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रिफाइनरी शक्कर खानी चाहिए या नहीं, जाने बेहतर विकल्प
कई लोगों को मीठा खाना बेहद पसंद होता है। वे जहां भी कुछ मीठा देखते हैं उनका मन ललचा जाता है और वो उसे खाए बिना नहीं रह पाते। हर किसी को पता है कि ज्यादा मीठा खाना हमारे स्वास्थ्य के लिये बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। मीठे पदार्थ हमारे शरीर के सबसे बड़े दुश्मन की भूमिका निभाते हैं।
डॉक्टर्स हमें रोजाना की खुराक में जितना संभव हो सके, शुगरी पदार्थों का कम सेवन करने की सलाह देती है। सवाल यह है कि क्या सभी तरह की शक्कर सेहत के लिए खराब होती है? हम में से कई लोग ये सोचते हैं कि व्हाइट शुगर की तुलना में ब्राउन शुगर एक तरह से बेहतरीन ऑप्शन है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी ब्राउन और व्हाइट शुगर में कोई ज्यादा अंतर नहीं होता है।
शक्कर सिर्फ शक्कर होता है जो शरीर में जाकर घुल जाता है, सिर्फ इन्हें प्रोसेस करने का तरीका अलग होता है। आइए इस आर्टिकल में जानते है कि कौनसा शुगर खाने लायक होता है।

रिफाइनरी शक्कर खानी चाहिए या नहीं?
भारतीय घरों में सबसे ज्यादा सफेद चीनी का इस्तेमाल किया जाता है। व्हाइट शुगर को गन्ने के रस से प्रोसेस करके बनाया जाता है। जो शुगर जितनी ज्यादा रिफाइंड और प्रोसेस्ड होगी, वह उतनी ही सफेद होगी, लेकिन साथ ही उतनी ही ज्यादा नुकसानदायक भी। चमचमाती शक्कर बहुत ज्यादा रिफाइंड, प्रोसेस्ड और ब्लीच की हुई होती है। नुकसानदायक भी होती है। आपको जानकर यकीन नहीं होगा किफूले हुए पेट और तोंद के पीछे असल वजह सफेद शक्कर होती है। डायबिटीज के रोगियों के अलावा पीसीओडी (पॉलिसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम या पीसीओएस) की तकलीफ से परेशान महिलाओं को भी व्हाइट शुगर से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

बेहतर विकल्प कौन-सा ?
गुड़ को शुगर का नॉन रिफाइन और बिना प्रोसेस किया हुआ रुप मान सकते हैं। इसका रंग गोल्डन ब्राउन से लेकर गहरा ब्राउन तक कुछ भी हो सकता है। यह उस गन्ने की गुणवत्ता पर निर्भर करता है, जिसके रस से गुड़ बनाया जाता है। इसके बारे में पारंपरिक धारणा यही है कि इसे खाने से तत्काल ऊर्जा मिलती है। भोजन के बाद इसका एक टुकड़ा खाने से यह पाचन रसों का स्राव करके भोजन को पचाने में मददगार होता है। इसके अलावा गुड़ में सभी लाभदायक मिनरल्स जैसे आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम और कैल्शियम आदि पर्याप्त मात्रा में होते हैं। इसलिए अगर आपको मीठे का इस्तेमाल करना ही है तो व्हाइट शुगर और ब्राउन शुगर की जगह गुड़ का ही करें।

व्हाइट या ब्राउन क्या खाएं?
हम में से कई लोग इस बात को लेकर कंफ्यूज्ड होते हैं कि व्हाइट शुगर खाएं या ब्राउन शुगर? दरअसल, ब्राउन शुगर को थोड़ा कम प्रोसेस किया जाता है और इसलिए इसका रंग ब्राउन होता है। इसमें थोड़ी-सी मात्रा में कैल्शियम और मैग्नीशियम भी होते हैं। इसलिए यह व्हाइट शुगर की तुलना में थोड़ी बेहतर होती है? लेकिन सेहत के लिहाज से ये भी बिल्कुल सही नहीं होती है। इसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम की थोड़ी मात्रा के अलावा और कुछ भी पोषक तत्व नहीं होते। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी बहुत हाई होता है।
कई बार ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिसमें व्हाइट शुगर को ही ब्राउन कलर करके ब्राउन शुगर के नाम पर बेचा गया। तो खरीदने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना जरूरी है कि वह वाकई ब्राउन शुगर ही हो, नकली ब्राउन शुगर नहीं।

डायबिटीज के मरीज ध्यान रखें
डायबिटीज के मरीजों को हर तरह के मीठे से दूर रहना चाहिए। उन्हें गुड़ भी उतना ही नुकसान कर सकता है, जितना नुकसान कि दोनों तरह की शुगर पहुंचा सकती है। और जो लोग वेटलॉस के लिए कई तरह के उपाय आजमा रहे हैं वो लोग भी ब्राउन शुगर से दूरी बनाकर चलें।



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