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कमर, पीठ और पेट को स्वस्थ बनाए चक्रासन
इस आसन में शरीर की आकृति चक्र जैसी बनती है। इसलिये इसको चक्रासन कहा जाता है। चक्रासन के अभ्यास से शरीर व रीढ़ लचीले होने के साथ यह कई क्रियाओं में मदद भी करता है। वास्तव में यह आसन धनुरासन, उट्रासन व भुजंगासन का लाभ एक साथ पहुँचाता है। चक्रासन का नियमित अभ्यास ‘न्यूरोग्लिया' कोशिकाओं की वृद्धि करता है। न्यूरोग्लिया वह कोशिकायें हैं जो रक्षात्मक व सहायता कोशिकायें होती हैं तथा यह मेरुरज्जु व मस्तिक का 40 प्रतिशत हिस्सा होती है, ये कोशिकायें केन्द्रिय तन्त्रिका को बीमारियों से बचाती है।
सावधानी : चक्रासन को 30 सेकेंड के लिये किया जा सकता है और इसे 2 या 3 बार दोहराया जा सकता है। चक्रासन अन्य योग मुद्राओं की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण है। यदि आप इस आसन को नहीं कर पा रहे हैं तो जबरदस्ती न करें। ह्रदय रोगी उच्च रक्तचाप, हर्निया रोगी,अल्सरेटिव कोलैटिस के रोगी, तथा गर्भ अवस्था के दौरान इस अभ्यास को मत करे।

विधिः भूमि पर बिछे हुए आसन पर चित्त होकर लेट जायें। घुटनों से पैर मोड़ कर ऊपर उठायें। पैर के तलुवे ज़मीन से लगे रहें। दो पैरों के बीच करीब डेढ़ फीट का अन्तर रखें। दोनों हाथ मस्तक की तरफ उठाकर पीछे की ओर दोनों हथेलियों को ज़मीन पर जमायें। दोनों हथेलियों के बीच भी करीब डेढ़ फीट का अन्तर रखें। अब हाथ और पैर के बल से पूरे शरीर को कमर से मोड़कर ऊपर उठायें। हाथ को धीरे-धीरे पैर की ओर ले जाकर स्मपूर्श शरीर का आकार वृत्त या चक्र जैसा बनायें। आँखें बन्द रखें। श्वास की गति स्वाभाविक चलनें दें। चित्तवृत्ति मणिपुर चक्र (नाभि केन्द्र) में स्थिर करें। आँखें खुली भी रख सकते हैं। एक मिनट से पाँच मिनट तक अभ्यास बढ़ा सकते हैं।
लाभः मेरूदण्ड तथा शरीर की समस्त नाड़ियों का शुद्धिकरण होकर यौगिक चक्र जागृत होते हैं। लकवा तथा शरीर की कमजोरियाँ दूर होती हैं। मस्तक, गर्दन, पीठ, पेट, कमर, हाथ, पैर, घुटने आदि सब अंग मजबूत बनते हैं। सन्धि स्थानों दर्द नहीं होता। पाचनशक्ति बढ़ती है। पेट की अनावश्यक चरबी दूर होती है। शरीर तेजस्वी और फुर्तीला बनता है। विकारी विचार नष्ट होते हैं। स्वप्नदोष की बीमारी अलविदा होती है। चक्रासन के नियमित अभ्यास से वृद्धावस्था में कमर झुकती नहीं। शरीर सीधा तना हुआ रहता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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