Latest Updates
-
'कांटे' और 'शूटआउट एट वडाला' के निर्देशक संजय गुप्ता का 57 साल की उम्र में निधन, सामने आई मौत की वजह -
Ahoi Ashtami Vrat Me Pani Kab Piye: अहोई अष्टमी के व्रत में पानी पीना चाहिए या नहीं? जानें व्रत के जरूरी नियम -
Namakpara Recipe: दिवाली पर घर पर बनाएं बिना मैदा के कुरकुरे नमकपारे, निशा मधुलिका ने बताई आसान रेसिपी -
Halloween 2026: क्यों मनाया जाता है हैलोवीन? जानिए कहां और कैसे शुरू हुआ यह 'डरावना त्योहार' -
National Unity Day 2026 Wishes: हमारी पहचान हमारी एकता...राष्ट्रीय एकता दिवस पर आप भी भेजें ये शुभकामना संदेश -
Halloween 2026: हैलोवीन पार्टी के लिए ट्राई करें ये 5 स्पूकी मेकअप आइडियाज, दिखेंगी सबसे अलग -
बार-बार होने वाला सिरदर्द कहीं ब्रेन ट्यूमर तो नहीं? डॉक्टर ने बताए 5 वार्निंग संकेत जिन्हें पहचानना है जरूरी -
Ahoi Ashtami 2026: 1 या 2 नवंबर, अहोई अष्टमी कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Karwa Chauth Wishes For Saasu Maa: आपके आशीर्वाद से...करवा चौथ पर सासू मां को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Happy Karwa Chauth Wishes For Husband: चांद से भी प्यारा...करवाचौथ पर जीवनसाथी को भेजें ये प्यार भरे संदेश
सिर और गले के कैंसर को फिर से लौटने से रोकती है ब्रोकली, शोध
एक नए अध्ययन से पता चला है कि सुपर फ़ूड ब्रोकोली का अधिक सेवन सिर तथा गले के कैंसर के सरवाईवर्स में कैंसर की कोशिकाओं को पुन: बनने से रोकता है।
पीट्सबर्ग यूनिवर्सिटी की प्रमुख लेखिका जूली बोमन के अनुसार, “अक्सर सिर और गर्दन के कैंसर के सरवाईवर्स में यह देखा जाता है कि यह कैंसर कुछ सालों बाद घातक परिणामों के साथ वापस आ जाता है।” ब्रोकोली में सल्फ़ोराफेन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
अध्ययनों के अनुसार यह एक प्राकृतिक आणविक यौगिक है जो पर्यावरण में पाए जाने वाले कैंसर उत्पन्न करने वाले कारकों से लोगों को रक्षा करती है। ब्रोकोली का सेवन करने से कोशिकाओं में सल्फ़ोराफेन बढ़ता है।

उस प्रोटीन का स्तर बढ़ता है जो इस क्रुसिफेरस सब्जी में मिलने वाले डिटॉक्सीफिकेशन जींस को सक्रिय करता है। ये जींस (गुणसूत्र) कैंसर से कोशिकाओं की रक्षा करते हैं क्योंकि ये शरीर से कैंसर उत्पन्न करने वाले कारकों को साफ़ करते हैं, विशेष रूप से सिगरेट के कारण उत्पन्न होने वाले कारक।
कैंसर प्रिवेंशन रिसर्च पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार एक टीम ने सिर तथा गले के कैंसर के रोगियों को सल्फ़ोराफेन के विभिन्न डोज़ दिए तथा उनके कैंसर कोशिकाओं की तुलना गले और मुंह की स्वस्थ कोशिकाओं से की।
इसके अलावा चूहों पर एक परीक्षण यह देखने के लिए किया गया कि ब्रोकोली का सत्व चूहों पर किस प्रकार का प्रभाव डालता है। इन चूहों को सिर और गर्दन के कैंसर के लिए प्रवृत्त किया गया था। परिणामों में यह देखा गया कि जिन चूहों को सल्फ़ोराफेन दिया गया था उनमें अन्य चूहों की तुलना में (जिन्हें सल्फ़ोराफेन का डोज़ नहीं दिया गया) कम कैंसर कोशिकाओं का निर्माण हुआ।
बोमन ने बताया कि, “पौधों से या उनके सत्व से प्रतिरोधी दवाईयों का निर्माण करके उत्पादन और वितरण की लागत को कम किया जा सकता है इससे मृत्यु दर और जीवन की गुणवत्ता पर एक बड़ा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।” (आईएएनएस से प्राप्त जानकारी के अनुसार)
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
