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बीमारियों से बचना है तो घर पर रखें ये नेचुरल एंटीबायोटिक्स, नहीं पड़ेंगे कभी बीमार
एंटीबायोटिक्स को लगभग सभी लोग जानते हैं कि जब बुखार, ज्वर, खांसी, मलेरिया, वायरल, संक्रामण बीमारियां शरीर में ज्यादा दिनों तक रहता है, तो डॉक्टर इनका सेवन करने की सलाह देते हैं। घातक संक्रमण, बैक्टीरिया, वायरल रोगों में एंटीबायोटिक दवाईयां ही शीघ्र असर करती हैं। लेकिन इन एंटीबायोटिक दवाओं को खाने से कुछ नकारात्मक प्रभाव भी पड़ते हैं। इसीलिए जितना हो सके प्राकृतिक एंटीबायोटिक दावायें खाएं, जो हमारे किचन में आसानी से मिल जाती हैं।
इसे मसाले, जड़, फल, चाय, पकवान, व्यजंन, सलाद, जूस आदि के रूप में सेवन करें तो, लगभग सभी संक्रामण, वायरल, बीमारियां शरीर से दूर रहती हैं। प्राकृतिक एंटीबायेटिक अन्य दवाईयों से सैकड़ों गुना ज्यादा सुरक्षित, असरदार और फायदेमंद हैं। प्राकृतिक एंटीबायोटिक अक्सर किचन में ही मौजूद नजरों के आसपास होती हैं।

आइये जानते हैं किंचन में मौजूद एंटीबायेटिक के बारे में, जो कि शरीर को संक्रमण, वायरल, घातक रोगों से बचने के लिये सुरक्षा कवच प्रदान करती हैं। ये शरीर स्वस्थ, निरोग, तन्दुरूस्त बनाये रखने में सहायक है। प्राकृतिक एंटीबायोटिक का सेवन करने से शरीर में रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। स्वस्थ शरीर के लिए प्राकृतिक एंटीबायोटिक बहुत ही महत्वपूर्ण है।

1. लहसुन
लहसुन प्राकृतिक रूप से सबसे ज्यादा एंटीबायोटिक का श्रोत है। लहसुन को हम रोज़ाना सब्जी, दाल, या किसी अन्य खाद्य पदार्थ में डाल कर सेवन करते हैं । इसमें एंटीबायोटिक, एंटीवायरल, एंटी-फ़ंगल और एंटीबायोटिक गुण होते हैं। लहसुन हर तरह के रोगों को नष्ट करने में फायदेमंद है।
कैसे खाएं
- अपने खाने में लहसुन का तड़का लगा कर खाएं।
- इसकी कुछ कलियाँ पीस कर उबालें और चाय की तरह पीएं
- सर्दी लगने पर कच्ची लहसुन खाएं
- इसे अपने खाने में मसाले की तरह डाल कर खा सकती हैं
- दालचीनी चाय बना कर पियें। इसके लिए आप दालचीनी की छड़ी को ½ कप पानी में 10 मिनट के लिए उबाल लें और फिर पीएं
- इससे आपको आंतों के बैक्टीरिया से छुटकारा मिल जाएगा है।
- अपना टूथ पेस्ट खुद बनाएं जिसमें नारियल के तेल मिलाएं जिसमें एंटीबायोटिक होता है। नारियल के तेल से आयल पुल्लिंग करें इससे मुँह के बैक्टीरिया ख़त्म हो जाएंगे।
- बैक्टीरिया को और बढ़ने से रोकने के लिए आप 1 चम्मच एप्पल साइडर विनगर को गर्म पानी में मिला कर सुबह खली पेट पीएं।
- यही नहीं इससे आप खुल्ला भी कर सकते हैं जिससे गाला साफ़ रहेगा
- इसके साथ आप शहद मिला कर भी पी सकते हैं आपको खासी में आराम मिलेगा
- और अगर आपको चोट लग जाये तो रुई के फैये को एप्पल साइडर विनगर में भिगो कर चोट पर लगाएं।
- 2 ग्राम काइन पेपर का पाउडर, गुड़ के साथ मिलाकर खाने से जुकाम जल्द ही ठीक होता है।
- काली मिर्च, घी और शक्कर मिलाकर सेवन करने से आँखों के रोग ठीक होते हैं।
- काइन पेपर का पाउडर सूंघने से बार-बार छींकने से जुकाम से बंद नाक खुलती है, सिरदर्द भी ठीक होता है।
- काइन पेपर को पीसकर दही में मिलाकर गुड़ के साथ खाने से नाक से होने वाला रक्त स्राव बंद होता है
- अंगूर को खाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप इसे अच्छे से पीस लें और फिर इसे खाएं।
- अदरक का पाउडर बनाकर कांच की शीशी में रखें जोकि हर मौसम में इस्तेमाल कर सकते हैं।
- साथ ही इसे छील खाएं या ऐसे ही निगल जाएँ
- और आप अदरक की चाय भी बना कर पी सकते हैं।
- 1 कप गर्म दूध में 1 चम्मच हल्दी और 1/8 चम्मच काली मिर्च मिलाएं।
- संक्रमण से लड़ने में मदद करने के लिए हर 4 घंटे में इसे पीएं।
- 1 चम्मच शहद के साथ 1 चम्मच हल्दी मिला कर पीने से संक्रमण से लड़ने और घावों को ठीक मदद मिलती है।
- 1:1 अनुपात में टी ट्री आयल को मिला लें और घाव पर लगाएं
- इसे आखों के नीचे इस्तेमाल करते वक़्त सावधानी बरते।
- इसके लिए एलोवेरा की पट्टी लें और उसे बीच से काट लें अब इसके जेल को निकाल लें
- अब आप एक गिलास जूस या शहद में 1 चम्मच जेल मिला कर खा सकते हैं। इससे आपकी सर्दी ठीक हो जायेगी।
- इसके साथ अगर आपको कोई घाव हो जाये या आप जल जाएँ तो भी आप इस जेल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

2. दालचीनी
यह कैंडिडा जैसे फंगल इन्फेक्शन को ख़त्म करता है शोधकर्ताओं की माने तो दालचीनी का तेल इ कोली बैक्टीरिया से लड़ने में सक्षम है।
कैसे खाएं

3. नारियल का तेल
नारियल के तेल में काफी बड़ी मात्रा में कैप्रेलिक एसिड पाया जाता है जो शरीर में होने वाले संक्रमण के प्रभाव को कम कर, उसे बढ़ने से रोकता है। यह इंफेक्शन को दूर करने के लिए प्रयोग की जानें वाली दवाओं में भी कैप्रेलिक एसिड ही पाया जाता है। इसलिए नारियल का तेल इसके लिए उपयुक्त माना गया है।
कैसे खाएं

4. एप्पल साइडर विनगर
यह भी एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक के रूप में कार्य करता है। इसे एंटीफंगल,एंटीसेप्टिक गुणों के कारण जाना जाता है जो हमारे शरीर को एल्कालाइज कर देता है।
कैसे खाएं

5. काइन पेपर
आयुर्वेद में काइन पेपर का इस्तेमाल विभिन्न रोग-विकारों की दवाइयां बनाने में किया जाता हैं। काइन पेपर के गुणों से परिचित होने के बाद बहुत सारे लोग घरेलू औषधि के रूप में भी करने लगे हैं। यह कफ, खांसी और जुकाम को ठीक करने में बहुत फायदेमंद है। कम भूख लगना, बदहजमी, अफारा और साँस की बीमारी जैसे दमा आदि में काइन पेपर के सेवन से बहुत लाभ होता है।
कैसे खाएं

6. अंगूर के बीज
अंगूर में पर्याप्त मात्रा में कैलोरी, फाइबर और विटामिन सी, ई पाया जाता है। लेकिन कम ही लोगों को पता होता है कि ये सेहत का खजाना भी है।
कैसे खाएं

7. अदरक
अदरक एंटीबायोटिक का श्रोत है, अदरक खांसी, सांस समस्या, संक्रामण, जुकाम, सर्दी, व शरीर को आंतरिक रूप से बैक्टीरियल होने से बचाता है।
कैसे खाएं

8. हल्दी
हल्दी में शरीर से बैक्टीरियल को नष्ट करने की भरपूर क्षमता होती है। चोट लगने, कटने, फटने, जलने पर हल्दी दूध पीने से शरीर चोट घाव जल्दी ठीक हो जाता है। और फुन्सी, गलन, जख्म खराब होने से बचाता है।
कैसे खाएं

9. टी ट्री आयल
इसमें एंटीबायोटिक गुण पाए जाते हैं।
कैसे खाएं

10. एलोवेरा
एलोवेरा के सेवन से कई तरह के रोगों को दूर किया जा सकता है। एलोवेरा औषधीय गुणों से परिपूर्ण है। साथ ही एलोवेरा बढिय़ा एंटीबायोटिक और एंटीसेप्टिक के रूप में भी काम करता है।
कैसे खाएं



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