव, सूखी आंखें और सिरदर्द हो सकता है। इसके अलावा, स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन के उत्पादन में बाधा डाल सकती है, यह एक हार्मोन है, जो स्लीप को रेग्युलेट करते हैं। जिससे सोने में कठिनाई होती है। इतना ही नहीं, इससे गर्दन और कंधे में दर्द होता है। इतना ही नहीं, मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से लोग सोशली अलगाव या अकेलापन महसूस कर सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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