चीनी की जगह खाएं खांड, नहीं होंगे शरीर को नुकसान, जानें कैसे बनती है खांड

चीनी खाने के नुकसान तो हम सभी जानते है, ज्‍यादा चीनी का सेवन डायबिटीज मतलब ब्लड शुगर की वजह बनन सकता है और इसके बाद कई और समस्‍याएं भी हो सकती है। पुराने जमाने में लोग चीनी नहीं देसी खांड का इस्‍तेमाल करते थे। ज‍िसे कई जगह गुड़ का बूरा या गुड़िया शक्‍कर के नाम से जानते थे। ये चीनी से कहीं ज्यादा लाभकारी है। खांड के सेवन से हमारी सेहत को कई फायदे हैं जबकि चीनी कई मामलों में खतरनाक है। कई लोग खांड को रोटी और घी के साथ मिलाकर खाना पसंद करते है तो कई लोग मिठाईयों में चीनी की जगह इसका इस्‍तेमाल करते हैं।

बेहतर पाचन की वजह से

बेहतर पाचन की वजह से

खांड खाने से आपको डाइजेशन भी अच्‍छा रहा है क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है। इसलिए अगर आप भी पेट संबंधी समस्‍याओं से दो चार हैं तो खांड बेहतर पाचन में मददगार हो सकती है।

हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ाए

हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ाए

खांड में फाइबर होता है, जो कि शरीर में हेल्दी गट बैक्टीरिया को बनाने में मदद करता है। खांड में मौजूद आयरन खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा के लिए जरूरी है। जिससे एनिमिया की समस्‍या नहीं होती है।

 अर्थराइटिस की समस्‍या ये बचाएं

अर्थराइटिस की समस्‍या ये बचाएं

खांड में मैग्‍नेशियम कैल्शियम से भरपूर होता है। हड्डियों और दांतों के स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम आवश्यक है। ये जोड़ों के दर्द, अर्थराइटिस जैसी समस्याओं को दूर रखता है।

क्या है देसी खांड

क्या है देसी खांड

देसी खांड भी गन्ने के रस से ही बनती है, जिससे शक्कर बनी होती है। शक्कर अत्यधिक रिफाइन की जाती है, इसे तैयार करने पर अधिक प्रोसेसिंग और केमिकल का इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। जिसकी वजह से उसमें मौजूद फाइबर और पोषण खत्म हो जाते हैं, जबकि खांड गन्ने के रस का कम रिफाइंड रूप है, जिस वजह से इसके पोषक तत्‍व खत्‍म नहीं होते है। इसके अलावा खांड में कोई केमिकल इस्तेमाल नहीं होताजाते हैं, जो इसे चीनी से बेहतर विकल्प बनाता है।

 कैसे बनती है खांड?

कैसे बनती है खांड?

गन्ने के रस को गर्म करके एक बर्तन में घुमाया जाता है। इसे पानी और दूध से इसमें मौजूद गंदगी या मौल को साफ किया जाता है। इस तरह खांड भूरे रंग के पाउडर के रूप में तैयार हो जाता है। घी से इसमें घुटाई भी की जाती है। इसके बाद इसे सुखाने के बाद ही खांड तैयार हो जाती है। चीनी के उपयोग की वजह से धीरे-धीरे इसका इस्‍तेमाल कम हो गया है।

Story first published: Thursday, August 5, 2021, 18:37 [IST]
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