कहीं आप डिटर्जेंट मिली आइसक्रीम तो नहीं खा रहे? एक्‍सपर्ट ने कहा खाने से क‍िडनी-लीवर हो सकते हैं बेकार

Health risks of synthetic ice cream : हाल ही में कर्नाटक में खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग (FDA) द्वारा की गई छापेमारी में कई आइसक्रीम यूनिट्स बेहद गंदे और अस्वच्छ हालातों में काम कर रही थीं। लगभग आधी यूनिट्स में गंभीर स्तर की मिलावट पाई गई, जिसमें सिंथेटिक दूध, डिटर्जेंट, यूरिया, नकली रंग और सैकरीन जैसे खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल हो रहा था। यही नहीं, आइसक्रीम के साथ-साथ आइस कैंडी और कोल्ड ड्रिंक्स में भी गंदे पानी और जरूरत से ज्यादा फ्लेवर का इस्तेमाल पाया गया।

ये घटना सामने आने के बाद मशहूर फीजियो और न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. रेबिका पिंटो ने सोशल मीड‍िया पर अलर्ट करते हुए बताया कि डिटर्जेंट जैसी चीजें आइसक्रीम में मिलाई जा रही हैं ताकि उसका टेक्सचर क्रीमी लगे। परंतु इसका असर शरीर पर बेहद घातक हो सकता है। उन्होंने कहा कि 2021 में 'हेल्थलाइन' में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, डिटर्जेंट को खाने से पेट में जलन, उल्टी, डायरिया और यहां तक कि ऑर्गन फेलियर भी हो सकता है। डिटर्जेंट में पाए जाने वाले ब्लीचिंग एजेंट्स कपड़े साफ करने के लिए होते हैं, न कि इंसानी पाचन तंत्र के लिए।

Health risks of synthetic ice cream

सांस और पाचन से जुड़ी दिक्कतें

डॉ. पिंटो बताती हैं कि जब इन मिलावटी तत्वों को खाया जाता है, तो वे न सिर्फ गले और पेट में जलन पैदा करते हैं बल्कि यदि इन्हें खाते समय सांस के ज़रिए शरीर में ले लिया जाए तो खांसी, सांस की तकलीफ और फेफड़ों पर असर हो सकता है। लंबे समय तक इनका सेवन लिवर, किडनी और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे शरीर में स्थायी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

बच्चों के लिए और भी घातक

बच्चों के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता वयस्कों की तुलना में कम होती है, इसलिए उनके लिए ये मिलावटी आइसक्रीम और भी ज्यादा खतरनाक बन जाती है। छोटे बच्चों में ऐसे केमिकल्स का असर तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) और पाचन प्रणाली पर गंभीर हो सकता है। इससे विकास पर भी असर पड़ सकता है।

सावधानी बरतें

ऐसे मामलों से बचने का सबसे बेहतर तरीका है कि घर पर ही आइसक्रीम बनाएं, जिससे सामग्री और स्वच्छता पर पूरा नियंत्रण रहे। बाज़ार से आइसक्रीम खरीदते समय उसके ब्रांड, पैकिंग की स्थिति, एक्सपायरी डेट और FSSAI मार्क जरूर देखें। जब अगली बार आइसक्रीम खाने का मन हो, तो यह जरूर सोचें कि कहीं इसका स्वाद आपकी सेहत पर भारी न पड़ जाए।

असली और नकली आइसक्रीम का पता कैसे लगाए

इस तरह की मिलावट से बचने के लिए सबसे अच्छा तरीका है कि आप घर पर बनी आइसक्रीम खाएं, जो सुरक्षित और हेल्दी होती है। बाजार से आइसक्रीम खरीदते समय सतर्क रहें और निम्नलिखित तरीकों से मिलावटी आइसक्रीम की पहचान करें:

1. पैकेट के पीछे लिखे इंग्रेडिएंट्स को पढ़ें

जब भी आइसक्रीम खरीदें, तो उसके पैकेट पर लिखे गए इंग्रेडिएंट्स ध्यान से पढ़ें। अगर उसमें वेजिटेबल ऑयल, पाम ऑयल या आर्टिफिशियल कलर का जिक्र है, तो समझ लीजिए कि यह फ्रोजन डेजर्ट है, न कि असली आइसक्रीम। फ्रोजन डेजर्ट में आमतौर पर दूध नहीं होता, बल्कि सिंथेटिक तत्व होते हैं जो शरीर के लिए नुकसानदायक हैं।

2. पानी टेस्ट करें

एक गिलास साफ पानी में थोड़ी सी पिघली हुई आइसक्रीम डालें। असली आइसक्रीम पानी में आसानी से घुल जाएगी। अगर पानी में झाग बनने लगे या बुलबुले नजर आएं, तो यह मिलावटी है।

3. रबिंग टेस्ट (उंगलियों से जांच)

थोड़ी सी आइसक्रीम को उंगलियों के बीच रगड़ें। अगर उसमें साबुन जैसी चिकनाहट महसूस हो, तो समझ लें कि उसमें डिटर्जेंट या अन्य सिंथेटिक पदार्थ मिले हुए हैं।

4. स्मेल से करें पहचान

असली आइसक्रीम में दूध, मलाई, वनीला या स्ट्रॉबेरी जैसी नेचुरल फ्रेगरेंस आती है। वहीं नकली आइसक्रीम में तेज और कृत्रिम फ्लेवर की गंध महसूस होती है जो रासायनिक होती है।

5. टेक्सचर महसूस करें

असली आइसक्रीम का टेक्सचर स्मूद और क्रीमी होता है। नकली या मिलावटी आइसक्रीम में अक्सर बर्फ के क्रिस्टल या दानेदारपन होता है। यह मुंह में जाते ही महसूस हो जाता है।

6. टिशू पेपर टेस्ट

एक चम्मच आइसक्रीम को टिशू पेपर पर रखें और कुछ देर इंतज़ार करें। अगर उसमें से तेल या पानी के दाग निकलें, तो समझिए यह नकली आइसक्रीम है। असली आइसक्रीम में ऐसा नहीं होता।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

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