Latest Updates
-
वायरल बुखार, खांसी-जुकाम और इंफेक्शन से बचने के लिए करें ये 5 योगासन, इम्यूनिटी होगी बूस्ट -
‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ के बाद निमिषा सजयन ने ऐसे घटाया 14 किलो वजन, एक्ट्रेस ने शेयर की वेट लॉस जर्नी -
Paryushana Mahaparva 2026: आज से शुरू हुआ हुआ पर्युषण महापर्व, जानें आठ दिनों का महत्व और नियम -
पेरिस में बना फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर, 1970 के संकल्प से 2026 तक ऐसे पूरा हुआ सफर -
International Literacy Day 2026: क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस? जानें इतिहास, महत्व और थीम -
International Literacy Day 2026: साक्षरता दिवस पर ये संदेश भेज सबको करें जागरूक, बताएं पढ़ने-लिखने का महत्व -
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य -
Aja Ekadashi 2026: नारायण की कृपा...इन संदेशों के साथ अपने प्रियजनों को भेजें अजा एकादशी की शुभकामनाएं -
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय
मैराथन में पहली बार दौड़ने वाले भी रहते हैं फिट, दूर होती हैं कई बीमारियां
हाल ही में की गई एक रिसर्च में शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग मैराथन में भागते हैं वो तो हेल्दी रहते हैं जब कि जो लोग पहली बार भी मैराथन दौड़ते हैं, उन्हें भी कई फायदे होते हैं। बार्ट्स हेल्थ एनएचएस ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, जो लोग पहली बार मैराथन में दौड़ने जा रहे होते हैं, उनका न सिर्फ ब्लड प्रेशर सामान्य हो जाता है, बल्कि धमनियों की बाहरी परत भी सख्त होने से बच जाती हैं। अगर धमनियां और उनकी बाहरी वॉल सख्त हो जाए तो हार्ट स्ट्रोक हो सकता है।

जर्नल ऑफ अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियॉलजी में प्रकाशित इस अध्ययन में यह बात भी सामने आई कि जो लोग मैराथन की ट्रेनिंग लेते हैं और इस दौड़ को पूरा भी करते हैं उनकी धमनियों की उम्र यानी वस्कुलर एज 4 साल तक कम हो जाती है, जिससे वे लंबे समय तक हेल्दी रहते हैं।
इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 138 स्वस्थ ऐसे रनर यानी मैराथन धावकों के ग्रुप के आंकड़ों को देखा, जिन्होंने 2016 या 2017 में लंदन मैराथन पूरी की थी। इन मैराथन धावकों की कोई कार्डिएक हिस्ट्री नहीं थी। बस वे प्रशिक्षण के लिए प्रति सप्ताह 2 घंटे से भी कम दौड़ रहे थे। इस अध्ययन में शामिल औसत प्रतिभागी की आयु 37 वर्ष थी और शामिल प्रतिभागियों में पुरुष और महिलाओं की संख्या भी समान थी।
मैराथन की ट्रेनिंग शुरू होने से पहले सभी शामिल प्रतिभागियों का हेल्थ चेकअप किया गया। यह ट्रेनिंग करीब 6 महीने तक चली। मैराथन दौड़ पूरी करने के तीन हफ्तों के अंदर ही सभी प्रतिभागियों के फिर से वही हेल्थ चेकअप और टेस्ट किए गए। बाद में शोधकर्ताओं ने पाया कि पुरुषों ने साढ़े चार घंटे में मैराथन दौड़ पूरी की जबकि महिलाओं ने वही दौड़ 5 घंटे और 40 मिनट में पूरी की।
बार्ट्स हार्ट सेंटर और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की डॉक्टर चार्लोट मनिस्टी ने कहा, 'चूंकि नए साल में क्लीनीशियन मरीजों से मिल रहे हैं, इसलिए मैराथन या फिर इस तरह की दौड़ को अगर एक गोल ओरियंटेड एक्सरसाइज बना दिया जाए, तो यह हमारे मरीजों को क्टिव रखने के लिए एक प्रोत्साहन का काम करेगी। हमारी यह स्टडी जीवनशैली में बदलाव और उसके महत्व पर रोशनी डालती है। यह बताती है कि किस तरह जीवनशैली में बदलाव करके बढ़ती उम्र से संबंधित रिस्क को कम किया जा सकता है।' उन्होंने आगे यह भी कहा कि महज 6 महीने की मैराथन ट्रेनिंग के जरिए ब्लड वेसल्स यानी रक्त वाहिकाओं को सख्त होने और उनकी वजह से होने वाले दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
