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महिलाओं में बिना दवाओं के हार्मोन असंतुलन को ठीक करने के 8 नैचुरल तरीके
लोग मानते हैं कि हार्मोन असंतुलन तभी होता है, जब महिला मैनोपॉज से गुजर रही होती है, खराब खान पान और एक्सरसाइज न करना आदि से यह बिगड़ जाता है।
हार्मोन में असंतुलन किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकता है। अगर शरीर में हार्मोन असंतुलित हो गया तो यह आपकी पूरी लाईफ को उथल पुथल कर के रख सकता है। शरीर में कुल 230 हार्मोन होते हैं, जो शरीर की अलग-अलग क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
हार्मोन की छोटी-सी मात्रा ही कोशिका के मेटाबॉलिज्म को बदलने के लिए काफी होती है। ये एक कैमिकल मैसेंजर की तरह एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक सिग्नल पहुंचाते हैं।

हर्मोन असंतुलन के कई कारण हो सकते हैं जैसे, जीवनशैली, पोषण, व्यायाम, गलत डायट, तनाव और उम्र आदि। लोग मानते हैं कि हार्मोन असंतुलन तभी होता है, जब महिला मैनोपॉज से गुजर रही होती है, खराब खान पान और एक्सरसाइज न करना आदि से यह बिगड़ जाता है। महिलाओं और पुरुषों दोनों में ही हार्मोन असंतुलन के अलग अलग प्रभाव होते हैं।
हार्मोन असंतुलन के कारण महिलाओं का मूड अक्सर खराब रहता है और वे चिड़चिड़ी हो जाती हैं। यह असंतुलन स्वास्थ्य संबंधी सामान्य परेशानियां जैसे मुहांसे, चेहरे और शरीर पर अधिक बालों का उगना, समय से पहले उम्र बढ़ने के लक्षण नजर आना से लेकर मासिक धर्म संबंधी गड़बड़ियां, सेक्स के प्रति अनिच्छा, गर्भ ठहरने में मुश्किल आना और बांझपन जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।

1) नारियल तेल
नारियल का तेल खाने में प्रयोग करने से शरीर में हार्मोन बैलेंस होने लगता है। नारियल के तेल में कोलेस्ट्रॉल को प्रेगेनोनोल में बदलने की क्षमता होती है जो थायरायड हार्मोन सृजन के लिए जरूरी निर्माण खंड है। हार्मोन असंतुलन की वजह से शरीर में जो चर्बी बढ़ने लगी थी वह भी नारियल तेल के प्रयोग से कम होने लगेगी।

2) सेज
पारंपरिक रूप से महिला प्रजनन प्रणाली को सामान्य करने के लिए उपयोग किया जाता है, सेज भारी और अनियमित पीरियड्स का इलाज करने में उपयोगी है। इसके अलावा यह रजोनिवृत्ति के लक्षणों से भी राहत पहुंचनें में यह फायदेमंद है। यह शरीर में हार्मोन संतुलन में भी मदद करता है। रेड सेज में एस्ट्रोजेन होते हैं। इसका इस्तेमाल पेनफुल पीरियड्स के इलाज के लिए औषधीय रूप में किया जाता है।
एक जार में फ्रेश सेज डालें और उसमें शहद डालकर बंद कर दें। इसे तीन दिनों तक छोड़ दें। बाद में इसे आप मीठी चीज में डालकर इस्तेमाल कर सकते हैं।

3) गाजर के बीज
मेनोपॉज के बाद, जब अंडाशय एस्ट्रोजेन का उत्पादन बंद कर देते हैं, तो इससे गंभीर पीठ दर्द जैसी समस्याओं का खतरा होता है। इससे आमतौर पर थाइनिंग बोंस का खतरा होता है। इस स्थिति को ऑस्टियोपोरोसिस के रूप में जाना जाता है।
एक चम्मच गाजर के बीज को एक गिलास गाय के दूध में उबाल लें। इस स्थिति का इलाज करने के लिए नियमित रूप से इस औषधि को लेने की कोशिश करें।

4) लैवेंडर ऑयल
लैवेंडर ऑयल को एक बहुमुखी तेल माना जाता है जिसका उपयोग कई परिस्थितियों के लिए किया जाता है। इसका उपयोग पाचन समस्याओं, दर्द, मांसपेशियों में दर्द और यहां तक कि त्वचा विकारों के लिए भी किया जाता है। इसमें ऐसे गुण हैं जो हार्मोन संतुलन में मदद करते हैं।
जब आप को दर्दनाक मासिक धर्म की अवधि का सामना करना पड़े, तो अपने पेट पर इस तेल से मालिश कर लें। यह बेचैनी और सक्रियता को कम करने में मदद करता है।

5) गुलाब का तेल
गुलाब का तेल हार्मोनल गतिविधि और ग्रंथियों के कार्य को प्रभावित करने के लिए प्रबंधन करता है। इससे मूड स्विंग होता है और प्रसवोत्तर अवसाद को कम करने में मदद मिलती है। गुलाब की कामोत्तेजक गुणवत्ता नपुंसकता के इलाज में उपयोगी है।

6) ब्रोकोली
ब्रोकोली में डायंडोलिमथेन (डीआईएम) का एक विशाल स्रोत है, जो हार्मोन संतुलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ब्रोकोली में एस्ट्रोजेन स्टेबलाइज़र और डीआईएम शामिल है जो पुरुषों और महिलाओं के लिए आवश्यक हैं। यह हार्मोन संतुलन के लिए भी जरूरी है।

7) नट्स
नट्स में बहुत सारा प्रोटीन होता है। प्रोटीन डायट पुरुष और महिला दोनों के लिये अच्छी होती है, जो हार्मोन की गड़बड़ी से ग्रस्थ हैं। फिश, नट और सीड्स ऑयल में आवश्यक फैट हार्मोन उत्पादन के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं।

8) फ्लैक्ससीड्स
इसमें फाइटोएस्ट्रोजन नामक फाइटोकेमिकल्स होते हैं, जो मेनोपॉज के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं। यह ओमेगा 3 फैटी एसिड और हार्मोन बैलेंसिंग फाइटोकेमिकल्स का बेहतर स्रोत है। यह त्वचा को नमी को पुनर्स्थापित करता है और हार्मोन संतुलन को बढ़ावा देता है।



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