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बिना शराब पिए भी लिवर हो रहा खराब! भारत में खतरनाक रफ्तार से फैल रही ये साइलेंट बीमारी, एम्स ने दी चेतावनी!
Fatty Liver in India: तेजी से बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों ने फैटी लिवर को एक आम बीमारी बना दिया है। लेकिन अब AIIMS दिल्ली और लखनऊ स्थित संजय गांधी पीजीआई की नई स्टडी में अब इस बीमारी को भारत के लिए 'हेल्थ इमरजेंसी' के तौर पर देखा जा रहा है।
डायबिटीज और हार्ट अटैक के बाद अब यह बीमारी भारत में चुपचाप फैल रही है, जो बच्चों और वयस्कों दोनों को अपनी चपेट में ले रही है।

फैटी लिवर क्या है?
फैटी लिवर दो प्रकार का होता है, एल्कोहॉलिक और नॉन-एल्कोहॉलिक। इस स्टडी में जिस प्रकार की बीमारी का उल्लेख हुआ है, वह नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) है। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें बिना शराब पिए लिवर में वसा जमने लगती है। समय के साथ यह बीमारी गंभीर हो सकती है और नॉन-एल्कोहॉलिक स्टिएटोहेपेटाइटिस (NASH) का रूप ले सकती है, जिससे लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस या यहां तक कि लिवर कैंसर तक हो सकता है।
स्टडी में क्या खुलासा हुआ?
AIIMS और SGPGI की इस स्टडी में देशभर के 50,000 मामलों का विश्लेषण किया गया, जिनमें 2,908 बच्चे और 23,581 वयस्क शामिल थे। वयस्कों में NAFLD की दर 38.6% और बच्चों में 35.4% पाई गई, जो बेहद चिंताजनक आंकड़े हैं। शोध में सामने आया कि दुनियाभर में 25% लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं, और मिडिल ईस्ट व साउथ अमेरिका जैसे क्षेत्रों में यह सबसे ज्यादा फैली है। वहीं, भारत में 6.7% से लेकर 55.1% वयस्कों में NAFLD पाया गया है।
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
इस बीमारी का खतरा उन लोगों में ज्यादा है जो पहले से ही कुछ मेटाबॉलिक समस्याओं से जूझ रहे हैं:
- डायबिटीज: 55-60% मामलों में
- मोटापा: 65-95% मामलों में
- मेटाबॉलिक सिंड्रोम: 73% मामलों में
बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहा है खतरा
शोध में बताया गया कि भारत में 7.3% से 22.4% तक स्वस्थ दिखने वाले बच्चे भी NAFLD से प्रभावित हैं। यह समस्या उम्र के साथ गंभीर होती जाती है। खराब डाइट, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और अत्यधिक स्क्रीन टाइम इसके प्रमुख कारण हैं।
लाइफस्टाइल में बदलाव है सबसे बड़ा इलाज
AIIMS के डॉ. प्रमोद गर्ग, डॉ. गोविंद माखरिया, डॉ. शालीमार और अन्य विशेषज्ञों ने यह स्पष्ट किया है कि NAFLD का इलाज केवल दवाओं से नहीं किया जा सकता। इसके लिए जीवनशैली में सुधार सबसे जरूरी कदम है।
क्या करें?
- खानपान में सुधार करें
- तेल की मात्रा 10% तक कम करें
- जंक और पैकेज्ड फूड से दूर रहें
- आधी प्लेट में सब्जियां और फल शामिल करें
- नियमित व्यायाम
- रोजाना कम से कम 30-40 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी करें
- बच्चों को आउटडोर गेम्स के लिए प्रेरित करें
- नींद और तनाव प्रबंधन
- समय पर सोना और उठना
- पर्याप्त नींद लेना और तनाव से दूर रहना जरूरी है
क्या है वजह?
गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. शालिमार के अनुसार, फैटी लिवर का सबसे बड़ा कारण मोटापा है। जिन लोगों को डायबिटीज, हार्ट डिजीज या ओबेसिटी की समस्या है, वे हाई रिस्क ग्रुप में आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2050 तक भारत में मोटापा तेजी से बढ़ेगा, जिससे फैटी लिवर की बीमारी और गंभीर हो सकती है। यह लाइफस्टाइल से जुड़ी ऐसी बीमारी है, जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है
किन बातों का रखें विशेष ध्यान?
- शराब पूरी तरह छोड़ दें
- वजन नियंत्रित रखें और नियमित चेकअप कराएं
- डॉक्टर की सलाह से जरूरी टेस्ट (जैसे अल्ट्रासाउंड और लिवर फंक्शन टेस्ट) कराएं
इंडियन डाइट में संतुलन जरूरी
डॉ. साग्निक बिस्वास का मानना है कि भारतीय भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और आयरन का संतुलन जरूरी है। मगर जंक फूड और ट्रांस फैट इस संतुलन को बिगाड़ते हैं, जिससे लिवर और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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